ट्रेनों में मिलने वाले भोजन के पैकेट पर होगा बार कोड

भारतीय रेल द्वारा परिचालित ट्रेनों में मिलने वाले भोजन के पैकेट पर अब बार कोड होगा, जिससे रेलवे के अधिकारी और यात्री यह पता लगा पाएंगे कि भोजन किस किचेन में तैयार किया गया। इससे भोजन की गुणवत्ता को लेकर रेलयात्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों में कमी आएगी।

Avatar Written by: March 1, 2019 11:26 am

नई दिल्ली। भारतीय रेल द्वारा परिचालित ट्रेनों में मिलने वाले भोजन के पैकेट पर अब बार कोड होगा, जिससे रेलवे के अधिकारी और यात्री यह पता लगा पाएंगे कि भोजन किस किचेन में तैयार किया गया। इससे भोजन की गुणवत्ता को लेकर रेलयात्रियों द्वारा की जाने वाली शिकायतों में कमी आएगी।  रेलमंत्री पीयूष गोयल ने सोमवार को लोगों को ई-दृष्टि डैशबोर्ड समर्पित किया। इस मौके पर उन्होंने कहा, “ट्रेनों में आईआरसीटीसी द्वारा मुहैया करवाए जाने वाले पके हुए सभी प्रकार के खाद्य पदार्थो के पैकेट पर बार कोड होगा, जिसके साथ किचेन का नंबर और पैकिंग का समय दिया होगा।”

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गोयल ने कहा कि भोजन पर पैकिंग किए जाने वाले इंडियन कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉरपोरेशन (आईआरसीटीसी) के किचेन का नंबर के साथ-साथ यह भी दिया होगा कि पैकिंग कब किया गया। रेलवे सूचना प्रणाली केंद्र द्वारा बनाए गए नए डैशबोर्ड से डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट रेलदृष्टि डॉट क्रिस डॉट ओआरजी डॉट इन पर पहुंच बनाया जा सकता है। इसमें पूरे देश के आइआरसीटीसी के मुख्य किचेन की तस्वीरें भी लाइव दिखेंगी।

रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “आईआरसीटीसी के साथ सालाना बैठक के दौरान रेलमंत्री ने यात्रियों को मुहैया करवाए जाने वाले भोजन के पैकेट पर बार कोड लगाने का आइडिया दिया था।”उन्होंने कहा कि आईआरसीटीसी बार कोड के विकल्प पर काम कर रही है और इसकी कीमत व उपयोगिता की समीक्षा की जा रही है। अधिकारी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि बार कोड के साथ भोजन के पैकेट अप्रैल के अंत या मई तक मिलने लगेंगे।

आईआरसीटीसी के 32 आधारभूत किचेन हैं जहां से ट्रेनों में यात्रियों को भोजन मुहैया करवाया जाता है। भोजन की गुणवत्ता और वेंडरों द्वारा भोजन के अधिक पैसे लेने की शिकायतों को लेकर रेलवे की आलोचना होती रही है।

train 3ऑथेंटिकेशन सर्विस प्रोवाइडर्स एसोसिएशन के प्रेसिडेंट उमेश गुप्ता ने रेलवे के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा, “रेलवे अगर भोजन के पैकेट पर बारकोड के साथ होलोग्राम और पता लगाने की प्रणाली का जिक्र करे तो अच्छा होगा जिससे भोजन की पैकेजिंग के साथ छेड़छाड़ नहीं होगी।”