OLD लाइफस्टाइल

लगातार शोर-शराबे के बीच रहने से कान को नुकसान पहुंचता है और इंसान की सुनने की क्षमता घटने लगती है। डब्ल्यूएचओ का आंकड़ा बताता है कि दुनिया में 12 से 35 वर्ष उम्र के एक अरब से ज्यादा युवा मनोरंजन के लिए शोर के उच्च स्तरों के बीच रहते हैं, जिससे उन्हें बाद में सुनने में दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर 65 वर्ष से अधिक उम्र के लगभग एक-तिहाई लोग सुनने में अक्षम होते हैं।

जो लोग शराब का सेवन करते हैं उनका हमेशा यही तर्क होता है कि हम कम पीते हैं। वैसे अभी तक जो रिसर्च हुई हैं, उनके अनुसार थोड़ी शराब पीने से सेहत पर नकारात्मक असर नहीं पड़ता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बोटोक्स उपचार उतना ही गलत इलाज है जितना कि यह प्रभावी है। चिकित्सकों ने बोटोक्स उपचार के मिथकों और तथ्यों के बारे में जानने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में हृदय रोग का पता देर से चल पाता है और हर साल दिल की बीमारियों से पीड़ित हर तीन में से एक महिला मरीज की मौत हो जाती है। हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया (एचसीएफआई) के अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा, "हृदय रोग महिलाओं में मृत्यु का एक प्रमुख कारण है।

अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस-2019 के मौके पर पीबडी ने महिलाओं के लिए भारत का पहला पेटेंट प्रोटेक्टेड यूरीनेशन डिवाइस-प्रेगआरएक्स और अद्वितीय अंतरंग और मासिक धर्म स्वच्छता उत्पाद-सिरोना की रेंज लांच करने की घोषणा की।

मद्रास हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से कहा है कि वो पता लगाएं कि विवाहेतर संबंध के लिए कहीं मेगा टीवी सीरियल्स या अन्य चीजें तो जिम्मेदार नहीं है। कोर्ट ने ऐसा इसलिए कहा क्योंकि पिछले कुछ समय में हत्या, हमले और अपहरण जैसी आपराधिक घटनाओं में तेजी आई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अब दुनिया भर में पीआरपी (प्लेटलेट्स रिच प्लाज्मा) की मदद से इन्फर्टिलिटी का इलाज संभव हो पाया है हालांकि इसका कहीं पर भी इस्टैबलिस्ड प्रोसीजर के तौर पर इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

आधुनिक वातावरण और जीवनशैली ने हर शहर को प्रदूषित कर दिया है। वायू प्रदूषण ने लोगों का जीना दुश्वार कर दिया है। घर के अंदर और बाहर वायु प्रदूषण एक मूक और अदृश्य हत्यारा बन गया है और यह प्रत्येक वर्ष 70 लाख लोगों की असामयिक मौत के लिए जिम्मेदार है, जिसमें छह लाख बच्चे शामिल हैं।

ऐसा कहा जाता है कि फ्री टाइम में अगर म्यूजिक सुना जाए तो व्यक्ति चिंतामुक्त हो जाता है। इस बात को फॉलो करते हुए हम लोग दिन में नजाने कितने घंटे ईयरफोन पर गाने सुनने में व्यतीत कर देते हैं।