ये है पद्मावती और खिलजी की असली कहानी

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नई दिल्ली । मेवाड़ से लेकर आमेर, अजमेर और चित्तौड़ में फैली राजपूतों की भूमि की महान कहानियां आज भी हमारे रोंगटे खड़ी कर सकती हैं। शानदार किले, ऐतिहासिक युद्ध और प्रेम कहानियां कितना कुछ है इनकी गाथाओं में।12 वीं और 13 वीं शताब्दी के आसपास मुगल और खिलजी वंश के कई शासकों ने हिंदुस्तान पर कब्जा करने के लिए बार-बार राजपूतों पर हमले किए। इन्हीं में से एक आक्रमण था चित्तौड़गढ़ के किले पर।हालांकि, रानी पद्मिनी के अस्तित्व का समर्थन हिंदू धर्म या राजपूत जनजाति में कहीं नहीं मिलता, लेकिन अवधी कलाकार मलिक मुहम्मद जायसी की कविताओं में रानी पद्मिनी को जीवंत किया गया। उनकी कविता के अनुसार – अलाउद्दीन खिलजी एक खूंखार शासक था, जिसने गद्दी के लिए अपने ससुर का कत्ल कर दिया था। उसे राज्यों व महिलाओं पर आक्रमण करने के लिए जाना जाता था। पद्मावती फिल्म खिलजी के मेवार पर हमले की कहानी है।रानी पद्मिनी के पिता गंधर्वसेन सिंहल प्रान्त के राजा थे, जिन्होंने बेटी का स्वयंवर आयोजित किया था, जिसमें चित्तौड़गढ़ के राजा रावल रतन सिंह ने रानी पद्मिनी से विवाह किया था।राजपूत राजा रावल रतन सिंह के दरबार में राघव चेतन संगीतकार भी था, जो कि एक जादू करता था। एक दिन राजा ने राघव चेतन को बुरी आत्माओं को बुलाते रंगे हाथों को पकड़ लिया था और मुंह कालाकर उसे राज्य से निर्वासित कर दिया था।प्रतिशोध की आग जल रहा चेतन दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के पास पहुंचा। चेतन ने सुल्तान को रानी पद्मिनी की खूबसूरती के बारे में बताया। इसके बाद रानी की एक झलक लेने चित्तौड़ पहुंचा। रानी पद्मिनी की सुंदरता पर मोहित होकर खिलजी ने रतन सिंह को बंदी बना लिया, लेकिन चित्तौड़ के वफादार सैनिक गोरा और बादल ने उन्हें रिहा करवा लिया।इसके बाद खिलजी ने फिर चित्तौड़ पर आक्रमण कर दिया, जिस युद्ध में राजा रतन सिंह वीरगति को प्राप्त हो गए। यह सुनकर रानी पद्मिनी ने सोचा कि उनके पास सिर्फ 2 विकल्प हैं या तो वे जौहर कर लें या समर्पण कर निरादर सहें। उनके साथ सभी महिलाएं जौहर के पक्ष में थीं, उन्होंने विशाल चिता बनाई और सारी महिलाएं उसमें कूद गईं। खिलजी की सेना ने जब किले में प्रवेश किया तो उन्हें सिर्फ राख मिली। यह कथा आज भी लोकगीतों में जीवित है।