चुनाव चिन्ह की लड़ाई में शरद की हार नीतीश की हुई जीत

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नई दिल्ली। चुनाव आयोग ने असली-नकली जदयू का फैसला कर दिया है। आयोग ने मंगलवार को पार्टी के बागी शरद यादव के जदयू के सिंबल पर दावे को खारिज कर दिया है। इसके साथ अब यह तय हो गया है कि नीतीश कुमार का जदयू ही असली है।

जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने पार्टी के बागी नेता शरद यादव के उस दावे को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्‍होंने जदयू पर अपनी दावेदारी की थी। जदयू के शरद गुट ने बीते 25 अगस्‍त को पार्टी सिंबल पर अधिकार जताया था। लेकिन, शरद यादव अपने दावे के पक्ष में अपेक्षित कागजात उपलब्‍ध नहीं करा सके।

शरद की दोवदरी के बाद जदयू ने भी चुनाव आयोग से मिलकर शरद के दावे के खिलाफ और अपने पक्ष में दावेदारी पेश की। जदयू का एक प्रतिनिधिमंडल सांसद आरसीपी सिंह के नेतृत्व में बीते शुक्रवार को चुनाव आयोग से मिला और पार्टी के चुनाव चिन्ह पर दावा करते हुए कहा कि शरद की दावेदारी का कोई आधार नहीं है। जदयू के महासचिव संजय झा ने बताया कि पार्टी ने चुनाव आयोग से मिलकर दावे से संबंधित दस्तावेजी सबूत दाखिल किए।

पार्टी ने बिहार के 71 विधायकों तथा 30 विधान पार्षदों के शपथपत्र दिए। साथ ही दो लोकसभा सांसदों और सात राज्यसभा सांसदों के शपथ पत्र भी दिए। सभी ने मुख्यमंत्री व पार्टी सुप्रीमो नीतीश कुमार के प्रति समर्थन जताया।

संजय झा ने बताया कि इसके अलावा चुनाव आयोग को राष्ट्रीय कार्यकारिणी, राष्ट्रीय परिषद के सदस्यों और पार्टी के पदाधिकारियों के बहुमत का समर्थन पत्र भी सौंपा गया। संजय झा ने बताया कि पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से कहा कि शरद केवल मामले को लटकाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि जदयू ने राज्यसभा सभापति के पास उन्हें अयोग्य घोषित करने का अनुरोध पत्र भेजा हुआ है।पार्टी लाइन से अलग चल रहे शरद यादव की राज्‍यसभा सदस्‍यता समाप्‍त करने के लिए भी जदयू ने राज्यसभा के सभापति से आग्रह किया है। इसके बाद राज्‍यसभा सचिवालय ने नोटिस भेजकर शरद से स्‍पष्‍टीकरण मांगा है। अब चुनाव आयोग के ताजा फैसले के बाद शरद की राज्‍यसभा की सदस्‍यता पर पड़ना तय माना जा रहा है।