मुंबई। बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई। इसका मुख्य कारण अमेरिकी फेड रिजर्व द्वारा प्रमुख ब्याज दरों में चौथाई फीसदी की बढ़ोतरी करना है। इससे वहां की ब्याज दरें एक फीसदी से सवा फीसदी तक हो गई है। साप्ताहिक आधार पर सेंसेक्स 205.66 अंकों या 0.65 फीसदी की गिरावट के साथ 31,056.40 पर बंद हुआ और निफ्टी 80.20 अंकों या 0.82 फीसदी की गिरावट के साथ 9,588.05 पर बंद हुआ। बीएसई के मिडकैप सूचकांक में 0.45 फीसदी और स्मॉलकैप सूचकांक में 0.75 फीसदी की गिरावट देखी गई।


सोमवार को सेंसेक्स में गिरावट देखी गई और यह 166.36 अंक या 0.53 फीसदी की गिरावट के साथ 31,095.70 पर बंद हुआ। मंगलवार को सेंसेक्स में तेजी आई और यह 7.79 अंक या 0.03 फीसदी की तेजी के साथ 31,103.49 पर बंद हुआ।

बुधवार को सेंसेक्स 52.42 अंक या 0.17 फीसदी बढ़कर 31,155.91 पर बंद हुआ। गुरुवार को फेड रिजर्व के फैसले के कारण सेंसेक्स में गिरावट आई और यह 80.18 अंक या 0.26 फीसदी गिरावट के साथ 31,075.73 पर बंद हुआ और शुक्रवार को सेंसेक्स 19.33 अंक या 0.06 फीसदी की गिरावट के साथ 31,056.40 पर बंद हुआ।

इस सप्ताह सेसेंक्स के जिन शेयरों में तेजी आई, उनमें प्रमुख रहे – डॉ. रेड्डीज (1.41 फीसदी), आईटीसी (0.03 फीसदी), एचडीएफसी बैंक (0.22 फीसदी), रिलायंस इंडस्ट्रीज (3.92 फीसदी), एनटीपीसी (1.49 फीसदी), पॉवरग्रिड (1.33 फीसदी) और सन फार्मा (0.83 फीसदी)।

सेंसेक्स के गिरावट वाले शेयरों में प्रमुख रहे – एक्सिस बैंक (0.73 फीसदी), भारतीय स्टेट बैंक (0.92 फीसदी), आईसीआईसीआई बैंक (1.65 फीसदी), मारुति सुजुकी इंडिया (2.48 फीसदी), महिंद्रा एंड महिंद्रा (2.66 फीसदी), हीरो मोटोकॉर्प (0.51 फीसदी), बजाज ऑटो (1.99 फीसदी), टाटा मोटर्स (2.50 फीसदी), विप्रो (5 फीसदी), इंफोसिस (0.86 फीसदी), टीसीएस (4.49 फीसदी), लार्सन एंड टुब्रो (2.81 फीसदी), ल्यूपिन (2.55 फीसदी) और कोल इंडिया (2.39 फीसदी)।

व्यापक आर्थिक आंकड़ों को मोर्चे पर देश के निर्यात में मई में 8.32 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। आधिकारिक आंकड़े गुरुवार को जारी की गई। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में निर्यात 8.32 फीसदी बढ़कर 24.01 अरब डॉलर रहा, जोकि पिछले साल के मई में 22.17 अरब डॉलर था।

मंत्रालय ने एक बयान में कहा, “पिछले आठ महीनों से निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है। साल 2016 के सितंबर से मई तक डॉलर के संदर्भ में निर्यात में 8.32 फीसदी की तेजी देखी गई है। मई में गैर पेट्रोलियम और गैर आभूषण का निर्यात 17.51 अरब डॉलर रहा, जबकि साल 2016 के मई में यह 16.40 अरब डॉलर था।”

हालांकि समीक्षाधीन माह में देश के आयात में 33.09 फीसदी की बढ़ोतरी देखी गई और यह कुल 37.85 अरब डॉलर रही। पिछले महीने देश का तेल आयात में 29.54 फीसदी की वृद्धि हुई और यह 7.69 अरब डॉलर रही।

खाद्य पदार्थो की कीमतों में आई गिरावट से थोक कीमतों पर आधारित देश की महंगाई दर पिछले पांच महीनों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, संशोधित आधार वर्ष 2011-12 के अनुसार मई में थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) मई में घटकर 2.17 फीसदी पर आ गया, जो अप्रैल में 3.85 फीसदी था। इस गिरावट में खाने-पीने की चीजों के दाम घटने का प्रमुख योगदान है।

अप्रैल में थोक मूल्य सूचकांक गिरकर 3.85 फीसदी था, जो मार्च में 5.11 रहा था। हालांकि साल 2016 के मई में यह गिरकर 0.90 फीसदी पर आ गया था।

वर्तमान डब्ल्यूपीआई के आधार वर्ष को सरकार ने पिछले महीने संशोधित किया था और इसे 2004-05 की जगह 2011-12 कर दिया था। सरकार ने कहा कि इसमें अप्रत्यक्ष कर शामिल नहीं है, इससे मुद्रास्फीति में अस्थिरता कम हो रही है।

साल-दर-साल आधार पर प्राथमिक उत्पादों पर खर्च में 1.79 फीसदी की गिरावट आई। एक साल पहले इसी महीने इसमें 4.38 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई थी। थोक मूल्य सूचकांक में प्राथमिक वस्तुओं की हिस्सेदारी 22.62 फीसदी होती है।

वैश्विक मोर्चे पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की। दिसंबर 2015 के बाद पहली बार ब्याज दरों में इजाफा किया गया है। समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने फेडरल रिजर्व के हवाले से बताया, “श्रम बाजार और महंगाई के मद्देनजर फेडरल ओपन मार्किट समिति ने ब्याज दरों में चौथाई फीसदी बढ़ोतरी का फैसला किया है, जिसके बाद ब्याज दरें 1 से 1.25 फीसदी तक हो गई हैं।”