ज्योतिष के अनुसार जन्मकुंडली में क्रोध का मुख्य कारण मंगल तो नहीं?

जिन लोगों की कुंडली में मंगल राहु का योग होता है उन्हें अक्सर जमीन जायदाद से जुडी समस्याएं भी परेशान करती हैं इसके अलावा मंगल राहु का योग हाई बी.पी. मांसपेशियों की समस्या, एसिडिटी, अग्नि और विद्युत दुर्घटना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न करता है।

क्रोध का मुख्य कारण अहंकार है। अगर हम क्रोध पर नियंत्रण चाहते हैं तो अहंकार को हमें सबसे पहले कुचलना होगा। कुछ लोगों को गुस्से के बारे में भी ढेरों भ्रांतियां होती हैं। जैसे मैं गुस्सा करना छोड़ दूंगा तो मेरा रौब कम हो जाएगा या दूसरों की गलती का एहसास कराने के लिए, सबक सिखाने के लिए गुस्सा दिखाना जरूरी है। या सामने वाला व्यक्ति हर कदम पर हमारे साथ गलत व्यवहार कर रहा हो तो क्रोधित होकर प्रतिकार करना आवश्यक है। यह क्रोध ही दुख का कारण है तथा अनन्त बार जन्म-मरण करवाता है। क्रोध कैसे आता है? अहम् पर चोट पड़ने से क्रोध आता है। अन्दर में यह जो अहंकार बैठा है, वही क्रोध का कारण है। अगर कुछ करना ही है तो इस अहंकार को कम करने की कोशिश करें, जीवन सुखमय हो सकता है। पण्डित दयानन्द शास्त्री के अनुसार ज्योतिषीय दृष्टि से देखा जाये तो क्रोध के मुख्य कारण मंगल, सूर्य, शनि, राहु तथा चंद्रमा होते हैं। सूर्य सहनशक्ति है तो मंगल अक्रामक और चंद्रमा शारीरिक और भावनात्मक जरूरतों का प्रतीक। पण्डित दयानन्द शास्त्री ने बताया यदि जन्मकुंडली में सूर्य और चंद्रमा, मंगल ग्रह एक-दूसरे के साथ किसी रूप में सम्बद्ध है तो व्यक्ति के अन्दर क्रोध अधिक रहता है। इसके अलावा मंगल शनि की युति क्रोध को जिद्द के रूप बदल देती है। राहु के लग्न, तीसरे अथवा द्वादश स्थान में होने पर काल्पनिक अहंकार के कारण अपने आप को बड़ा मानकर अंहकारी बनाता है जिससे क्रोध उत्पन्न हो सकता है।

ज्योतिष में मंगल को क्रोध, वाद विवाद, लड़ाई झगड़ा, हथियार, दुर्घटना, एक्सीडेंट, अग्नि, विद्युत आदि का कारक ग्रह माना गया है तथा राहु को आकस्मिकता, आकस्मिक घटनाएं, शत्रु, षड़यंत्र, नकारात्मक ऊर्जा, तामसिकता, बुरे विचार, छल, और बुरी आदतों का कारक ग्रह माना गया है, इसलिए फलित ज्योतिष में मंगल और राहु के योग को बहुत नकारात्मक और उठापटक कराने वाला योग माना गया है ।

गीता में भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि मनुष्य को अपने क्रोध पर नियंत्रण रखना बहुत आवश्यक हैं क्योंकि क्रोध से भ्रम पैदा होता है, भ्रम से बुद्धि का नाश होता हैं जब बुद्धि का नाश हो जाता है तो मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है ।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि मंगल और राहु स्वतंत्र रूप से अलग अलग इतने नाकारात्मक नहीं होते पर जब मंगल और राहु का योग होता है तो इससे मंगल और राहु की नकारात्मक प्रचंडता बहुत बढ़ जाती है जिस कारण यह योग विध्वंसकारी प्रभाव दिखाता है, मंगल राहु का योग प्राकृतिक और सामाजिक उठापटक की स्थिति तो बनाता ही है पर व्यक्तिगत रूप से भी मंगल राहु का योग नकारात्मक परिणाम देने वाला ही होता है।

ज्योतिष में लग्न भाव यानि प्रथम भाव को स्वभाव और शारीरिक बनावट का कारक माना जाता है। दूसरा भाव धन और वाणी का और पंचम भाव बुद्धि का होने से मनुष्य के व्यवहार को प्रभावित करता है। इन तीनों भावों से व्यक्ति के सवभाव को देखा जाता है। चन्द्रमा, बुध और मंगल के कारण मन, वाणी, और क्रोध पर नियंत्रण नहीं रहता। अगर कुण्डली में मंगल, चन्द्रमा और बुध ग्रह नीच राशि ने हों या इन पर राहु और सूर्य की क्रूर दृस्टि हो तो अनियंत्रित क्रोध जातक में होता है।

मंगल कुण्डली के प्रथम, तीसरे ,चतृर्थ, पंचम या अस्टम भाव में हो तो व्यक्ति में क्रोध की अधिकता होती है।

मंगल इन भावो में नीच राशि में हो तो  व्यक्ति को ज्यादा क्रोधित सवभाव का बनाता है।

सूर्य-मंगल, गुरु-मंगल,मंगल-बुध,मंगल-शनि, बुध-शनि, गुरु राहु , राहु-चन्द्रमा, शनि चन्द्रमा का कुण्डली में इकठे होना भी क जातक में क्रोध को बढ़ाता है।

पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार यदि जन्मकुंडली में मंगल और राहु एक साथ हो अर्थात कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो सर्वप्रथम तो कुंडली के जिस भाव में यह योग बन रहा हो उस भाव को पीड़ित करता है और उस भाव से नियंत्रित होने वाले घटकों में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है उदाहरण के लिए यदि कुंडली के लग्न भाव में मंगल राहु का योग हो तो ऐसे में स्वास्थ पक्ष की और से हमेशा कोई न कोई समस्या लगी रहेगी, धन भाव में मंगल राहु का योग होने पर आर्थिक संघर्ष और क़ुतुब के सुख में कमी होगी इसी प्रकार पंचम भाव में मंगल राहु का योग शिक्षा और संतान पक्ष को बाधित करेगा।

इसके अलावा कुंडली में मंगल राहु का योग होने से व्यक्ति का क्रोध विध्वंसकारी होता है, समान्य रूप से तो प्रत्येक व्यक्ति को क्रोध आता है पर कुंडली में राहु मंगल का योग होने पर व्यक्ति का क्रोध बहुत प्रचंड स्थिति में होता है और व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण नहीं कर पाता और बहुत बार क्रोध में बड़े गलत कदम उठा बैठता है, कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर जीवन में दुर्घटनाओं की अधिकता होती है और कई बार दुर्घटना या एक्सीडेंट का सामना करना पड़ता है।।

कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को वहां चलाने में भी सावधानी बरतनी चाहिए , कुंडली में मंगल राहु का योग होने पर व्यक्ति को शत्रु और विरोधियों की और से भी बहुत समस्याएं रहती है और जीवन में वाद विवाद तथा झगड़ों की अधिकता होती है, कुंडली में मंगल राहु का योग बड़े भाई के सुख में कमी या वैचारिक मतभेद उत्पन्न करता है और मंगल राहु के योग के नकारात्मक परिणाम के कारण ही व्यक्ति को जीवन में कर्ज की समस्या का भी सामना करना पड़ता है, इसके अलावा यदि स्त्री जातक की कुंडली में मंगल राहु का योग हो तो वैवाहिक जीवन को बिगड़ता है स्त्री की कुंडली में मंगल पति और मांगल्य का प्रतिनिधि ग्रह होता है और राहु से पीड़ित होने के कारण ऐसे में पति सुख में कमी या वैवाहिक जीवन में संघर्ष की स्थिति बनी रहती है।

जिन लोगों की कुंडली में मंगल राहु का योग होता है उन्हें अक्सर जमीन जायदाद से जुडी समस्याएं भी परेशान करती हैं इसके अलावा मंगल राहु का योग हाई बी.पी. मांसपेशियों की समस्या, एसिडिटी, अग्नि और विद्युत दुर्घटना जैसी समस्याएं भी उत्पन्न करता है।

यदि किसी जातक को गुस्सा अधिक आता है तो उसे ईश्वर का नाम लेना शुरू कर देना चाहिए, ईश्वर के नाम लेने से गुस्सा अवश्य ही शांत हो जाता है। इसके अलावा क्रोध किस कारण आता है, इस बात की सलाह भी ज्योतिषी से लेना उचित होता है, क्योंकि यदि कुंडली में कोई ग्रह योग ऐसी स्थिति निर्मित कर रहा है तो उसका निदान किया जा सकता है।

तो यहां हमने देखा की मंगल और राहु का योग किस प्रकार की समस्याएं उत्पन्न करता है यदि कुंडली में मंगल राहु के योग के कारण समस्याएं उत्पन्न हो रही हो तो निम्नलिखित उपाय लाभकारी होंगे-

  1. ॐ अंग अंगारकाय नमः का नियमित जाप करें।
  2. हनुमान चालीसा का पाठ करें।
  3. प्रत्येक शनिवार को साबुत उडद का दान करें।
  4. प्रत्येक मंगलवार को गाय को गुड़ खिलाएं।
  5. प्रतिदिन मस्तक पर सफ़ेद चन्दन का तिलक लगाएं।
  6. उपाय के तोर पर चांदी का बेजोड़ छला या कडा धारण सोमवार को करने से क्रोध में कमी आती है।
  7. ॐ सौं सोमाये नमः और ॐ भोम भोमाये नमः का जप करने या करवाने से क्रोध पर काबू पाया जा सकता है।
  8. चांदी के गिलास में पानी और दूध का सेवन करें। बड़े बजुर्गों के चरण स्पर्श करना और उनसे आशीर्वाद लेना क्रोध की शांति के लिए रामबाण है।
  1. योग्य एवम अनुभवी ज्योतिषाचार्य से परामर्श कर के ताम्बे में मूंगा या चांदी में साउथ सी मोती धारण करना चाहिए।
  2. मंगलवार को आठ मीठी रोटी कोयों को या कुत्तों को डालनी चाहिए।
  3. अभिमंत्रित मंगल यंत्र पास रखने से तत्काल लाभ होता है।

क्रोध निवारण में वास्तु का योगदान/उपयोग

क्रोध इंसान की प्रगति का बहुत बड़ा दुश्मन है। अपने गुस्से की वजह से इंसान बड़े-बड़े नुकसान कर डालता है। क्रोध के कारण उसकी सामाजिक क्षति तो होती ही है वो रिश्तों और पैसों से भी हाथ धो बैठता है। क्रोध को शांत करने के लिए वास्तुशास्त्र में भी कुछ उपाय बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर आप अपने क्रोध को नियंत्रण में रख सकते हैं।

उपाय निम्नलिखित है

वास्तुशास्त्र के अनुसार अपने घर के किसी भी कोने में गंदगी ना रखें क्योंकि गंदगी क्रोध को उकसाती है।

पूर्व दिशा में कोई भारी सामान ना रखें। शाम होते ही घर में धूप बत्ती या अगरबत्ती को जलायें।

वास्तुशास्त्र के अनुसार क्रोध को शांत रखने के लिए रोज सूर्य भगवान को जल अर्पित करें। इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है और क्रोध जैसी नकारात्मक ऊर्जा आपसे दूर रहती है।

वास्तुशास्त्र के अनुसार घर में लाल रंग का प्रयोग ना करें, घर में ना तो पेंट लाल हो और ना ही चादरें और पर्दे लाल रंग के हों।

क्रोध (गुस्से) से होने वाली हानियां

** यदि कोई व्यक्ति लगातार गुस्सा करता है तो उसे सर दर्द की शिकायत हो सकती है क्यूंकि गुस्सा करने से सर मे ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है।।

**ये क्रोध व्यक्ति को अवसादग्रस्त भी कर सकता है।।

** क्रोध करने वालों को हाई ब्लड प्रेशर की बिमारी भी हो सकती है ।।

** क्रोधी लोगों को मधुमेह (डाइबिटीज) होने का खतरा बढ़ जाता है ।।

** क्रोध करने वालों की फेफड़ो की कार्य क्षमता भी प्रभावित होती है ।।

** कुछ लोगो को सांस लेने मे भी समस्या होने लगती है।।

** क्रोध करने वाले कुछ लोग पाचन तंत्र की समस्या से ग्रस्त हो जाते है ।।

**गुस्सेल लोगो को नींद आने मे भी समस्या होने लगती है.

**गुस्सा आदमी को जुर्म की दुनिया मे भी घुसा देता है.

इन उपायों से/सावधानी से भी होता है क्रोध/गुस्सा शान्त/नियंत्रण

** दो पके मीठे सेब बिना छीले प्रातः खाली पेट चबा-चबाकर पन्द्रह दिन लगातार खाने से गुस्सा शान्त होता है। बर्तन फैंकने वाला, तोड़ फोड़ करने वाला और पत्नि और बच्चों पर हाथ उठाने वाला व्यक्ति भी अपने क्रोध से मुक्ति पा सकेगा। इसके सेवन से दिमाग की कमजोरी दूर होती है और स्मरण शक्ति भी बढ़ जाती है।

** प्रतिदिन प्रातः काल आंवले का एक पीस मुरब्बा खायें और शाम को एक चम्मच गुलकंद खाकर ऊपर से दुध पी लें। बहुत क्रोध आना शीघ्र ही बन्द होगा।

** गुस्सा आने पर दो तीन गिलास खूब ठंडा पानी धीरे धीरे घूँट घूँट लेकर पिएं । पानी हमारेशारीरिक तनाव को कम करके क्रोध शांत करने में मददगार होता है।

** यदि गुस्सा बहुत आता हो तो धरती माता को रोज सुबह उठकर हाथ से पाँच बार छूकर प्रणाम करें और सबसे विशाल ह्रदय धरती माँ से अपने गुस्से पर काबू करने और सहनशील होने का  मागें।

*** हमेशा याद रखे की गुस्सा हमारे लिए हानिकारक है, अतः इसे छोड़ना चाहिए।।

* जब भी गुस्सा आने लगे तो लम्बी सांसे लेने लग जाए कुछ देर तक।।

* रोज सुबह शाम ध्यान करे और व्यायाम भी करे।।

*** मंत्रजाप और सूर्य नमस्कार:— शारीरिक और मानसिक दोनों कमजोरियों पर विजय पाने के लिए मंत्रजाप और सूर्य नमस्कार अचूक अस्त्र हैं, इन्हें प्रमाणित करने की भी आवश्यकता नहीं है। सूर्य नमस्कार, हमारे आत्मविश्वास, आरोग्य को बढ़ाने में सहायक होता है। मंत्रजाप मन की शक्ति को बढ़ाता है और निरंतर अभ्यास से एकाग्रता और धैर्य बढ़ता है।।

** रोज सुबह हरी घास पे चलना चाहिए नंगे पाँव।।

** अगर कुंडली मे ग्रह खराब हो तो किसी अच्छे ज्योतिष से संपर्क करके उसके उपाय करने चाहिए।।

** अच्छे और सकारात्मक विचारों को पढ़ना चाहिए।।

** ॐ का जप भी बहुत लाभदायक रहता है।।

** पलाश के छोटे छोटे पत्तों की सब्जी खाने से गुस्सा, और पित्त जल्दी ही शांत होता है ।

रविवार को अदरक, टमाटर और लाल रंग के कपड़े गुस्सा अधिक बढ़ाते हैं अत: इनका कम से कम प्रयोग करें ।

*** ऐसे लोगो को हरड़ का प्रयोग लाभदायक रहता है  ।

** गर्म चीज़ो का इस्तामाल कम करना चाहिए ।

** दूध छाछ का सेवन करना चाहिए  ।

** आंवला और शह्द का इस्तामाल करे  ।

**तला और मिर्च मसाला वाला भोजन ना करे ।

**पानी ज़्यादा पिए

*गाय को रोटी दे ।

*चंदन का टीका लगाए ।

**आर्गला स्त्रोत का पाठ करे ।

** आपके परिवार में जिनको गुस्सा बहुत आता हो, बात- बात में चिढ़ जाते हो वे लोग सोमवार का उपवास करें, या एक समय भोजन करें। रात कों चन्द्रमा कों अर्घ दें तथा अपने गुस्से पर विजय प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करें । इससे भी मन शान्त रहता है, गुस्से पर नियंत्रण रहता है।

** भोजन में बहुत अधिक खट्टी, तीखी, मसालेदार चीजें खाने से आँखें जलती हैं, स्वभाव में चिड़चिड़ापन आता है, शीघ्र गुस्सा आता है, अकारण ही सीने और पेट में जलन होती है अत: इन चीजों का बिलकुल त्याग कर देना चाहिए ।

**यदि घर के किसी व्यक्ति को बात-बात पर गुस्सा आता हो, तो दक्षिणावर्ती शंख को साफ कर उसमें जल भरकर उसे पिला दें। यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण आपस में तनाव रहता हो, तो पूर्णिमा के दिन कदंब वृक्ष की सात अखंड पत्तों वाली डाली लाकर घर में रखें। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं और नई डाली लाकर रखें। यह क्रिया इसी तरह करते रहें, तनाव कम होगा।

–चांदी के गिलास में जल व दूध का सेंवन करें।

–11 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें।

–गणेश स्त्रोत का नियमित पाठ करें।

— रोज सुबह उठकर अपने बड़ों के चरण स्पर्श करें।

— रोज सुबह सूर्य को जल अर्पित करें।

— सूर्य के सामने गायत्री मंत्र का जाप करें।

अहंकार (क्रोध) शान्ति हेतु  विधि पूर्वक नकुल मंत्र का जाप कराना चाहिए या स्वयं करना चाहिए

जिस प्रकार नकुल ने अहि का विच्छेद करके सत्य का रूप धारण किया था उसी प्रकार आप अपने जीवन में मधुरता की कामना से नकुल मंत्र का जाप करें या करवाएं।

-‘‘ यथा नकुलो विच्छिद्य संदधात्यहिं पुनः। एवं कामस्य विच्छिन्नं स धेहि वो यादितिः।।

का जाप दुर्गादेवी के षोडषोपचार पूजन के उपरांत विधिवत् संकल्प लेकर इस मंत्र का जाप करने से रिश्तों की समस्त विषमताएं समाप्त होकर जीवन में सुख प्राप्त होता है।

** वे सभी जातक जिन्हें ज्यादा गुस्सा आता हो उन्हें चाय, काफी, मदिरा से परहेज करना चाहिए ये शरीर को उत्तेजित करते है उसके स्थान पर छाछ, मीठा दूध या नींबू पानी का प्रयोग करना चाहिए ।

** किसी को यदि गुस्सा आने वाला हो तो 5-6 बार गहरी गहरी साँस लीजिए, कुछ पलों के लिए अपनी आँखे बंद करके ईश्वर का ध्यान करें उन्हें प्रणाम करें उनसे अपना कोई भी निवेदन करें। यह गुस्सा कम करने का सबसे बढ़िया तरीका है। इससे आप भड़कने से पहले ही निश्चित रूप से शांत हो जाएंगे।

** अपने घर के किसी भी कोने में गंदगी ना रखें क्योंकि गंदगी क्रोध को उकसाती है।

***पूर्व दिशा में कोई भारी सामान ना रखें।

***शाम होते ही अपने घर, दुकान या ऑफिस में धूप बत्ती को जलाकर वहां का वातावरण सुगन्धित रखें।

** जिस स्त्री का पति हर समय बिना बात के ही गुस्सा करता रहता है तो वह स्त्री शुक्ल पक्ष के प्रथम रविवार, सोमवार, गुरुवार या शुक्रवार किसी भी दिन एक नए सफेद कपड़े में एक डली गुड़, चांदी एवं तांबे के दो सिक्के, एक मुट्ठी नमक व गेहूं को बांधकर अपने शयनकक्ष में कहीं ऐसी जगह छिपा कर रख दें जहाँ पति को पता न चले । इसके प्रभाव से भी पति का गुस्सा धीरे-धीरे कम होने लगेगा।

किसी ने बिल्कुल सटीक कहा है कि अपने भीतर से अहंकार को निकालकर खुद को हल्का कीजिए क्योंकि ऊंचा वही उठता है जो हल्का होता है। अगर आप अपनी खूबियों और तरक्की को ताउम्र बरकरार रखना चाहते हैं तो अहंकार से दूर ही रहिए। अपनी तरक्की और सुख के लिए ईश्वर को धन्यवाद करते रहें। अहंकार के राक्षस से बचने का यही सबसे कारगर रास्ता है।