राम मंदिर बनाने के लिए मोदी सरकार कर सकती है ये बड़ा काम… संघ दे चुका है इशारा

Avatar Written by: October 18, 2018 3:27 pm

नई दिल्ली। मोदी सरकार पर दिनों दिन राम मंदिर निर्माण का चौतरफा दबाव बनता जा रहा है। चूंकि सत्ता में आने के बड़े वायदों में एक वायदा राम मंदिर का भी था। मोदी सरकार पूर्ण बहुमत से सरकार बनाने के बाद अपना 5 वर्ष का कार्यकाल भी पूरा करने जा रही है। और सरकार को राम मंदिर मामले में कुछ खास हाथ नहीं लगा है, साथ ही 2019 चुनाव हैं और मोदी सरकार सत्ता में वापसी चाहती है, ऐसे में राम मंदिर को लेकर सरकार को बड़े कदम उठाने ही होंगे।सरकार पर दबाव है कि वो राम मंदिर के निर्माण के लिए सदन में क़ानून लाए और अयोध्या में रामजन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ करे। इस संभावना पर अंतिम मोहर लगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के विजयदशमी कार्यक्रम में मोहन भागवत के बयान से। उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए कानून बनाना चाहिए, अगर भागवत यह बात कह रहे हैं तो वो एक तरह से सीधे सरकार को इशारा कर रहे हैं कि संघ और भाजपा के समर्थकों और राम के प्रति आस्था रखने वालों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार को सदन में राम मंदिर के लिए क़ानून लाना चाहिए।तो वहीं दूसरी ओर संतों ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है कि मंदिर निर्माण में देरी वे बर्दाश्त नहीं करेंगे। संतों का कहना है कि क्या भाजपा मंदिर निर्माण का अपना वादा भूल गई है और क्यों सुप्रीम कोर्ट के फैसले के इंतज़ार का बयान पार्टी की ओर से बार-बार दिया जा रहा है। बता दें कि राम मंदिर आंदोलन से जुड़े महंतों ने इस साल 6 दिसंबर से अयोध्या में मंदिर निर्माण की घोषणा कर दी है। संत समाज का कहना है कि वो मंदिर निर्माण का काम शुरू कर देंगे, सरकार रोकना चाहती है तो रोककर दिखाए।

सरकार लाएगी विधेयक?

ऐसी स्थिति में सरकार के पास अब एक ही रास्ता बचता नज़र आ रहा है और वो यह है कि राम मंदिर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को स्थापित करने के लिए मोदी सरकार सदन के आगामी शीतकालीन सत्र में राम मंदिर के विधेयक को रखे। इससे भाजपा को लाभ भी है। पहला तो यह कि सरकार लोगों के बीच चुनाव से ठीक पहले यह स्थापित करने में सफल होगी कि उनकी मंशा राम मंदिर के प्रति क्या है, वो अपने मतदाताओं को बता सकेगी कि कम से कम भाजपा और मोदी अयोध्या में राममंदिर के निर्माण के प्रति प्रतिबद्ध हैं।

दूसरा लाभ यह है कि विपक्ष के लिए यह एक सहज स्थिति नहीं होगी। विपक्ष इसपर टूटेगा, कांग्रेस के लिए यह आसान नहीं होगा कि वो राम मंदिर पर प्रस्ताव का विरोध करके अपनी सॉफ्ट हिंदुत्व की पूरी कोशिशों को मिट्टी में मिला दे. इससे विपक्ष में बिखराव भी होगा और सपा बसपा जैसी पार्टियों के वोटबैंक में भी सेंध लगेगी।

चुनाव से ठीक पहले अपने मतदाताओं के बीच राम मंदिर के लिए विश्वास जताना सरकार के लिए ज़रूरी है, देखना यह है कि सरकार इस विश्वास को जताने के लिए किस सीमा तक जाती है।

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