आरबीआई ने प्रमुख ब्याज दरों में नहीं किया बदलाव

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मुंबई। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने बुधवार को जारी वित्त वर्ष 2017-18 की अपनी पांचवी द्विमासिक मौद्रिक समीक्षा में प्रमुख ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया है।

आरबीआई ने रेपो रेट को 6 फीसदी पर और रिवर्स रेपो रेट को 5.75 फीसदी पर बरकरार रखा है।

यह इस वर्ष की आखिरी एम.पी.सी. बैठक है। बैंक के इस कदम से सस्‍ते कर्ज का इंतजार और लंबा हो गया है। सबकी निगाहें अब फरवरी में होने वाली बैठक पर टिक गई हैं।

रिजर्व बैंक ने मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी यानि एम.एस.एफ. दर को 6.25 फीसदी पर बरकररार रखा है। साथ ही जीवीए ग्रोथ का अनुमान 6.7 फीसदी पर बरकरार रखा है। रिजर्व बैंक के मुताबिक दूसरी छमाही में रिटेल महंगाई दर 4.2-4.6 फीसदी रहने का अनुमान है। रिजर्व बैंक की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि महंगाई को 4 फीसदी के दायरे में रखने और ग्रोथ को सपोर्ट करने के लक्ष्‍य को ध्‍यान में रखते हुए नीतिगत दरों में कोई बदलाव न करने का फैसला किया गया है।

अपनी पिछली बैठक में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था। रेपो रेट को 6 प्रतिशत पर जबकि रिवर्स रेपो रेट को 5.75 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया था। बता दें कि अगस्त में भी मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट को 6.25 से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया था जबकि रिवर्स रेपो रेट को 6 प्रतिशत से 5.75 प्रतिशत कर दिया था।

रेपो रेट वह दर होती है जिसपर बैंकों को आर.बी.आई. कर्ज देता है। बैंक इस कर्ज से ग्राहकों को लोन मुहैया कराते हैं। रेपो रेट कम होने का अर्थ है कि बैंक से मिलने वाले तमाम तरह के कर्ज सस्ते हो जाएंगे।

यह वह दर होती है जिस पर बैंकों को उनकी ओर से आर.बी.आई. में जमा धन पर ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट बाजारों में नकदी की तरलता को नियंत्रित करने में काम आती है।