नोटबंदी के दो साल: देश के हुए ये बड़े फायदे

Written by Newsroom Staff November 8, 2018 3:00 pm

नई दिल्ली। देश की अर्थव्यवस्था के इतिहास में आठ नवंबर का दिन खास दिन के तौर पर दर्ज है। दो साल पहले आज ही के दिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रात आठ बजे दूरदर्शन के जरिए देश को संबोधित करते हुए 500 और 1000 के नोट बंद करने का ऐलान किया था।

नोटबंदी की यह घोषणा उसी दिन आधी रात से लागू हो गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कहना था की उन्होंने यह फैसला काले धन के खिलाफ लिया है लेकिन कुछ लोगो का कहना है की यह फैसला उत्तर प्रदेश चुनाव के लिए लिया गया था।  मोदी के इस फैसले के बाद लगभग 3 महीने तक लोगो को बैंक के बाहर कतार में खड़ा रहना पड़ा।

नोटबंदी के इन दो सालों में इसकी सफलता एवं असफलता को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं सामने आती रहीं और अभी भी यही हाल हैं। वहीं वित्त वर्ष 2016-17 की सालाना रिपोर्ट में आरबीआई ने बताया कि अवैध घोषित 15.44 लाख करोड़ रुपये में से 15.31 लाख करोड़ रुपये बैंकिंग सिस्टम में वापस आ गए। यानी, अवैध घोषित कुल 99.3% नोट बैंकों में जमा कर दिए गए जबकि 10,720 करोड़ रुपये मूल्य के महज 0.7% नोटों का ही कुछ पता नहीं चल पाया।

8 नवंबर, 2016 को जब नोटबंदी का ऐलान हुआ, उस वक्त 500 रुपये को 1,716.5 करोड़ नोट जबकि 1,000 रुपये के 685.8 करोड़ नोट सर्कुलेशन मे थे। दोनों का कुल मूल्य 15.44 लाख करोड़ रुपये थी। आरबीआई के मुताबिक, 1,000 रुपये के 8.9 करोड़ नोट यानी 1.3 प्रतिशत नोट बैंकिंग सिस्टम में नहीं लौटे।

सर्कुलेशन में नोट 

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वित्त वर्ष 2017-18 की ऐनुअल रिपोर्ट में आरबाई ने बताया कि मार्च 2018 के आखिर तक मूल्य के लिहाज से सर्कुलेशन में 37.7 प्रतिशत नोट बढ़कर 18.03 लाख करोड़ रुपये हो गए। संख्या के लिहाज से सर्कुलेशन में बढ़े नोटों का प्रतिशत 2.1 प्रतिशत रहा। इससे पता चलता है कि नोटबंदी के पीछे डिजिटाइजेशन एवं कम-नगदी वाली अर्थव्यवस्था (लेस कैश इकॉनमी) पर जोर दिए जाने के सरकार के उद्देश्य पूरे नहीं हुए।

छपाई एवं अन्य मदों पर खर्च बढ़ा 


आरबीआई ने नोटबंदी के बाद 500 रुपये और 2,000 रुपये को नए नोट छापने पर 7,965 करोड़ रुपये खर्च किए। पिछले वर्ष नोट छापने पर आधे से भी कम 3,421 करोड़ रुपये ही खर्च हुए थे। वित्त वर्ष 2017-18 में नोट छपाई पर 4,912 करोड़ रुपये खर्च हुए।

प्रिंटिंग और दूसरी लागत में वृद्धि का असर आरबीआई द्वारा सरकार को दिए जाने लाभांश पर पड़ा। केंद्रीय बैंक ने कहा कि वित्त वर्ष 2016-17 में उसकी आमदनी 23.56 प्रतिशत घट गई जबकि व्यय यानी खर्च दोगुने से भी ज्यादा 107.84 प्रतिशत बढ़ गया।

वित्त वर्ष 2017-18 में 500 और 1,000 रुपये के 2,700 करोड़ पुराने नोट नष्ट हुए। पिछले वर्ष इसकी संख्या 1,200 करोड़ थी।

बढ़ा डिजिटल ट्रांजैक्शन 

नोटबंदी के बाद देश में डिजिटल ट्रांजैक्शन में बेहद तेज वृद्धि हुई। सितंबर 2018 तक BHIM ऐप का ऐंड्रॉयड वर्जन 3 करोड़ 55 लाख जबकि आईओएस वर्जन 17 लाख डाउनलोड हो चुका था। आंकड़े बताते हैं कि 18 अक्टूबर 2018 तक भीएम ऐप से 8,206.37 करोड़ रुपये मूल्य के कुल 18 लाख 27 हजार ट्रांजैक्शन हुए।

RuPay को सफलता 

वर्ष 2012 में नैशनल पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा तैयार किया गया पेमेंट सिस्टम रुपे भारतीय पेमेंट्स मार्केट पर दोनों अमेरिकी कंपनियों का दबदबा खत्म कर चुका है। NPCI डेटा से पता चलता है कि इस वर्ष अगस्त महीने में रुपे कार्ड्स से 4 करोड़ 96 लाख ट्रांजैक्शन के जरिए 62 अरब 90 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ। रुपे की सफलता ने मास्टकार्ड जैसी विदेशी दिग्गजों की नींद हराम कर दी। मास्टरकार्ड ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के अपने पेमेंट नेटवर्क रुपे को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रवाद का सहारा ले रहे हैं।

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