हमेशा बीमारियों से अगर रहना है दूर तो हमेशा हाथों में पहनें कड़ा

ध्यान रहे यह कड़ा हनुमानजी का आशीर्वाद स्वरूप है अत: अपनी पवित्रता पूरी तरह बनाए रखें। कोई भी अपवित्र कार्य कड़ा पहनकर न करें। अन्यथा कड़ा प्रभावहीन हो जाएगा।

Written by पंडित दयानन्द शास्त्री June 16, 2019 3:19 pm

हाथ में कड़ा पहनने का चलन बहुत पहले से है। सिक्ख धर्म में कड़े को धारण करना आवश्यक माना गया है। सिक्ख धर्म में अधिकांश लोग चांदी या अष्टधातु का कड़ा धारण करते हैं। इसे सिक्ख लोगों के पंचककारो में से एक माना जाता है। दरअसल कड़ा पहनने के रिवाज के पीछे वैज्ञानिक कारण भी है। माना जाता है कि हाथ में कड़ा धारण करने से कई तरह की बीमारियों से रक्षा होती है। वहीं ज्योतिष के अनुसार चंद्र को मन का कारक माना गया है। चांदी को चंद्र की धातु माना गया है। इसलिए माना जाता है कि चांदी का कड़ा धारण करने से बीमारियां दूर होने के साथ ही चंद्र से जुड़े दोष भी समाप्त होते हैं व एकाग्रता बढ़ती है।

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असंयमित दिनचर्या के चलते मौसमी बीमारियों से लड़ पाना काफी मुश्किल हो गया है। जल्दी-जल्दी सफलताएं प्राप्त करने की धुन में कई लोग सही समय पर खाना भी खा पाते। जिससे शारीरिक कमजोरी बढ़ जाती है और वे लोग मौसम संबंधी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इन सभी बीमारियों से बचने के लिए हाथों में कड़ा पहनना सटीक उपाय बताया गया है।

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ज्योतिष में बीमारियों से बचने के लिए कई उपाय बताए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति बार-बार बीमार होता है तो यह उपाय करें-

जो व्यक्ति बार-बार बीमार होता है उसे सीधे हाथ मे अष्टधातु का कड़ा पहनना चाहिए। मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवाएं। इसके बाद शनिवार को वह कड़ा लेकर आएं। शनिवार को ही किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर कड़े को बजरंग बली के चरणों में रख दें। अब हनुमान चालिसा का पाठ करें। इसके बाद कड़े में हनुमानजी का थोड़ा सिंदूर लगाकर बीमार व्यक्ति स्वयं सीधे हाथ में पहन लें। ध्यान रहें यह कड़ा हनुमानजी का आशीर्वाद स्वरूप है अत: अपनी पवित्रता पूरी तरह बनाए रखें। कोई भी अपवित्र कार्य कड़ा पहनकर न करें। अन्यथा कड़ा प्रभावहीन हो जाएगा।

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जो व्यक्ति बार-बार बीमार होता है उसके सीधे हाथ के नाप का कड़ा बनवाना है। कड़ा अष्टधातु का रहेगा। इसके लिए किसी भी मंगलवार को अष्टधातु का कड़ा बनवाएं। इसके बाद शनिवार को वह कड़ा लेकर आएं। शनिवार को ही किसी भी हनुमान मंदिर में जाकर कड़े को बजरंग बली के चरणों में रख दें। अब हनुमान चालिसा का पाठ करें। इसके बार कड़े में हनुमानजी का थोड़ा सिंदूर लगाकर बीमार व्यक्ति स्वयं सीधे हाथ में पहन लें।

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ध्यान रहे यह कड़ा हनुमानजी का आशीर्वाद स्वरूप है अत: अपनी पवित्रता पूरी तरह बनाए रखें। कोई भी अपवित्र कार्य कड़ा पहनकर न करें। अन्यथा कड़ा प्रभावहीन हो जाएगा।