2019 में इन राज्यों में होने हैं विधानसभा चुनाव.. जानें कहां किसका पलड़ा भारी ?

Written by Newsroom Staff January 1, 2019 10:05 am

नई दिल्ली। 2019 भारत की सियासत के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है। बता दें कि इस साल देश में आम चुनाव तो होने ही हैं, तो वहीं दूसरी ओर बल्कि 8 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी हैं। जिनमें से तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार हैं, जबकि कांग्रेस के पास फिलहाल अरुणाचल प्रदेश के रूप में एक छोटा राज्य है।

चूंकि 2014 में आंध्र प्रदेश, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम में विधानसभा चुनाव हुए। इनमें से महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में बीजेपी ने अपने दम पर सरकार बनाई, जबकि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन में सरकार बनी। ओडिशा में बीजू जनता दल का जादू चला, जबकि अरुणाचल प्रदेश में कांग्रेस को मौका मिला, जबकि सिक्किम में एसडीएफ ने सरकार बनाई।


इन तीन राज्यों पर नजर

बीजेपी और कांग्रेस के लिए महाराष्ट्र, हरियाणा और झारखंड के विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं। महाराष्ट्र में जहां विधानसभा की कुल 288 सीटें हैं, तो वहीं यहां लोकसभा की 48 सीटें हैं, जो कि संख्या की दृष्टि से यूपी के बाद सबसे ज्यादा है। महाराष्ट्र में इस बार हालात काफी अलग हैं, एक तरफ जहां बीजेपी की सहयोगी शिवसेना बागी तेवर अख्तियार किए हुए है. वहीं, दूसरी तरफ कांग्रेस गठबंधन मजबूत हो रहा है।

चूंकि राज्य की राजनीति में बड़ा दखल रखने वाली शरद पवार की एनसीपी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया है। बता दें कि 2014 के विधानसभा में बीजेपी ने 122, शिवसेना ने 63, कांग्रेस ने 42 और एनसीपी ने 41 सीटों पर जीत दर्ज की थी।

हरियाणा में मिली बीजेपी को सत्ता

विधानसभा सीटों की संख्या के हिसाब से छोटा राज्य माने जाने वाला हरियाणा, राष्ट्रीय राजनीति की अहम कड़ी माना जाता है। यहां विधानसभा की 90 सीटें हैं और 2014 के चुनाव में बीजेपी को 47, आईएनएलडी को 19 और कांग्रेस को 15 सीटों पर जीत मिली थी। यहां बीजेपी को 2014 में पहली बार सत्ता मिली।

नए राज्य के रूप में झारखंड के अस्तित्व में आने के बाद ही नवंबर, 2000 में बीजेपी को राज्य की सत्ता मिली और उसके बाद से तीन और बार बीजेपी को यहां शासन करने का अवसर मिला है। 2014 में बीजेपी ने 82 सीटों वाली विधानसभा में 43 सीटों पर परचम लहराया था।

Jammu & Kashmir CM Mehbooba mufti with PM Narendra Modi

जम्मू-कश्मीर और आंध्र प्रदेश में छूटे बीजेपी के सहयोगी

जम्मू-कश्मीर की चुनावी राजनीति में बीजेपी का दखल बढ़ा है। 2014 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को 87 सीटों वाले राज्य में 25 सीटों पर जीत मिली थी. जिसके चलते सूबे की सियासत के समीकरण बदल गए थे और किसी भी प्रमुख दल को पूर्ण बहुमत नहीं मिल सका था। 28 सीटों के साथ पीडीपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी।

आंध्र प्रदेश की सबसे मजबूत तेलुगु देशम पार्टी केंद्र की मोदी सरकार का साथ छोड़ चुकी है। एनडीए सरकार में सहयोगी रहे टीडीपी प्रमुख और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू अब 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर बीजेपी के खिलाफ क्षेत्रीय दलों को लामबंद कर रहे हैं। विधानसभा में भी उनकी मजबूती है और कुल 175 सीटों में से 102 उनकी पार्टी टीडीपी के पास है।

ओडिशा में नवीन पटनायक का डंका

भारतीय जनसंघ के जमाने से भारतीय जनता पार्टी ओडिशा की चुनावी राजनीति में किस्मत आजमाती रही है, लेकिन उसे कभी भी शासन का मौका नहीं मिल सका है। हालांकि, पार्टी यहां मजबूती से चुनाव लड़ती रही है और 2000 के विधानसभा चुनाव में बीजेडी ने बीजेपी के साथ गठबंधन में पूर्ण बहुमत हासिल किया था और वो मुख्यमंत्री बने थे। 2014 के विधानसभा चुनाव में बीजेडी ने कुल 147 में से 117 सीटों पर जीत दर्ज की थी और कांग्रेस व बीजेपी महज 16 व 10 सीटों पर सिमट गई थीं।

अरुणाचल और सिक्किम

2014 में केंद्र की सत्ता से बुरी तरह बेदखल होने वाली कांग्रेस को सिर्फ सीमाई अरुणाचल प्रदेश से राहत की खबर मिली थी। पार्टी ने यहां 60 में से 42 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी ने आठ सीटों की छलांग लगाते हुए 11 सीट जीती थीं।

सिक्किम की राजनीति से बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही आउट हो गए हैं। 30 सीटों वाली विधानसभा में क्षेत्रीय पार्टी एसडीएफ ने 2014 के चुनाव में 22 पर परचम लहराया था। कांग्रेस और बीजेपी यहां अपना खाता भी नहीं खोल पाई थीं।

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