छठ पर्व के चार दिन: क्यों होता है छठ, कैसे होती है पूजा, क्या हैं इसके मायने; जानें सब विस्तार से

छठ पर्व और सूर्य देव की पूजा का उल्लेख भारत के दोनों महाकाव्यों महाभारत और रामायण में है।

Written by: November 2, 2019 3:07 pm

नई दिल्ली। कोई भी बिहारी चाहे दुनिया के किसी भी कोने में रहता हो वह छठ पर्व में घर वापस आना चाहता है। इस त्योहार से ज्यादा बिहारियों के दिल को और कुछ नहीं छूता।

chhath puja

यह देश के अन्य प्रमुख त्योहारों- दीवाली,होली, दुर्गा पूजा की तरह एक धार्मिक उत्सव भर नहीं है। यह परिवार तक जाने वाली एक डोर है, जिसे कोई छोड़ना नहीं चाहता। बिहार (और झारखंड) का यह प्रचलित त्योहार चार दिनों का होता है। यह भगवान सूर्य और उनकी दो पत्नियों ऊषा और प्रत्यूषा को समर्पित है। ‘छठ’ नामकरण के पीछे इसका अमावस्या के छठे दिन या षष्ठी को होना है।

chhath puja women

बिहार में सूर्य देव और छठी मईया (ऊषा देवी के लिए प्रयुक्त नाम) इस पर्व के आराध्य हैं। इसकी तैयारी अत्यंत श्रमसाध्य और सघन होती है। ऊषा और प्रत्यूषा सूर्य देव की दो शक्ति मानी जाती हैं और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। संध्या काल में दिया जाने वाला पर्व का प्रथम अर्घ्य उनकी अंतिम किरण प्रत्यूषा को दिया जाता है और प्रातः काल का अर्घ्य सूर्य की प्रथम किरण ऊषा को।

chhath puja surya

छठ पर्व और सूर्य देव की पूजा का उल्लेख भारत के दोनों महाकाव्यों महाभारत और रामायण में है। श्रीराम के वनवास से लौटने के बाद देवी सीता के अयोध्या के राजपरिवार के कुल देवता के रूप में सूर्योपासना और महाभारत में इंद्रप्रस्थ की महारानी द्रौपदी के इस पर्व को मनाने के बारे में लिखित प्रमाण हैं।

chhath puja fruits

सूर्य पुत्र कर्ण महाभारत के प्रमुखतम किरदारों में एक है। यही नहीं, देवी ऊषा स्वयं वैदिक काल की देवी मानी गईं हैं, जिनकी उपासना में कई वेद मन्त्र और ऋचाएँ हैं।