पीएम मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री देखना चाहते हैं ये दिग्गज उद्योगपति… बताए कारण

Avatar Written by: November 15, 2018 7:20 pm

नई दिल्ली। पीएम मोदी की भारतीय कारोबारियों से करीबियां जगजाहिर हैं। जिसका उन्होंने हाल ही में खुलकर समर्थन भी किया था। पीएम ने लखनऊ के एक कार्यक्रम में कहा था कि विपक्षी नेताओं के छिपे हुए रिश्तों के उलट उनका कारोबारियों से खुला और पारदर्शी रिश्ता है। वो कई मौकों पर कारोबारियों से खुलकर मिलते और बात भी करते हैं। हालांकि अंबानी परिवार को पीएम मोदी का चहेता बताया जाता है। पर पीएम की तारीफों के पुल बांधने वालों में रतन टाटा, बिरला से लेकर देश के कई जाने-माने बड़े प्रतिष्ठित घराने भी हैं, जो पीएम मोदी की नीतियों से संतुष्ट और खुश नजर आते हैं।

देश की आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी इंफोसिस के संस्थापक एनआर नारायण मूर्ति ने अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उनके अनुशासन और जीएसटी समेत अहम नीतिगत फैसलों को लेकर जमकर तारीफ की है। इसके साथ ही उन्होंने पीएम मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन किया है। मूर्ति ने कहा कि वर्तमान सरकार की निरंतरता भारत के लिए अच्छी होगी, इससे इकोनॉमी को रफ्तार मिलेगी। भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने में भी मोदी सरकार कामयाब रही है। हमें आभारी होना चाहिए कि कम से कम पीएम मोदी एक ऐसे राष्ट्रीय नेता हैं, जो भारत में सुधार करने में रूचि रखते हैं।

नारायण मूर्ति ने की पीएम मोदी की तारीफ

एक अंग्रेजी चैनल से बातचीत में नारायण मूर्ति ने कहा कि पिछले 5 साल का कार्यकाल देखें तो मुझे लगता है कि देश में एक ऐसे नेता हैं जिनका फोकस अनुशासन, स्वच्छता और आर्थिक प्रगति पर केंद्रित है, जो कि एक अच्छी बात है। सरकार की निरंतरता देश के लिए अच्छी बात होगी। मूर्ति ने मोदी सरकार के दौरान इकोनॉमी के लिए किए गए रिफॉर्म्स की भी जमकर तारीफ की। मूर्ति ने कहा कि GST से देश की इकोनॉमी को तेजी मिली है।

 

मोदी को दोबारा प्रधानमंत्री बनाने का समर्थन

इंफोसिस संस्थापक नारायण मूर्ति ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी एक मजबूत आर्थिक प्रगति वाली सरकार का नेतृत्व कर रहे हैं। जीएसटी या इन्सॉल्वेंसी बैंकरप्सी कोड लागू करने के तरीकों पर मूर्ति ने कहा कि कुछ मामलों में कुछ खामियां नजर आई हैं, लेकिन हर चीज के लिए प्रधानमंत्री को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, ये नौकरशाही का काम है। ये पीएम मोदी का काम नहीं है कि वो हर गांव में जाएं और इसे साफ रखें। ये समस्या भारतीय मानसिकता के साथ है, हम उदासीन और गैर-अनुशासित हैं। हमें आर्थिक परिवर्तन पाने से पहले सांस्कृतिक परिवर्तन की तत्काल आवश्यकता है।