डोकलाम पर भारत से चीन हुआ पस्त तो पाक जैसे पड़ोसियों की भी खुल गईं आंखें

Avatar Written by: August 29, 2017 3:16 pm

नई दिल्ली। डोकलाम से चीन ने पैर वापस खींचने में ही भलाई समझी। इसे भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। आखिरकार भारत ने बड़े ही संयम और धैर्य के साथ चीन को उलटे पैर वापस जाने के लिए विवश कर दिया।

डोकलाम पर आंखें तरेरता आ रहा चीन कैसे पीछे हटा यह पूरी दुनिया ने देखा। डोकलाम विवाद में बढ़त हासिल करने की कोशिश के जरिए चीन अमेरिका समेत दुनिया को अपनी ताकत का संदेश देना चाहता था। लेकिन हुआ ठीक उलटा।

भारत के रुख की पूरी दुनिया में तारीफ हो रही है कि किस तरह से उसने चीन के साथ इस विवाद को बड़े ही समझदारी से निपटाया। चीन को पीछे हटना पड़ा और दुनिया में संदेश भारत की काबिलियत को लेकर गया। ऐसा हुआ भी ठीक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन यात्रा से ठीक पहले। पीएम मोदी ब्रिक्स की बैठक में भाग लेने सितंबर में चीन जा रहे हैं।

पीएम चाहते थे कि उनके चीन दौरे से पहले डोकलाम ऐसे निपटे कि भारत की ही कूटनीतिक बढ़त दिखाई पड़े। विदेश सचिव समेत दूसरे बड़े राज​नयिकों को इस मुहिम में लगा दिया गया था।

मोदी सरकार की इस कूटनीतिक जीत से सबसे बड़ा झटका चीन की उस मुहिम को लगा है जो वह भारत को चौतरफा घेरने को लेकर चलाता रहता है।

नेपाल, पाकिस्तान, श्रीलंका आदि देशों को अपने हक में करके चीन की कोशिश भारत को चारों ओर से घेरकर परेशान करने की होती है। लेकिन डोकलाम विवाद को लेकर चीन जिस तरह से अपनी ही चाल में फंसा है उससे उसकी इस मुहिम को करारा झटका लगा है।

अब भारत के पड़ोसी देशों को अपने पाले में करके अपनी साजिश करने से वह बाज आ सकता है। वहीं भारत ने डोकलाम विवाद पर अपने पड़ोसियों को भी संदेश दे दिया है। भारत ने अपनी कूटनीतिक परिपक्वता का संदेश दिया है और पाकिस्तान समेत सारे पड़ोसियों को बता दिया है कि किसी भी प्रकार का टकराव निपटाने में वह कितना सक्षम है।

सभी पड़ोसी मुल्कों ने देखा है कि किस तरह भारत के डोकलाम पर रुख को अमेरिका और जापान अमेरिका के ताकतवार मुल्कों ने जमकर सराहा है। ऐसे में भारत में समस्या पैदा करने की कोशिश से कोई भी मुल्क विश्व मंच पर अलग थलग पड़ जाएगा।

चीन के समर्थन से कूदने वाले पाकिस्तान को भी ठीक संदेश मिल गया है। उसने अपने ‘आॅल वेदर फ्रेंड’ चीन को डोकलाम पर हैसियत में आते देखा है।

ऐसे में पाकिस्तान को भी यह समझ में आ गया होगा कि चीन के भरोसे भारत से पंगा लेना महंगा साबित हो सकता है। वहीं नेपाल ने तो पहले ही कह दिया है कि भारत के विरोध में किसी भी गतिविधि को वह अपनी सरजमीं से नहीं होना देगा।