मिशन 2019: आरएसएस को जवाब देगा कांग्रेस का सेवादल, काशी को लेकर बनाया ये प्लान

Avatar Written by: September 21, 2018 8:39 am

नई दिल्ली। आरएसएस के तीन दिवसीय कार्यक्रम में संघ प्रमुख मोहन भागवत ने खुद ही बता दिया कि आरएसएस एक सांस्कृतिक संगठन तो है ही, साथ ही राजनीतिक संगठन भी है। कार्यक्रम के आखिरी दिन भागवत से तमाम राजनीतिक सवाल पूछे गए जिसका जवाब उन्होंने भी राजनीतिक तरीके से ही दिया।Mohan Bhagwat, rss chiefतो वहीं आरएसएस के बदलते रुख से भी कांग्रेस की बैचेनी बढ़ गई है। जिससे निपटने के लिए कांग्रेस ने फौजी अनुशासन और जज्बे की पहचान रखने वाले सेवादल के विस्तार की योजना बनाई है। बता दें कि सेवादल की स्थापना एक महाराष्ट्री ब्राह्मण डॉ. नारायण सुब्बाराव हार्डिकर ने 1923 में हिंदुस्तान सेवादल के तौर पर की थी।

सेवादल की स्थापना के ठीक दो साल बाद ही 1925 में एक और महाराष्ट्री ब्राह्मण डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने आरएसएस की स्थापना की। कम लोगों को पता होगा कि हेडगेवार और हार्डिकर एक दूसरे के सहपाठी थें और शुरुआती दिनों में साथ-साथ एक्टिव थे, लेकिन हार्डिकर पर महात्मा गांधी का प्रभाव था तो हेडगेवार ‘हिंदू राष्ट्र’ की संकल्पना लेकर आगे बढ़ें।

जानकारी के लिए बता दें कि भाजपा की ही तरह कांग्रेस का भी एक मातृ संगठन है सेवादल अनुषांगिक। कभी कांग्रेस में शामिल होने से पहले सेवादल की ट्रेनिंग जरूरी होती थी। इंदिरा गांधी ने राजीव गांधी की कांग्रेस में एंट्री सेवादल के माध्यम से ही कराई थी। लेकिन हर बार सत्ता मिलते ही इस संगठन को भूल जाना कांग्रेस की शैली बन गई। कांग्रेस जब-जब परेशानी में रही, सेवादल के सिपाही आगे आते रहे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद जब कांग्रेस के लिए पंजाब में काम करना मुश्किल था, तब सेवादल ने हिंसा के बीच रहकर संगठन का काम किया।

जानकारी के मुताबिक, कांग्रेस की तरफ से सेवादल के व्यापक विस्तार को हरी झंडी मिल गई है। सेवादल के प्रमुख लालजी देसाई ने एक न्यूज चैनल को बताया कि आने वाले दिसंबर में सेवादल की स्थापना के दिन देश में 5000 महत्वपूर्ण जगहों पर ध्वजा रोहण के साथ सेवादल संघ के खिलाफ अपना अभियान शुरू करेगा. देसाई कहते हैं कि हम संघ के डंडे का जवाब झंडे से देंगे।

वाराणसी को लेकर बनाया खास प्लान-

बीते 9 अगस्त को ‘अगस्त क्रांति दिवस’ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में तिरंगा यात्रा निकली थी. जिसमें काशी और प्रदेश के नेतृत्व के साथ सेवादल के राष्ट्रीय नेतृत्व तौर पर लालजी देसाई भी शामिल थे। सेवादल के मुख्य संगठक लालजी देसाई का कहना है कि 1936 में जब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ महज 11 साल का था और हिंदू राष्ट्रवाद का ककहरा पढ़ रहा था, उस समय सेवादल और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने काशी में भारत माता के विशाल मंदिर निर्माण कराया। जिसका लोकार्पण स्वयं महात्मा गांधी ने किया।

लालजी देसाई कहते हैं कि इसबार संघ और बीजेपी को हिंदू-मुसलमान, श्मशान-कब्रिस्तान और दिवाली-रमजान नहीं करने देंगे। हम डोर टू डोर कैंपेन करेंगे और जब-जब वे जनता को भटकाने की कोशिश करेंगे सेवादल उन्हें मुद्दे पर लाने का काम करेगा। देसाई कहते हैं सेवादल बूथ स्तर तक कांग्रेस के साथ तालमेल बैठाते हुए सहयोग करेगा।