सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई आज, अयोध्या विवाद में मध्यस्थता के मुद्दे पर होगा फैसला

पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर 1 फीसदी भी समझौता और मध्यस्थता का मौका है तो प्रयास होना चाहिए। बता दें, जस्टिस बोबडे ने कहा था कि मेडिएशन की प्रकिया गोपनीय रहेगी और ये भूमि विवाद की सुनवाई के साथ साथ चलेगी।

Written by: March 6, 2019 8:46 am

नई दिल्ली। अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले को मध्यस्थता के लिए भेजे जाने पर सुप्रीम कोर्ट आज कोई फैसला ले सकता है। दरअसल, पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अगर 1 फीसदी भी समझौता और मध्यस्थता का मौका है तो प्रयास होना चाहिए। बता दें, जस्टिस बोबडे ने कहा था कि मेडिएशन की प्रकिया गोपनीय रहेगी और ये भूमि विवाद की सुनवाई के साथ साथ चलेगी।

वहीं मुस्लिम पक्षकारों के वकील राजीव धवन ने कहा था कि अगर अदालत चाहती है तो वह प्रयास कर सकते हैं। वह इसका विरोध नहीं करेंगे। वहीं, रामलला विराजमान के वकील सीएस वैद्यनाथन ने कहा कि पहले भी मध्यस्थता का प्रयास हुआ था, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। अन्य हिंदू पक्षकार के वकील रंजीत कुमार ने भी कहा था कि अब मध्यस्थता संभव नहीं है। ऐसे में आगे सुनवाई होनी चाहिए।

ram mandirवैद्यनाथन के मध्यस्थता की गुंजाइश नहीं होने की बात पर कोर्ट ने कहा था कि हम आपकी मर्जी के बिना कुछ नहीं करेंगे। अगली सुनवाई में दोनों पक्षकार बताएं कि क्या कोई रास्ता निकल सकता है। बहरहाल, आज देखना होगा कि पीठ इस पर क्या निर्णय लेती है।

पिछले साल सुप्रीम कोर्ट से मुस्लिम पक्षों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था। कोर्ट ने 1994 के इस्माइल फारुकी के फैसले में पुनर्विचारके लिए मामले को संविधान पीठभेजने से इंकार कर दिया था। मुस्लिम पक्षों ने नमाज के लिए मस्जिद को इस्लाम का जरूरी हिस्सा न बताने वाले इस्माइल फारुकी के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की थी।

गौरतलब है कि राम मंदिर के लिए होने वाले आंदोलन के दौरान 6 दिसंबर  1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इसमामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दीवानी मुकदमा भी चला था। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है।