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वाशिंगटन पोस्ट ने शलभ कुमार पर छापी ‘गलत’ खबर, भारतीय-अमेरिकी खफा

by on February 27, 2017

नई दिल्ली, 27 फरवरी। वाशिंगटन पोस्ट ने भारतीय अमेरिकी बिजनेस मैन शलभ कुमार को लेकर एक खबर छापी थी। जिसमें बताया गया था कि वह ट्रंप के खासमखास हैं और हिंदूवादी विचारधारा को लगातार बढ़ाने की जुगत में लगे हुए हैं। ऐसे में ट्रंप से उनकी नजदीकी को मोदी सरकार भी भुनाने की कोशिश में है और उन्हें अमेरिका का एंबेसडर बनाया जा सकता है। वाशिंगटन पोस्ट की इस लेख में शलभ कुमार को लेकर कई तथ्यों को शामिल किया गया है और बताया गया है कि वह हिंदुओं को लेकर अपना दृष्टिकोण स्पष्ट तौर पर पेश करते हैं और इसी का प्रभाव है कि वह ट्रंप के चहेते लोगों में से हैं। इसी वजह से भारत की नरेंद्र मोदी सरकार अमेरिका में उन्हें बड़ी जिम्मेवारी सौंपने की तैयारी है। अमेरिका में रह रहे हिंदू लोगों के संगठन ने इस खबर को सिरे से खारिज करते हुए लिखा है कि यह मनगढ़ंत खबर है और इसका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं है। इस खबर को लिखे जाने को लेकर वाशिंगटन पोस्ट से रिपब्लिकन हिन्दू कोअलिशन के लोगों ने माफी की भी मांग की है।

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वाशिंगटन पोस्ट की इस खबर को लेकर अमेरिकी संसद के एक सदस्य ने भी इस खबर को सिरे से खारिज कर दिया है। अखबार को अपनी तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा है कि भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को मजबूत करने की दिशा में शलभ कुमार हमेशा से प्रयासरत रहे हैं ऐसे में उनके ऊपर किसी भी तरह का सवाल खड़ा करना वाजिब नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस बार ट्रंप सरकार का नारा भी शलभ कुमार ने हीं दिया था। जिस कारण ट्रंप को भारतीय अमेरिकन समुदाय के लोगों का अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ था।

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इससे पहले शलभ कुमार कई मुद्दों पर मुखर होकर अपनी राय देते रहे हैं। खासकर आतंकवाद के मुद्दे पर वह खुलकर बोलने से कभी भी पीछ नहीं रहे हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि अमेरिका-भारत गठबंधन आतंकवाद के लिए एक ‘‘प्रचंड’’ खतरा है।

रिपब्लिकन हिन्दू कोअलिशन के संस्थापक शलभ कुमार ने ब्रीटबर्ट न्यूज से कहा था कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एकसाथ मिलकर अब आतंकवादियों के सबसे बड़े शत्रु हैं। दोनों प्रतिबद्ध राष्ट्रवादी हैं और दोनों ही जनता के लिए अधिक नौकरियों तथा आर्थिक वृद्धि के लिए आगे बढ़ने की इच्छा रखते हैं।

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कुमार ने कहा था कि अमेरिका और भारत के बीच गहरा संबंध पहले ही ‘‘इस्लामी’’ चरमपंथ के खिलाफ लड़ाई को काफी आगे बढ़ा रहा है।

इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आव्रजन से संबंधित नए आदेश पर हिंदू-अमेरिकी समुदाय बंटा हुआ था। समुदाय के कुछ लोग इस आदेश को ‘पूरी तरह से गैरकानूनी’ बता रहे थे तो अन्य उन राष्ट्रों की सूची में पाकिस्तान और सऊदी अरब को भी शामिल करने की मांग कर रहे थे। चुनाव के दौरान ट्रंप के लिए प्रचार करने वाले रिपब्लिकन हिंदू कोअलिशन (आरएचसी) ने राष्ट्रपति के शासकीय आदेश को पूरा समर्थन देने की घोषणा की थी। आरएचसी के अध्यक्ष शलभ कुमार ने कहा था कि ‘इस्लामी आतंकवाद से नागरिकों की रक्षा के लिए उठाए गए ट्रंप प्रशासन के निर्णायक कदम की हम सराहना करते हैं।’ आरएचसी बोर्ड सदस्यों ने अफगानिस्तान, पाकिस्तान और सऊदी अरब को भी उन मुस्लिम बहुल सात देशों ईरान, इराक, लीबिया, सीरिया, सोमालिया, सूडान और यमन की सूची में शामिल करने की मांग की थी जिनके नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाया गया है।

वहीं अमेरिका के जाने-माने दानदाता और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थक भारतवंशी शलभ कुमार ने यूएस में काम करने वाले भारतीयों में एच-1 बी वीजा के प्रति भय खत्म करते हुए दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन की ओर से निकट भविष्य में एच-1 बी वीजा को लेकर किसी कार्यकारी आदेश को मंजूरी देने की योजना नहीं है।

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शिकागो स्थित रिपब्लिकन हिंदू गठबंधन के प्रमुख शलभ कुमार ने पत्रकारों से कहा था कि – ‘अमेरिका में अभी और एच-1 बी वीजा जारी किए जाने की जरूरत होगी। भारत से इस वीजा पर अमेरिका में जितने लोग हैं, उस संख्या में निकट भविष्य में इजाफा होगा।’

उन्होंने कहा था कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था के विकास में आईटी सेक्टर महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। शलभ कुमार ने कहा था कि अमेरिका में फिलहाल आईटी कर्मचारियों की खासी कमी है और इसे भारतीय आईटी पेशेवरों द्वारा ही पूरा किया जा सकता है। उन्होंने कहा था कि ट्रंप प्रशासन की ओर से एच-1 बी वीजा का दुरुपयोग व धोखाधड़ी रोकने के प्रयास जरूर किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि व्हाइट हाउस द्वारा प्रत्येक देश का ग्रीन कार्ड कोटा कम करने का फैसला लिया जा सकता है। इसके तहत व्यक्ति को अमेरिका का वैध स्थायी नागरिक बनने का अधिकार मिलता है।

ट्रंप को लेकर फैली निराश को लेकर जहां एक तरफ माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है वहीं ट्रंप के चुनाव प्रचार में जोर-शोर से हिस्सा लेने वाले और रिपब्लिकन हिंदू गठबंधन के हेड शलभ कुमार का मानना है कि ट्रंप के खिलाफ गलत कैंपेन चल रहा है और सूचनाएं अपने हिसाब से परोसी जा रही हैं। वह ट्रंप का बचाव कर रहे हैं। वह लोगों से ट्रंप के खिलाफ बन रहे माहौल को गलत बताते हैं। उन्होंने कहा था कि जैसी भारत तक खबरें पहुंच रही हैं, दरअसल हो ठीक इसका उलट रहा है।

शलभ के मुताबिक, ट्रंप सफल राजनेता से पहले सफल बिजनेसमैन हैं और कोई ऐसा कदम नहीं उठाएंगे, जिससे अमेरिकी हितों को धक्का पहुंचे। उन्होंने कहा था कि यह बहुत हैरान करने वाली बात है कि अब तक पूरे विश्व को आईएसआईएस और आतंकवाद के खिलाफ जंग लड़ने की अपील करने वाला वही बड़ा तबका ट्रंप के एक उचित कदम के बाद बदल क्यों गया? क्योंकि ट्रंप उनके कैंप के नहीं हैं? ट्रंप ने कोई बमबारी नहीं कराई, कोई युद्ध नहीं किया, फिर इस तरह की बातें क्यों? शलभ के अनुसार, दरअसल पूर्वाग्रह तर्क और तथ्य पर भारी पड़ रहे हैं। उन्होंने वीजा से जुड़ी खबरों का हवाला देते हुए कहा कि बिना किसी आदेश के पूरे विश्व में विरोध हो गया, जबकि अभी तक उस दिशा में कोई पहल भी नहीं हुई है। उन्होंने दावा किया कि जैसा कहा जा रहा है वैसा नहीं होगा और उनकी वीजा पॉलिसी से भारत जैसे देश या यहां के प्रोफेशनल्स को कोई असर नहीं पड़ेगा।

वहीं भारत का पाकिस्तान और चीन के साथ संबंधों को लेकर अमेरिका की भूमिका के बारे में भी शलभ कुमार ने अमेरिका के नव निर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलकर आने के बाद कहा था कि ट्रंप भारत और पाकिस्तान के बीच ‘गहरी दोस्ती’ को बढ़ावा देंगे। रिपब्लिकन हिंदू कोएलिशन (आरएचसी) के संस्थापक और अध्यक्ष शलभ कुमार ने ट्रंप टॉवर्स में ट्रंप, नव निर्वाचित उपराष्ट्रपति माइक पेंस, ट्रंप की बेटी इवांका, बेटों डॉन और एरिक और आगामी ट्रंप प्रशासन के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से मुलाकात की थी। ट्रंप के लिए हिंदुओं को एकजुट करने में प्रमुख भूमिका निभा चुके और सत्तांतरण वित्त एवं उद्घाटन समिति के लिए नियुक्त किए गए कुमार ने कहा था कि ट्रंप के प्रशासन को ‘भारत के साथ एक अच्छा संबंध रखने का इंतजार है।’ कुमार ने कहा था कि बैठक के दौरान उन्होंने अमेरिका और भारत के बीच व्यापार बढ़ाने के तरीकों के बारे में चर्चा की। कुमार ने कहा था कि ‘हमने चीन और पाकिस्तान के बारे में नीतियों पर और इनके प्रति भारत के रुख पर भी चर्चा की।’

कुमार ने कहा था कि ट्रंप ‘अच्छी तरह जानते हैं’ कि आतंकवाद भारत के लिए एक बड़ी चिंता का विषय है और ‘वह इस बात को लेकर भी आश्वस्त हैं कि वह पाकिस्तान को सही चीजें करने के लिए राजी कर सकते हैं और असल में भारत और पाकिस्तान के बीच मैत्री स्थापित कर सकते हैं।’

 


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