कल पीएम मोदी करेंगे उद्घाटन, नाव से पहुंच सकेंगे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक… देखिए, वीडियो और शानदार तस्वीरें

Written by: October 30, 2018 8:00 am

नई दिल्ली। स्टैच्यू ऑफ यूनिटी यानि कि सरदार पटेल की 182 मीटर ऊंची मूर्ति, जो कि दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति है। इसके आगे ना तो 120 मीटर ऊंची चीन वाली स्प्रिंग बुद्ध मूर्ति टिकती है, ना ही 90 मीटर ऊंची न्यूयॉर्क की स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी। मूर्ति को बनाने में करीब 44 महीनों का वक्त लगा है। इस दौरान 4076 मजदूरों ने दो शिफ्टों में काम किया। जिसमें कि 800 स्थानीय और 200 चीन से आए कारीगरों ने तय समय में इसे अंजाम दिया। बुधवार को पीएम मोदी इसका उद्घाटन करेंगे, जिसके लिए सारी तैयारियां अंतिम चरण में हैं।

Statue of Unity

बड़ी संख्या में किया गया कबाड़ (लोहा) प्रयोग

लौह पुरुष की मूर्ति के निर्माण में लाखों टन लोहा और तांबा लगा है और कुछ लोहा लोगों से मांगकर लगाया है। इस मूर्ति को बनाने के लिए लोहा पूरे भारत के गांव में रहने वाले किसानों से खेती के काम में आने वाले पुराने और बेकार हो चुके औजारों का संग्रह करके जुटाया गया। इसके लिए एक ट्रस्ट भी बना “सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय एकता ट्रस्ट।

Statue of Unity

इस ट्रस्ट ने इस काम के लिए पूरे भारत में 36 ऑफिस भी खोले, जिससे लगभग 5 लाख किसानों से लोहा जुटाने का लक्ष्य रखा गया। इस अभियान का नाम ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी अभियान दिया गया। 3 महीने लंबे इस अभियान में लगभग 6 लाख ग्रामीणों ने मूर्ति स्थापना हेतु लोहा दान किया। कई रिपोर्ट्स में सामने आया है कि उस लौहे का इस्तेमाल प्रतिमा में उपयोग नहीं हो सका और इसे परियोजना से जुड़े अन्य निर्माणों में प्रयोग किया गया।Statue of Unity

बता दें कि यह कॉम्पोजिट प्रकार का स्ट्रक्चर है और सरदार पटेल की मूर्ति के ऊपर ब्रॉन्ज की क्लियरिंग है। यानी मूर्ति की स्किन ब्रॉन्ज की है। इस प्रोजेक्ट में एक लाख 70 हजार क्यूबिक मीटर कॉन्क्रीट लगा है। दो हजार मीट्रिक टन ब्रॉन्ज लगाया गया है। इसके अलावा 5700 मीट्रिक टन स्ट्रक्चरल स्टील और 18500 मीट्रिक टन रिइनफोर्समेंट बार्स भी इस्तेमाल किया गया है।

Statue of Unity

सरदार वल्लभ भाई पटेल की इस मूर्ति में 4 धातुओं का उपयोग किया गया है जिसमें बरसों तक जंग नहीं लगेगा। स्टैच्यू में 85 फीसदी तांबे का इस्तेमाल किया गया है।

इस कंपनी को मिला ठेका

मूर्ति के निर्माण के लिए केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद अक्टूबर 2014 मेंलार्सन एंड टूब्रो कंपनी को ठेका दिया गया था। माना जा रहा है कि इसके निर्माण में करीब 3000 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। आपको बता दें, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के ऊपर जाने के लिए लिफ्ट लगेगी, जिसके जरिये सरदार सरोवर का टॉप व्यू दिखेगा।

नाव से ही पहुंच सकेंगे स्टैच्यू ऑफ यूनिटी तक

दरअसल इस मूर्ति तक पहुंचने के लिए आपको नाव का सहारा लेना होगा और पानी के रास्ते इस तक पहुंचना होगा। ये मूर्ति सरदार वल्लभ सरोवर बांध के पास बनाई गई है। इस मूर्ति से इसका नजारा भी दिखता है।

लिफ्ट में 200 लोगों की क्षमता

यहां सामने की ओर नया ब्रिज आम आदमी के लिए है कि लोग अंदर आएं और पटेल के पैर तक सीढ़ियों से पहुंच सकेंगे। वहां एक लिफ्ट भी है, जिसके जरिए आप वहां पहुंच सकते हैं। इस लिफ्ट के स्थान पर आपको सरदार सरोवर बांध का नजारा दिखेगा और वादियां देखने को मिलेंगी।वहां पर दो लिफ्ट हैं, जिससे एक साथ दो सौ लोग पटेल के सीने तक पहुंच सकते हैं। यह एक गैलरी बनी हुई है, जहां तक हर कोई जा सकता है। वहां से सरदार सरोवर बांध तक का दृश्य दिखेगा।

यहां आस-पास तमाम फूलों की प्रजातियां उगाई गई हैं।

बता दें कि इसे फूलों की घाटी जैसा ही बनाया गया है। इन फोटो के जरिए आप इसकी खूबसूरती समझ सकते हैं।

पीएम मोदी ने भी ट्वीट कर इसकी महत्ता बताई।

Shastri Shree Madhavpriyadasji Swami’s message on the world’s tallest statue – #StatueOfUnit pic.twitter.com/2pSkON8yCQ

— CMO Gujarat (@CMOGuj) October 27, 2018

सीएमओ गुजरात के ट्वीटर हैंडल से कई बेहद रोचक जानकारियां शेयर कीं गई।

जगन्नाथ मंदिर के महंत ने भी अपने विचार साझा किए।

तारक मेहता का उल्टा चश्मा फेम एक्टर तन्मय वकारिया ने भी इस मूर्ति की जमकर तारीफ की।

देश के जाने-माने शिक्षाविद साईराम दवे ने भी इसकी विशेषता समझाई

संत पूज्य भारती बापू जी ने भी इस पर अपने विचार रखे

पद्मश्री भिखुनंदन गढ़वी ने भी स्टैच्यू ऑफ यूनिटी की जमकर तारीफ की

मशहूर लेखक गुणवंत शाह ने मूर्ति के जरिए बड़ा संदेश दिया

गुजरात के मुख्यमंत्री ने लौह पुरुष की इस विशाल प्रतिमा को लेकर कई अहम जानकारियां दीं।