CBI के दो बड़े अधिकारी बिल्लियों की तरह लड़ रहे थे, इसलिए दखल जरूरी थी: केंद्र सरकार

Written by Newsroom Staff December 5, 2018 10:50 am

नई दिल्ली। केंद्र ने सीबीआई के दो टॉप अधिकारियों आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना के बीच छिड़ी जंग में हस्तक्षेप करने की कार्रवाई को आवश्यक बताया है। मोदी सरकार की तरफ से कहा गया कि इनके झगड़े की वजह से देश की प्रतिष्ठित जांच एजेन्सी की स्थिति बेहद हास्यास्पद हो गई थी। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति केएम जोसफ की पीठ के सामने केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने अपनी बहस जारी रखते हुए कहा कि इन अधिकारियों के झगड़े से जांच एजेन्सी की छवि और प्रतिष्ठा प्रभावित हो रही थी।अ्टॉर्नी जनरल ने कहा कि केन्द्र का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि जनता में इस प्रतिष्ठित संस्थान के प्रति भरोसा बना रहे। वेणुगोपाल ने कहा, कि जांच ब्यूरो के निदेशक और विशेष निदेशक के बीच विवाद इस प्रतिष्ठित संस्थान की निष्ठा और सम्मान को ठेस पहुंचा रहा था। दोनों अधिकारी, आलोक कुमार वर्मा और राकेश अस्थाना एक दूसरे से लड़ रहे थे और इससे जांच ब्यूरो की स्थिति हास्यास्पद हो रही थी।Justice Ranjan Gogoiअटॉर्नी जनरल ने कहा कि इन दोनों अधिकारियों के बीच चल रही लड़ाई से सरकार अचम्भित थी कि ये क्या हो रहा है, वे बिल्लियों की तरह एक दूसरे से लड़ रहे थे। वेणुगोपाल ने कहा कि दोनों के बीच चल रही इस लड़ाई ने अभूतपूर्व और असाधारण स्थिति पैदा कर दी थी। ऐसी स्थिति में सरकार के लिये इसमें हस्तक्षेप करना बेहद जरूरी हो गया था।CBI

कोर्ट ने 29 नवंबर को कहा था कि वो पहले इस सवाल पर विचार करेगा कि क्या सरकार को किसी भी परिस्थिति में जांच ब्यूरो के निदेशक को उसके अधिकारों से वंचित करने का अधिकार है या उसे निदेशक के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों में कोई कार्रवाई करने से पहले प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति के पास जाना चाहिए था।Alok Verma and Rakesh Asthana

बता दें कि आलोक वर्मा का दो साल का कार्यकाल 31 जनवरी, 2019 को समाप्त हो रहा है।