एशिया में भारत की बढ़ेगी ताकत, चीन-पाक की खैर नहीं, मिलने जा रही हैं S-400 मिसाइलें

Written by Newsroom Staff October 2, 2018 2:27 pm

नई दिल्ली। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन चार अक्टूबर को दो दिवसीय दौरे पर भारत आ रहे हैं। जिसमें वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ सालाना भारत-रूस शिखर सम्मेलन में शिरकत करेंगे। कहा जा रहा है कि इस दौरान रूस के साथ एस-400 मिसाइल सौदे पर अंतिम मुहर लग सकती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों ने 40,000 करोड़ रुपये के सौदे को लेकर बातचीत करीब-करीब पूरी कर ली है। चूंकि रूस हमेशा से ही भारत को हथियार और गोला बारूद देने वाला प्रमुख आपूर्तिकर्ता रहा है, लेकिन एस-400 मिसाइल बिल्कुल अलग और अत्याधुनिक है। डील के तहत भारत रूस से पांच ‘S-400 एंटी मिसाइल डिफेंस सिस्टम’ खरीदेगा।

s400 missile2S-400 रूस की नई वायु रक्षा मिसाइल प्रणाली का हिस्सा है, जो 2007 में रूसी सेना में तैनात की गई थी। भारत और रूस के बीच S-400 एयर डिफेंस मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए 39 हजार करोड़ रुपए का का करार होगा। S-400 के पास अमेरिका के सबसे एडवांस्ड फाइटर जेट एफ-35 को गिराने की भी कैपिसिटी है। चीन ने भी रूस से ही यह डिफेंस सिस्टम खरीदा था। हालांकि अभी चीन की आर्मी इसका इस्तेमाल कर रही है।

S 400

S-400 ट्रायंफ लॉन्ग-रेंज एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम में दुश्मन के आने वाले लड़ाकू विमानों, मिसाइलों और यहां तक कि 400 किलोमीटर तक की ऊंचाई पर उड़ रहे ड्रोन को नष्ट कर सकता है। भारत की सैन्य प्रणाली में एस-400 के शामिल होने से उसकी ताकत कई गुना बढ़ जाएगी।

s400 missile1

जानकारी के लिए बता दें कि भारत और रूस के बीच इस अहम रक्षा सौदे का ऐलान साल 2016 में गोवा में आयोजित ब्रिक्स समिट के इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत के बाद हुआ था। S-400 भारत को पाकिस्तान और चीन की न्यूक्लियर पावर्ड बैलिस्टिक मिसाइलों से भी पूरी तरह सुरक्षित रखेगा।