अयोध्या: जमीन लौटाने की केंद्र की अर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका

2019 चुनाव से पहले जहां अयोध्या को लेकर रोज नई हलचल हो रही है। चूंकि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने गैर-विवादित जमीन वापस लौटाने के लिए अर्जी दी थी। अब इस अर्जी के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका डाली गई है। याचिकाकर्ता ने लैंड ऐक्विजिशन ऐक्ट की वैधता पर सवाल उठाया। केंद्र सरकार के कदम को कोर्ट में चुनौती दी गई है।

Avatar Written by: February 4, 2019 4:51 pm

नई दिल्ली। 2019 चुनाव से पहले जहां अयोध्या को लेकर रोज नई हलचल हो रही है। चूंकि पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने गैर-विवादित जमीन वापस लौटाने के लिए अर्जी दी थी। अब इस अर्जी के विरोध में सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका डाली गई है। याचिकाकर्ता ने लैंड ऐक्विजिशन ऐक्ट की वैधता पर सवाल उठाया। केंद्र सरकार के कदम को कोर्ट में चुनौती दी गई है।

बता दें कि सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता का कहना है कि राज्य सूची के विषयों की आड़ में केंद्र सरकार राज्य की भूमि अधिग्रहित नहीं कर सकती। पिछले सप्ताह ही केंद्र सरकार ने 67 एकड़ गैर-विवादित जमीन मूल मालिकों को लौटाने के लिए अर्जी दी थी। सरकार के इस कदम का जहां राम जन्मभूमि न्यास ने स्वागत किया था, वहीं कुछ अन्य संगठनों ने इसका विरोध किया।

Ayodhya railway station

चूंकि अमित शाह ने रविवार को ही एक कार्यक्रम में सभी दलों से इस पर सहयोग की मांग की थी। केंद्र ने कोर्ट में गैर-विवादित जमीन लौटाने की अर्जी में कहा कि वह गैर-विवादित 67 एकड़ जमीन इसके मालिक राम जन्मभूमि न्यास को लौटाना चाहती है। इस जमीन का अधिग्रहण 1993 में कांग्रेस की तत्कालीन नरसिम्हा राव सरकार ने किया था।

1993 में केंद्र सरकार ने अयोध्या अधिग्रहण एक्ट के तहत विवादित स्थल और आसपास की जमीन का अधिग्रहण कर लिया था और पहले से जमीन विवाद को लेकर दाखिल तमाम याचिकाओं को खत्म कर दिया था। सरकार के इस ऐक्ट को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी। तब सुप्रीम कोर्ट ने इस्माइल फारुखी जजमेंट में 1994 में तमाम दावेदारी वाले सूट (अर्जी) को बहाल कर दिया था और जमीन केंद्र सरकार के पास ही रखने को कहा था और निर्देश दिया था कि जिसके फेवर में अदालत का फैसला आता है, जमीन उसे दी जाएगी।