जस्टिस रंजन गोगोई होंगे सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश, इस दिन लेंगे शपथ

Avatar Written by: September 2, 2018 8:43 am

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के अगले मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रंजन गोगोई होंगे। वर्तमान सीजेआई दीपक मिश्रा उनके नाम की सिफारिश कर दी है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस दीपक मिश्रा दो अक्टूबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं और इससे पहले उन्होंने कानून मंत्रालय के प्रोटोकॉल के तहत अपने उत्तराधिकारी के नाम की सिफारिश की। आपको बता दें,  नियम के मुताबिक सबसे वरिष्ठ जज मुख्य न्यायाधीश होते हैं इस हिसाब से जस्टिस गोगोई ही वर्तमान सीजेआई के बाद पहले नबंर पर हैं। 2011 में पंजाब और हरियाणा हाइकोर्ट के चीफ जस्टिस बनने वाले गोगोई अप्रैल 2012 में सुप्रीम कोर्ट आए। उनका कार्यकाल नवंबर 2019 तक का होगा।

मुख्य न्यायाधीश के रूप में जस्टिस रंजन गोगोई 3 अक्टूबर को शपथ लेंगे। उम्मीद की जा रही है कि अगले दो हफ्ते के भीतर सरकार के अनुरोध पर राष्ट्रपति सचिवालय जस्टिस गोगोई को अगले चीफ जस्टिस के लिए नामांकित कर देगा।

आपको बताते चलें की जस्टिस रंजन गोगोई असम से आते हैं और वह सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठतम जजों में शामिल हैं, और वरिष्ठता के आधार पर अक्टूबर, 2018 में वह देश की सबसे बड़ी अदालत में जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायर होने के बाद मुख्य न्यायाधीश बनने की कतार में हैं। ऐसा हुआ तो वह भारत के पूर्वोत्तर राज्य से इस शीर्ष पद पर काबिज होने वाले पहले जस्टिस होंगे। उन्होंने गुवाहाटी हाई कोर्ट से करियर की शुरुआत की। उनके पिता केशब चंद्र गोगोई असम के मुख्यमंत्री रहे हैं।

गौरतलब है कि जस्टिस रंजन गोगोई सुप्रीम कोर्ट के उन चार जजों में शामिल हैं जिन्होंने पहली बार मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ आरोप लगाए थे। सवाल उठाने वाले सुप्रीम कोर्ट के चार जजों में जस्टिस रंजन गोगोई के साथ जस्टिस चेलमेश्वर, जस्टिस मदन लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ शामिल थे।

चारों जजों ने न सिर्फ अनियमितता को लेकर लिखी चिट्ठी को सार्वजनिक कर दिया बल्कि चीफ जस्टिस पर नियमों की अनदेखी कर केस जजों या फिर खंडपीठ को सौंपने का आरोप लगाया। जिसमें कई केस काफी अहम हैं। चारों जजों ने कहा कि अगर न्याय व्यवस्था को दुरुस्त नहीं किया गया तो लोकतंत्र महफूज नहीं रहेगा। चारों जजों ने कहा कि उन्होंने अपनी बातें चीफ जस्टिस के सामने रखी। उन्हें चिट्ठी भी लिखी, लेकिन उन्होंने इस पर ध्यान नहीं दिया। इसके बाद उनके पास देश के सामने अपनी बात रखने के अलावा कोई चारा नहीं था।

 

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