जानिए क्या है निर्जला एकादशी, इस दिन ऐसा करने से मिलेगा पुण्य

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आज है भीमसेनी या पांडव एकादशी के नाम से जाना जाने वाला निर्जला एकादशी। हिंदु धर्म में इस दिन व्रत रखने से साल भर की एकदाशी का पुण्य प्राप्त होने की मान्यता है। सबसे कठिन ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी होती है। भगवान विष्णु को यह एकादशी बहुत प्रिय हैं। इस दिन स्नान, दान और व्रत का बहुत महत्व है। ऐसी मान्यता है कि निर्जला एकादशी के दिन व्रत रख कथा सुनने से निश्चय ही स्वर्ग की प्राप्ति होती है। इस दिन लोग जलदान करते हैं। ज्येष्ठ की तपती धूप में सड़कों पर मीठा जल और शर्बत पिलाते हैं इसके अलावा भंडारे का भी आयोजन किया जाता है। आज हम आपको बता रहें हैं इस व्रत की कथा और इस दिन किन चीजों का दान करना चाहिए:

साथ ही भगवान विष्णु के मंत्र- ‘ऊं नमो भगवते वासुदेवाय:’ का जाप दिन-रात करते रहना चाहिए। गोदान, वस्त्र दान, छत्र, जूता, फल आदि का दान करना चाहिए।

इस दिन बिना पानी पिए जरूरतमंद आदमी को हर हाल में शुद्ध पानी से भरा घड़ा यह मंत्र पढ़ कर दान करना चाहिए।

इस पर्व पर कही जाने वाली कथा के अनुसार एक बार महर्षि व्यास से भीम ने कहा, ‘भगवन! युधिष्ठर, अर्जुन, नकुल, सहदेव, माता कुंती और द्रौपदी सभी एकादशी का व्रत करते हैं। मुझसे भी व्रत रखने को कहते हैं, परंतु मैं तो बिना खाए रह नहीं सकता। मेरे उदर में तो वृक नामक अग्नि है। इसलिए चौबीस एकादशियों में निराहार रहना मेरे बस का नहीं। मुझे तो कोई ऐसा व्रत बताइए, जिसे करने में मुझे असुविधा न हो। स्वर्ग की प्राप्ति सुलभ हो।’

तब व्यास जी ने कहा, ‘कुंतीनंदन, धर्म की यही विशेषता है कि वह सबको धारण ही नहीं करता, वरन सबके योग्य साधन व्रत-नियमों की सहज और लचीली व्यवस्था भी करता है। ज्येष्ठ मास में सूर्य के वृष या मिथुन राशि पर रहने पर शुक्ल पक्ष की निर्जला नाम की एकादशी का तुम व्रत करो। इसे करने से तुम्हें वर्ष की समस्त एकादशियों का फल भी प्राप्त होगा और तुम इस लोक में सुख, यश प्राप्त कर मोक्ष-लाभ प्राप्त करोगे। केवल कुल्ला या आचमन करने के लिए मुख में जल डाल सकते हो। इसके अलावा जल पीने से व्रत भंग हो जाता है। एकादशी को सूयार्ेदय से लेकर दूसरे दिन के सूर्योदय तक जल का त्याग करना चाहिए।’

भीम ने बडे़ साहस के साथ निर्जला एकादशी का व्रत किया। द्वादशी को स्नान आदि कर भगवान केशव की पूजा कर व्रत सम्पन्न किया। इसी कारण इसे भीमसेन एकादशी भी कहा जाता है।