पूरी तस्वीर पर गौर कर देखिये, शहरों के नाम बदले जाने के पीछे की सच्चाई आ जाएगी सामने

उत्तर प्रदेश की सत्ता में भाजपा सरकार के आने के बाद से शहरों और रेलवे स्टेशनों के नाम बदलने का सिलसिला जारी है। हाल ही में यूपी स्थित मुगलसराय स्टेशन का नाम बदलकर दीनदयाल उपाध्याय स्टेशन कर दिया गया तो वहीं तीर्थ नगरी इलाहाबाद का नाम बदलकर प्रयागराज करने को भी योगी सरकार की तरफ से मुहर लगा दी गई। 444 साल बाद एक बार फिर प्रयागराज को उसका अपना पुराना नाम मिल गया। इस मौके पर योगी आदित्यनाथ ने बताया कि बैठक में संतों और बाकी लोगों ने प्रयागराज नाम रखे जाने का प्रस्ताव रखा था जिसे सरकार की ओर से पहले ही प्रयागराज मेला प्राधिकरण बनाते समय मंजूरी दी जा चुकी है। अब प्रदेश के राज्यपाल ने भी इस प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी।

Allahabad
इलाहाबाद अब कहलाएगा ‘प्रयागराज’

लेकिन इस फेहरिस्त में इलाहाबाद पहला शहर नहीं है। इससे पहले भी कई शहरों को नए नाम दिए गए। हालांकि नाम बदले जाने के बावजूद शहरों को पुराने नाम से ही ज्यादा पुकारा जाता रहा है। इसका कारण है जुबान पर चढ़ा पुराना नाम। दो साल पहले गुड़गांव का नाम बदलकर गुरुग्राम कर दिया गया। लेकिन इस पूरे मामले में जितनी राजनीति अब हो रही है उतनी राजनीति पहले कभी नहीं हुई। इससे पहले देश के कई और शहरों के नाम बदले गए और तब वहां की स्थानीय सरकारें या केंद्र की कांग्रेस सरकार ने यह फैसला लिया था लेकिन इस पर उतना हंगामा कभी नहीं हुआ। हालांकि आज भी लोग नए नाम वाले शहरों को उनके पुराने नाम से ज्यादा पुकारते हैं। लेकिन इलाहाबाद का नाम प्रयागराज करने पर इतना हंगामा क्यों बरपा यह सोच का विषय है।

नाम बदलने का यह चलन नया नहीं है, क्योंकि लंबे समय से शहरों को नए नाम मिलते रहे हैं। यहां हम आपको उन्हीं शहरों के बारे में बताएंगे, जिनके पुराने नाम कुछ और ही थे। ठीक वैसे जैसे प्रयागराज कभी इलाहाबाद था और गुरुग्राम… गुड़गांव।

आजादी के तुरंत बाद से ही भारतीय नामों के लिए शहरों के नाम बदले जाने का सिलसिला शुरू हो गया था। हम आपको भारत के उन शहरों के बारे में बता रहे हैं। जिनके नाम ब्रिटिश राज के दौरान अंग्रेजों ने अपनी सहूलियत के हिसाब से बदले थे और देश के आजाद होने के बाद से भारतीय नामों के लिए फिर से इन शहरों के नामों को बदला गया।

त्रिचिनापोली से तिरुचिरापल्लीThiruvarangam temple in Tiruchirapalli

1971 में त्रिचिनापोली का नाम ज्यादा हिंदुस्तानी बनाते हुए इसे तिरुचिरापल्ली कर दिया गया था। इससे पहले त्रिचिनापोली को त्रिची भी कहा जाता था। माना जाता है कि इस शहर का नाम तीन सिरों वाली राक्षसी त्रिशिरा के नाम पर रखा गया था।

बड़ौदा से वडोदराVadodara

1974 में कांग्रेस की सरकार ने गुजरात के बड़ौदा का नाम बदलकर वडोदरा कर दिया। वडोदरा का नाम वटपत्रक या बरगद के पत्ते के नाम पर पड़ा है। कुछ लोग इसका नाम बरगद के बीच यानि वटोदर से पड़ा भी मानते हैं।

त्रिवेंद्रम से तिरुवनन्तपुरमPadmanabhaswamy Temple Thiruvananthapuram.

हालांकि ज्यादातर लोग इसे आज भी त्रिवेंद्रम ही कहते हैं लेकिन केरल की राजधानी का नाम 1991 से ही तिरुवनन्तपुरम हो चुका है। इसका श्रेय भी कांग्रेस सरकार को ही जाता है। इसका नाम भगवान अनंत के नाम पर रखा गया है। जो कि पद्मनाभमस्वामी मंदिर के प्रमुख देवता हैं।

बॉम्बे से मुंबई

मुंबई भारत की आर्थिक राजधानी है और लोग कहते हैं कि बॉम्बे से आज भी जो फील आता है, मुंबई से नहीं आता। मुंबई शहर है, जबकि बॉम्बे एक भावना है। मुंबई का नाम मुंबा देवी के नाम पर रखा गया है। मुंबई में जो आखिरी का आई है, उसका मतलब होता है मां। यानि मुंबई का मतलब हुआ ‘मुंबा मां’। बॉम्बे का नाम 1995 में बदलकर मुंबई किया गया था। यह शिवसेना के द्वारा किया गया था।

मद्रास से चेन्नई

सारे बदले जाने वाले नाम ज्यादातर मिलते-जुलते होते हैं लेकिन सबसे ज्यादा अंतर चेन्नई और मद्रास में दिखता है। डीएमके सरकार ने इसका नाम भी 1996 में ही बदला। अंग्रेजों ने मद्रास का नाम मद्रासपट्टिनम से बदलकर मद्रास रखा था। आज भी चेन्नई में इस नाम का मछुआरों का एक कस्बा है। कुछ लोगों का कहना है कि इस शहर का नाम तेलुगु राजा दमारला चेनप्पा नायकुडु के नाम पर रखा गया है। जबकि एक मत यह भी है कि यह नाम चेन्ना केसवा पेरुमत मंदिर से आया है।

कोचीन से कोच्चीCochin

यह नाम भी अंग्रेजों ने ही रखा था हालांकि इसमें उतना अंग्रेजी प्रभाव नहीं झलकता है। इसका नाम भी कांग्रेस सरकार ने कोच्ची 1996 में ही बदलकर किया। ज्यादातर इसे इरनाकुलम नाम से भी बुलाया जाता है कोच्ची को कोचु अझ आई भी कहते हैं, जिसका मतलब मलयालम में छोटी खाड़ी होता है।

कलकत्ता से कोलकाताhowrah bridge Kolkatta

भारत के सांस्कृतिक शहरों में से एक कलकत्ता ने 2001 में फिर से अपना बंगाली नाम कोलकाता अपना लिया था। तब वहां की वामपंथी सरकार ने इस शहर का नाम बदल दिया। यह कोलिकाता का छोटा रूप है। यह यहां स्थापित एक ऐसा गांव था, जो ब्रिटिशों के इस पर कब्जे से पहले यहां हुआ करता था। इसके अलावा कलकत्ता जिन दो गांवों को मिलाकर बना है, उनके नाम थे सुतानुती और गोविंदपुर।

पॉन्डिचेरी से पुद्दुचेरीPuducherry

पॉन्डिचेरी से बदलकर इस शहर का नाम 2006 में पुद्दुचेरी हो गया। यह भी कांग्रेस सरकार का हीं किया कारनामा था। जैसा कि पॉन्डिचेरी नाम से ही साफ था, इस पर फ्रांसीसी भाषा का साफ प्रभाव था। इसे पॉन्डि भी कहा जाता था। तमिल भाषा में इसका नाम पुद्दुचेरी होता है, जिसका सीधा मतलब होता है, नया शहर।

कॉनपोर से कानपुरKanpur Central

गंगा के किनारे बसे इस औद्योगिक शहर कॉनपोर का नाम आजादी के एक साल के अंदर ही बदल दिया गया था। तब कांग्रेस की ही सरकार थी जिसने 1948 में इस काम को अंजाम दिया। इस शहर के नाम को लेकर दो मान्यताएं हैं। पहली के हिसाब से शहर का नाम महाभारत के कर्ण के नाम पर कर्णपुर रखा गया था। जबकि दूसरी मान्यता के अनुसार पास के ही एक कस्बे मकनपुर के नाम पर इसका नाम रखा गया था।

बेलगाम से बेलागावीBelagavi

संस्कृत शब्द ‘वेलुग्रामा’ से इस शहर का नाम बेलागवी पड़ा। इस शहर का नाम बेलगाम से बेलागावी हाल ही में हुआ है। संस्कृत में बेलुग्रामा का मतलब होता है बांस का गांव। 2014 में कांग्रेस सरकार के समय इस शहर का नाम बदला गया।

इंधुर से इंदौरIndore

ब्रिटिश राज के दौरान ही इंदौर का नाम बदला गया था। मध्यप्रदेश के इस शहर का नाम इससे पहले इंधुर हुआ करता था। शहर का नाम इंद्रेश्वर मंदिर के चलते इंधुर कहा जाता था। इस मंदिर में हिंदू देवता इंद्र की पूजा होती है।

पंजिम से पणजीPanji

गोवा की राजधानी पणजी का नाम 1960 में आजादी के बाद बदलकर पंजिम कर दिया गया। मजेदार यह है कि कोंकणी में इस शहर को पोंजी पुकारा जाता है।

पूना से पुणे

बॉम्बे का चचेरा शहर कहा जाने वाला पुणे 1977 तक पूना नाम से जाना जाता था। शब्दश: इसका मतलब खूबियों का शहर होता है। वैसे पुणे को नाम पुण्य गिरि पहाड़ियों से मिला है।

सिमला से शिमला

Snowfall at Ridge in Shimla

शिमला फिलहाल हिमाचल प्रदेश की राजधानी है लेकिन ब्रिटिश राज के दौरान यह गर्मियों की राजधानी हुआ करती थी। देवी श्यामला देवी के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है। यह देवी काली का एक अवतार मानी जाती हैं। आजादी के बाद ही सिमला का नाम बदलकर शिमला कर दिया गया था। तब सरकार किसकी थी यह किसी से छुपी नहीं है।

बनारस से वाराणसीVaranasi

इस पवित्र माने जाने वाले शहर को काशी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन आजादी के बाद बनारस ने 1956 में अपना भारतीय नाम वाराणसी पाया। वरुणा नदी और अस्सी घाट के बीच बसे होने के चलते इस शहर को वाराणसी कहा जाता है।

वाल्टेयर से विशाखापट्टनमVisakhapatnam

आंध्रप्रदेश का विशाखापट्टनम जिसे अक्सर विजाग भी कहा जाता है, आजादी के बाद ही इसने अपने अंग्रेज नाम वाल्टेयर छोड़ दिया था। लेकिन इसे छोड़कर वह विजागापट्टनम हो गया था। जिसके बाद 1987 में यह विशाखापट्टनम हो गया। यह भारत के पूर्वी तट पर चेन्नई और कोलकाता के बाद तीसरा सबसे बड़ा शहर है। आंध्र वंश के शासक भगवान विसाकेश्वर के नाम पर इसका नाम रखा गया था।

तंजौर से तंजावुरThanjavur Temple Tamilnadu

तमिलनाडु में मंदिरों की कला का गढ़ है तंजावुर। इसके बृहदेश्वर मंदिर और तंजौर पेंटिंग बहुत प्रसिद्ध हैं। आजादी के बाद ही इस शहर ने अपना नाम तंजौर से बदलकर तंजावुर कर लिया था। इसका नाम हिंदू आख्यानों के प्रसिद्ध राक्षस तंजन के नाम पर रखा गया है।

जुब्‍बुलपोर से जबलपुरJabalpur

भारत में जिन शहरों का नाम सबसे पहले बदला गया जबलपुर उनमें से एक था। 1947 में आजादी के तुरंत बाद ही इस शहर का नाम बदल दिया गया था। इस शहर का नाम रामायण के जाबाली के कथा के साथ जोड़ा जाता है।

उटकमंडलम से उधगमंडलमOoty

इसे ऊटी भी कहा जाता है। यह नीलगिरि पहाड़ियों में बसा है। पहले इसका नाम उटकमंडलम था, अब उधगमंडलम है। लेकिन आज भी लोग इसे इसके छोटे नाम ऊटी से ही बुलाते हैं।

कालीकट से कोझीकोडKozhikode

यही भारत का वह तटीय शहर है जहां सबसे पहले वास्कोडिगामा आया था। यह मलयालम शब्दों कोवली और कोटा से मिलकर बना है। इस दोनों ही शब्दों का मलयालम में अर्थ महल और किला होता है। अरब इस शहर को कालीकत, तमिल इस शहर को कालीकोट्टई और चीनी कलिफो कहा करते थे।

गौहाटी से गुवाहाटीGuwahati

पुराने असमिया आख्यानों से पता चलता है कि इस शहर का नाम प्राचीन काल में प्रागज्योतिषपुर हुआ करता था। अभी का नाम गुवाहाटी, गुवा माने सुपारी और हाट माने बाजार से मिलकर बना है। 1980 में इसने अपने अंग्रेजी लहजे वाले नाम गौहाटी को छोड़ दिया था।

अलेप्पी से अलपुझाalleppey

1957 में ही अलेप्पी का नाम बदलकर अलपुझा हो गया था। यह मलयालम के अला और पुझा शब्दों को मिलाकर बना है। जिसका मलतब समुद्र और नदियों के बीच की डेल्टा जैसी जमीन होता है।

मैसूर से मैसुरूMysuru

अपने महलों और मैसूर पार्क के लिए प्रसिद्ध इस शहर का नाम महिषासुर या महिशुरू से मिला है। हिंदू आख्यानों के अनुसार महिषासुर का महल यहीं था, जिसे बाद में देवी चामुंडेश्वरी ने मार दिया। 2014 में कांग्रेस की सरकार ने इस शहर को यह नया नाम दिया।

मंगलौर से मंगलुरुMangalore

मंगलौर ने कलकत्ता की तरह अपने लोगों की भाषा को अपना लिया है, जिससे इसका नाम मंगलुरु हो गया है। यहां पर स्थापति देवी मंगलादेवी मंदिर के नाम पर इस शहर का नाम पड़ा है। 2014 में कांग्रेस की सरकार ने इस शहर को भी नया नाम दिया।

बंगलौर से बेंगलुरुBengaluru

बेंगलुरु में बेगुर नाम की जगह पर मिले एक शिलालेख में वहां पर पश्चिमी गंग शासकों का इलाका बताया गया है। यह शिलालेख 890 के आस-पास का है। 1004 तक यहां पर गंग शासकों ने शासन किया। तब तक इसे बेंगावल-उरू कहा जाने लगा था। जिसका मतलब होता था, रक्षकों का शहर। 2014 में कांग्रेस सरकार के नाम इस शहर का भी नया नामकरण करने का श्रेय जाता है।

गुड़गांव से गुरुग्रामGurugram

महाभारत में पांडवों और कौरवों को युद्धविद्या की सीख देने वाले गुरु द्रोणाचार्य का गांव गुरुग्राम यहीं पर है। इसी स्थान पर अर्जुन ने चिड़िया की आंख में निशाना लगाया था। और इसी स्थान पर महाभारत की पूर्व तैयारी भी हुई थी। 2016 में भाजपा सरकार के समय इस शहर का नाम बदला गया। ठीक इसी समय गुरुग्राम से सटे हरियाणा के एक और जिले मेवात का नाम बदलकर भी नूंह कर दिया गया। नूंह को भी मेवात का ऐतिहासिक नाम बताया जाता है।sonia-gandhi-rahul-gandhi

वहीं कांग्रेस ने 2014 में विजयपुरा का नाम बदलकर बीजापुर करने का फैसला ले लिया तो इसी साल कांग्रेस की सरकार ने चिकमंगलुर का नाम बदलकर चिकामंगलुरु, हुवली का नाम बदलकर हुब्बाली और गुलबर्गा का नाम बदलकर कलबुर्गी करने के फैसले को भी मंजूरी दे दी।rahul and sonia gandhi sad

ऐसे में जब कांग्रेस और अन्य दल अपनी-अपनी सुविधा के हिसाब से शहरों के नाम में समय-समय पर बदलाव करते रहे हैं तो फिर गुड़गांव, मेवात और इलाहाबाद शहर के नामों के बदले जाने पर इतना हंगामा क्यों? कहीं यह सब कुछ एक सोची समझी राजनीति के तहत तो नहीं किया जा रहा है। यह सोचना हम सबकी जिम्मेदारी है।

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