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प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी के एजेंडे में सबसे पहले गरीब, युवा, किसान और महिलाएं हीं प्रमुखता से शामिल रही हैं। इसी का प्रभाव है कि सरकार के गठन के बाद से जितनी भी योजनाएं सरकार के द्वारा बनाई गई उसमें इनको लक्ष्य कर योजनाओं का सृजन और क्रियान्वयन किया गया। प्रधानमंत्री मोदी के कुशल नेतृत्व और जनता के प्रति लगाव का ही नतीजा था कि गरीब महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़ी सबसे बड़ी समस्या से निपटने के लिए उनके आह्वान पर देश की बड़ी आबादी ने एलपीजी सब्सिडी लेने से मना कर दिया जिसका नतीजा है कि आज देश की बड़ी आबादी जो गरीबों की है उसको मोदी सरकार की मुफ्त घरेलू रसोई गैस कनेक्शन योजना का लाभ मिल पा रहा है। 2014 में सरकार के गठन के बाद से मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने में चंद दिन बाकी है। ऐसे में सरकार की इस योजना की समीक्षा करना बेहद जरूरी है।

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इस योजना की समीक्षा से पहले डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट की माने तो बारत में हर वर्ष 5 लाख महिलाएं की धुएं में खाना बनाने की वजह से मौत हो जाती है। ऐसे में एलपीजी गैस के बढाने से लोगों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाया जा सकता है, इसका लाभ देशभर की महिलाओं को होगा। उज्जवला योजना की खास बात यह है कि एलपीजी कनेक्शन महिलाओं के नाम से ही दी जाती है। ऐसे में गैस पर मिलने वाली सब्सिडी भी महिलाओं के खाते में सीधे जाती है, जो उन्हें आर्थिक मदद भी पहुंचाती है।

…तो इतनी महिलाओं को मिल चुका है  मुफ्त घरेलू रसोई गैस कनेक्शन

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