VHP की धर्मसभा में भैय्याजी बोले- हमलावरों के निशान मिटे, कोर्ट भावनाओं का करे सम्मान

Avatar Written by: December 9, 2018 2:39 pm

नई दिल्ली। संसद के शीतकालीन सत्र शुरू होने के ठीक दो दिन पहले राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने की मांग को लेकर विश्व हिंदू परिषद रविवार को दिल्ली के रामलीला मैदान में धर्मसभा कर रही है। इस मंच पर वीएचपी के बड़े पदाधिकारियों के साथ कई संत मौजूद हैं। धर्मसभा को साध्वी ऋतंभरा, महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि, जगतगुरु हंसदेवाचार्य महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी ज्ञानानंद महाराज, आरएसएस के सुरेश (भैय्याजी) जोशी, आलोक कुमार और बीएस कोकजे संबोधित कर रहे हैं।

दिल्ली में वीएचपी की धर्मसभा में RSS के सरकार्यवाहक भैय्याजी जोशी ने कहा, ‘हम चाहते हैं, जो भी हो शांति से हो। संघर्ष करना होता तो इंतजार नहीं करते, इसलिए सभी लोग इसमें सकारात्मक पहल करें। हमारा किसी के साथ संघर्ष नहीं, राम राज्य में ही शांति आती है। भैय्या जी जोशी ने कहा, ‘न्यायालय की प्रतिष्ठा बनी रहनी चाहिए, जिस देश में न्यायालय में विश्वास घटता है, उसका उत्थान होना असंभव है। इसलिए न्यायालय को भावनाओं का सम्मान करना चाहिए। देश पर हमला करने वालों के निशान मिटने चाहिए।

VHP के उपाध्यक्ष चंपतराय क्या बोले?

धर्मसभा को संबोधित करते हुए VHP के उपाध्यक्ष चंपतराय ने कहा, ‘अगर इंडिया गेट से जॉर्ज पंचम हटाए जा सकते हैं, विक्टोरिया गायब हो सकती है, इरविन हॉस्पिटल, विलिंगटन हॉस्पिटल, औरंगजेब रोड के नाम बदले जा सकते हैं, सोमनाथ पुननिर्माण का संकल्प भारत की राजसत्ता 1950 में कर सकती है, तो आज की राजसत्ता भी संकल्प करे। हिंदुस्तान की तरुणाई इस राजसत्ता को बल प्रदान करने के लिए यहां आई है। आगे बढ़ो, कानून बनाओ, अयोध्या हिंदुओं का तीर्थ है, मोक्ष नगरी है, ये हिंदुओं का ही तीर्थ रहेगा, किसी आक्रमणकारी का कोई प्रतीक नहीं चाहिए।

चंपतराय ने कहा कि उत्तर प्रदेश हाईकोर्ट ने भगवान राम के जन्मस्थान के 3 टुकड़े कर दिए। हमें तीन टुकड़े नहीं, पूरा स्थान चाहिए। हम एक इंच जमीन नहीं देंगे। हमें ऐसा कानून चाहिए, जिसमें भगवान राम की जन्मभूमि और लीला भूमि हिंदूओं को प्राप्त हो। हमें बंटवारा स्वीकार नहीं है।चंपतराय ने कहा, ‘मंदिर वही नेतृत्व बनाएगा. उन्हीं संतों की टोली के नेतृत्व में बनेगा, जिन्होंने भगवान राम की जन्मभूमि की लड़ाई को हिंदुस्तान के 6 लाख गांवों तक पहुंचाया है, जो पिछले 32 वर्षों से रात-दिन परिश्रम करते आ रहे हैं। हमें कोई दूसरा नेतृत्व स्वीकार नहीं है। मंदिर का मॉडल देश के करोड़ों घरों में है, उसी फोटो का, उसी मॉडल का, उसी स्थान पर और उन्हीं पत्थरों से बनेगा, जो अयोध्या की कार्यशाला में तैयार हो रहे हैं।Ramleela Maidanउन्होंने कहा कि साल 1528 में हिंदुस्तान के सम्मान को जो चोट पहुंची थी. अब वो हमें स्वीकार नहीं है. हम अपने कलंक को धोना चाहते हैं। लोगों को बहुत भ्रांतियां हैं कि ये सिर्फ टाइटल की लड़ाई है. कोई टाइटल की लड़ाई नहीं है। लड़ाई केवल एक बात की है कि जहां हिंदू कहता है, वहां कभी मंदिर था या नहीं था? अगर था तो यह स्थान भगवान राम का और हिंदुओं का है। ये स्थान हिंदुओं का हो चुका है, अब कोई ये विचार न करे कि कोई कानून बनाकर भगवान राम को हटा सकता है।

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शीतकालीन सत्र में विधेयक लाने का दबाव

वीएचपी के महासचिव सुरेंद्र जैन का दावा है कि इस धर्मसभा से उन लोगों का हृदय परिवर्तन होगा, जो मानते हैं कि संसद के शीतकालीन सत्र में राम मंदिर पर विधेयक लाना संभव नहीं है। सुरेंद्र जैन का कहना है कि अगर किसी वजह से शीतकालीन सत्र में राम मंदिर को लेकर विधेयक नहीं आता है, तो प्रयाग में होने वाले महाकुंभ में होने वाली आगामी धर्म संसद में भविष्य की रणनीति तय होगी।

निर्मोही और निर्वाणी अखाड़ा ने किया किनारा

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हो रही धर्मसभा से निर्मोही अखाड़ा और निर्वाणी अखाड़ा ने किनारा किया है. 25 नवंबर को अयोध्या में हुई धर्मसभा में भी निर्मोही अखाड़ा शामिल नहीं हुआ था। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर राम जन्मभूमि को तीन हिस्सों में बांटा गया है, जिसमें एक हिस्सा निर्मोही अखाड़े को दिया गया है।

वहीं, निर्वाणी अखाड़ा परिषद भी इस धर्मसभा में शामिल नहीं हो रही है। निर्वाणी अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत धर्मदास ने कुछ दिन पहले राम मंदिर को लेकर आत्मदाह की चेतावनी दी थी, जिसे लेकर अयोध्या प्रशासन ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

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