नई दिल्ली। आगामी राष्ट्रपति चुनाव में तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने सोमवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को समर्थन देने का निर्णय लिया। तेलंगाना में सत्तारूढ़ टीआरएस ने यह निर्णय पार्टी अध्यक्ष व तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात होने के बाद लिया है।

बिहार के राज्यपाल कोविंद को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने के निर्णय के तुरंत बाद प्रधानमंत्री मोदी ने राव को फोन किया था और उनसे उम्मीदवार को अपना समर्थन देने का अनुरोध किया था।

मुख्यमंत्री ने एक बयान में बताया कि प्रधानमंत्री ने उनसे कहा कि ‘आपके सुझाव को देखते हुए हमने एक दलित को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाने का निर्णय लिया है।’ मोदी ने राव से उम्मीदवार को समर्थन देने का अनुरोध किया। टीआरएस प्रमुख ने पार्टी के नेताओं से विचार-विमर्श के बाद प्रधानमंत्री को राष्ट्रपति उम्मीदवार कोविंद को अपनी पार्टी का समर्थन देने का वायदा किया।

वहीं दूसरी तरफ ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने भी राजग के उम्मीदवार को समर्थन देने की घोषमा कर दी है। इससे पहले सोमवार को नवीन पटनायक ने कहा था कि उनकी पार्टी बीजू जनता दल(बीजद) राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन(राजग) की ओर से घोषित राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने पर कोई निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से बातचीत के बाद लेगी। पटनायक ने यहां मीडियाकर्मियों से कहा, “राजग उम्मीदवार पर हम अपनी स्थिति पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बातचीत के बाद स्पष्ट करेंगे। इसके बाद ही हम आपको इसके बारे में बताएंगे।” लेकिन सूत्रों की मानें तो पार्टी बैठक में इस बात पर सहमति बना ली गई की रामनाथ कोविंद को बीजद की तरफ से समर्थन दिया जाएगा।

दूसरी तरफ भाजपा की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने इस मामले पर मंगलवार को फैसला लेने की बात कही है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि राजग के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने पर निर्णय पार्टी नेताओं से मंगलवार को चर्चा के बाद लिया जाएगा। ठाकरे ने शिवसेना के 51वें स्थापना दिवस पर पार्टी कार्यकर्ताओं की एक रैली को संबोधित करते हुए घोषणा की, “हम बगैर चर्चा के कोई निर्णय नहीं लेंगे और इसकी घोषणा कल (मंगलवार) को की जाएगी।”

उन्होंने कहा कि यदि अगला राष्ट्रपति देश के लिए लाभकारी हो “तो किसी को भी बना दो। हम समर्थन देंगे।”

उन्होंने कहा कि लेकिन यदि उम्मीदवारी दलित वोट पक्का करने के इरादे से है, तो पार्टी इसे बर्दाश्त नहीं करेगी, क्योंकि शिवसेना वोट बैंक की राजनीति से दूर रहती है।