2019 के लोकसभा चुनाव में बसपा-सपा के गठजोड़ की राह नहीं होगी आसान

Written by: March 14, 2018 9:22 pm

नई दिल्ली। समाजवार्टी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने तात्कालिक गठाजोड़ के जरिए गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनावों में भले ही जीत दर्ज कर ली हो लेकिन 2019 लोकसभा चुनावों में भी यह प्रयोग जारी रहेगा इसकी संभावना अभी कम ही है।इसकी सीधी वजह यही है कि बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ लोकसभा सीटों को लेकर सौदेबाजी सपा के लिए आसान नहीं रहेगी। उपचुनाव में तो बसपा के उम्मीदवार को राज्यसभा पहुंचाने की विवशता ने मायावती को सपा को समर्थन देने की राह पर चलने को मजबूर किया।उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा भी कि सपा और बसपा के बीच राजनीतिक सौदेबाजी हुई है। दरअसल योगी राज्यसभा चुनावों को लेकर मायावती की सियासत की तरफ ही इशारा कर रहे थे।

Yogi Adityanath, CM, UPसपा अध्यक्ष अखिलेश यादव को इस बात का अंदाजा है कि मायावती की पार्टी के साथ लंबी दूरी तक गठबंधन चला पाना इतना आसान नहीं है। यही वजह है कि यादव ने आज पत्रकारों के सवालों के जवाब में बसपा के साथ चुनावी गठबंधन पर अपने पत्ते नहीं खोले।
सवाल यह हुआ था कि क्या अगले साल लोकसभा चुनावों में भी सपा और बसपा इसी तरह गठजोड करके चुनाव लडेंगी तो अखिलेश का जवाब था कि अभी लोकसभा चुनाव दूर हैं और आज हम सिर्फ दो लोकसभा सीटों पर उपचुनाव में जीत का जश्न मना रहे हैं। अखिलेश तो इस सवाल को टाल गए लेकिन यह संकेत जरूर कर गए कि बसपा के साथ गठजोड की लंबी पारी खेलने की दिक्कत उन्हें अच्छी तरह मालूम है।लोकसभा चुनावों से पहले दोनों क्षेत्रीय दलों के बीच गठबंधन को लेकर कई शर्तें आएंगी जिनमें से कुछ इस सियासी राह में बाधा पैदा करेंगी। जैसे मायावती के स्वभाव में अधिक से अधिक सीटें मांगना रहा है। पहले के भी जितने गठजोड़ मायावती ने किए हैं उनमें सीटों की मांग बेहद रही है।

ऐसे में सपा के साथ भी उनकी यही मांग होगी जिसे पूरा कर पाना अखिलेश के लिए उतना आसान नहीं रहेगा। इसके अलावा और भी बहुत सी कठिन शर्तें रखने से मायावती नहीं चूकेंगी। यही वजह है कि अभी सपा और बसपा गठबंधन के लोकसभा चुनाव तक वजूद में रह पाने को लेकर अनुमान लगा पाना आसान नहीं है।