जब वेंकैया ने रुंधे गले से कहा ‘पार्टी ही मेरी मां है’

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नई दिल्ली। भाजपा ने वेंकैया नायडू को उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बना दिया है। उपराष्ट्रपति की राज्यसभा का अध्यक्ष होता है और नायडू को राज्यसभा की कमान सौंपने के पीछे मोदी और शाह की यही रणनीति है कि सरकार को उच्च सदन में मजबूती मिले। जाहिर तौर पर सरकार संख्याबल के आधार पर राज्यसभा में कमजोर है और धुर सियासतदान नायडू के सदन की कुर्सी पर बैठने से सरकार को बल मिलेगा।

यह तो रही नायडू को उपराष्ट्रपति उम्मीदवार बनाने जाने के पीछे भाजपा की रणनीति। लेकिन वेंकैया का आरएसएस की तरफ झुकाव की कहानी ही काफी दिलचस्प है। सबसे पहले आरएसएस की तरफ वेंकैया दस साल की उम्र में कबडडी की वजह से आकर्षित हुए थे।

किसान के बेटे वेंकैया उसके बाद फिर आरएसएस से लेकर जन संघ और फिर भाजपा में घुसते चले गए। पार्टी के​ सिदधांतों पर फिदा हो गए। आंध्रप्रदेश के नेल्लूर जिले से निकलकर फिर लंबा सियासी सफर पूरा किया।

वेंकैया की मां की देहांत एक सडक दुर्घटना में हो गया था। उस वक्त वेंकैया की उम्र सिर्फ डेढ़ साल की थी। बड़े होकर आरएसएस और राजनीतिक दल से जुड़ने के बाद वह संगठन को ही मां मानते रहे। एक बार अपने भाषण के दौरान उन्होंने रुंधे गले से कहा था कि एक दिन पार्टी ही मेरी मां हो गई।