“मैं और मेरा” का अनुभव

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प्रश्न व्यथा देते हैं और आनंद भी। सारी दुनिया में मनोविज्ञान की प्रतिष्ठा है। सिगमण्ड फ्रायड ने मनोविश्लेषण पर साइको एनालिसिस नाम का महाग्रंथ लिखा। आश्चर्यचकित हूं। हरेक मनुष्य की अपनी अनुभूति है। फ्रायड की भी अपनी अनुभूति है। उसके निष्कर्ष सब पर लागू नहीं हो सकते। पदार्थो के गुणधर्म होते हैं। आग सबको ताप देती है। यह सार्वजनिक ज्ञान है। दुख सुख अंदर के भाव हैं। वे सब पर एक समान नहीं लागू हो सकते। दूसरे व्यक्ति के भाव कैसे पकड़े जा सकते हैं? हमारे आवास में आम का पुराना पेड़ है। यह आलेख लिखते समय वह मधुर फलों से लदाफंदा है।

यू.पी. की राजधानी में होकर भी राजनीति से निरपेक्ष। वह अपनी डाल पर बैठी कोयल को गाने से मना नहीं करता। कोयल बड़ी देर से गा रही थी। सूर्य विश्राम को गये। वह भी चुप। आगे नहीं पता उसकी कार्य सूची क्या है? आम की डालों पर नन्हें नन्हें कीट हैं। संभवतः पके आमों की गंध के रसिया हैं सब। मैं पेड़ के नीचे जाता हूं। वे सिर पर चढ़ आते हैं। मैं पेड़ से दूर जाता हूं। वे उड़ जाते हैं। उन्हें मानुषगंध प्रिय नहीं है संभवतः। जामुन का पेड़ भी लदाफंदा है। निस्वार्थ और अहैतुक। जामुन प्राचीन काल से ही हम भारतवासियों का प्रिय फल है। प्राचीन गण देवता गणेश को भी यह बहुत प्रिय था। बेल का पेड़ भी मजबूत फलों से भरापूरा है। पर ऐसे सारे फल हमारे कर्मफल का परिणाम नहीं हैं।

आगे: कैसा है विश्व भूगोल को जानने वालों का संसार

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