जानें और समझें घर पर शिवलिंग रखने के वेदोक्त नियमों के बारे में

शिवलिंग को कभी भी अंधेरे स्थान या बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करने लगता है, जिसके परिणाम भयावह हो सकते हैं।

मान्यता है कि धरती पर साक्षात रूप में अगर कोई भगवन मौजूद हैं तो वो भगवान शिव हैं। भोलनाथ को भोले यूं ही नहीं कहा जाता है। शिव जी अपने भक्तों को उनकी मनोकामना के अनुरूप हर वरदान  देते हैं और भोलेनाथ ही एक ऐसे भगवान हैं, जो शिवलिंग के रूप में इस धरती पर विद्यमान है। हिंदू धर्म में ईश्वर दर्शन करना महत्वपूर्ण माना जाता है। यही कारण है कि लोग अपने घरों में देवी-देवताओं की मूर्तियों को रखते हैं।

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हम सब भगवान शिव के शिवलिंग के रुप में पूजा करते हैं । लेकिन अधिकतर लोग शिवलिंग की कुछ विशेष बातों से अनजान रहते हैं इसलिए आज हम आपको शिवलिंग के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी देंगे ।शिवलिंग भगवान शिव का ही एक रुप है जो कि देवों के देव महादेव है शिवलिंग की पूजा बहुत फायदेमंद मानी जाती है ।कुछ लोग इसे घर में भी स्थापित करते हैं लेकिन इस से घर में रखने के बहुत सारे नियम है और अगर हम इन नियमों का पालन नहीं करेंगे तो नुकसान भी अत्यधिक है। इस सम्बन्ध में ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी का कहना है कि घर में किसी भी देवी-देवता की मूर्ति को रखते हैं तो जरुरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरुरी होता है। अन्यथा ये अशुभ भी हो सकता है। जैसे की कई लोग घर में शिवलिंग रखते हैं लेकिन इसके लिए जरुरी बातों का ध्यान नहीं रखते।

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ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानिए  शिवलिंग को घर में रखने के महत्वपूर्ण जानकारियां एवम नियम, जिनको ध्यान में रखकर आप अपने घर में शिवलिंग को रख सकते हैं। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार कुछ लोग अपने घरों में शिवलिंग की स्थापना कर लेते हैं। परंतु उन्हें इसे रखने और इसकी पूजा के किसी नियम के बारे में पता नहीं होता। तो पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि आखिरकार शिवलिंग को घर में रखने से किस तरह का प्रभाव पड़ता है। ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के अनुसार  शिवलिंग को कभी भी पूजा घर के अलावा किसी और स्थान पर न रखें।

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इसके साथ ही इसमें ये भी कहा गया है कि अगर कोई जातक घर में शिवलिंग को रखता है तो उसे रोज़ाना पूरे विधि-विधान से शिवलिंग की पूजा करनी चाहिए और अगर आप शिवलिंग की पूजा करने में असमर्थ हैं तो इसे घर में नहीं रखना चाहिए। इसे भगवान शिव का अपमान माना जाता है। ध्यान रखें कि यदि घर में शिवलिंग स्थापित करना हो इसे कभी भी अकेला न रखें। इसके पास गणेश जी की मूर्ति ज़रूर रखें इसे बहुत शुभ माना जाता है। इसके साथ इस बात का भी ध्यान रहे कि अगर आपके घर में शिवलिंग रखा है उसकी कुछ ऐसी व्यवस्था करें कि उसके ऊपर हमेशा जलधारा बहती रहे। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी के मतानुसार  शिवलिंग पर कभी भी हल्दी नहीं लगानी चाहिए। क्योंकि ऐसा कहा जाता है कि हल्दी का इस्तेमाल स्त्रियां अपने रूप को निखारने के लिए करती हैं। यही कारण है कि हल्दी को शिवलिंग पर न चढ़ाने की सलाह दी जाती है। शिवलिंग को हमेशा पूजा स्थल या पूजा कक्ष में ही रखना चाहिए। अगर घर का पूजा घर पूर्व दिशा में हो तो इसे और भी शुभ माना जाता है। इस बात का पूरा ध्यान रहे कि कभी भी पूजा स्थल दंपत्तियों के कमरे में नहीं होना चाहिए। अगर घर में पूजा स्थल पहली या दूसरी मंजिल पर है तो ध्यान रहे कि पूजा स्थल के ऊपर बाथरूम न हों। क्योंकि पूजा स्थल को एक पवित्र स्थान माना जाता है। इसके अलावा इन बातों का भी ध्यान रखें कि घर के पूजा स्थल को कभी भी बंद करके न रखें। कहा जाता है कि भगवान को कभी भी बंद नहीं किया जाता है। ऐसा करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है। इसलिए हमेशा घर के पूजा घर को कभी ताला नहीं लगाना चाहिए।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी से जानते हैं क्या है शिवलिंग का महत्व और इसकी महिमा…

यह हैं शिवलिंग की महिमा-

– शिवलिंग को शिव जी का निराकार स्वरूप माना जाता है।

-शिव पूजा में इसकी सर्वाधिक मान्यता है।

– शिवलिंग में शिव और शक्ति दोनों ही समाहित होते हैं।

– शिवलिंग की उपासना करने से दोनों की ही उपासना सम्पूर्ण हो जाती हैं।

– पूजने के लिए अलग-अलग प्रकार के शिवलिंग प्रचलित हैं।

– इनमें स्वयंभू शिवलिंग, नर्मदेश्वर शिवलिंग, जनेऊधारी शिवलिंग, सोने-चांदी के शिवलिंग और पारद शिवलिंग आदि हैं।

– स्वयंभू शिवलिंग की पूजा सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण और फलदायी मानी जाती है।

भोलेनाथ को प्रसन्न करने के लिए शिवलिंग की उपासना ही सबसे अद्भुत है. लेकिन शिवलिंग की महिमा और उस पर भगवान शिव की प्रिय वस्तुएं अर्पित करने के नियम के अलावा,  एक विशेष मंत्र भी होता है. शिवलिंग पर कुछ भी अर्पित करते समय इस विशेष मंत्र का जाप करना शुभ फलदायक माना जाता है।

इस विशेष मन्त्र का करें जाप-

आप शिवलिंग पर जब भी कोई भी द्रव्य अर्पित करते समय इस विशेष मंत्र का जाप करें-

‘ऊं नमः शंभवाय च,मयोभवाय च, नमः शंकराय च, मयस्कराय च, नमः शिवाय च, शिवतराय च’

यह रखें सावधानी-

शिवलिंग को कभी भी ऐसे स्थान पर स्थापित न करें जहां आप पूजन न करते हों। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यदि आप शिवलिंग की पूजा पूरी विधि-विधान से न कर पा रहे हो या ऐसा करने में असमर्थ हो तो भूल से भी शिवलिंग को घर पर न रखे, क्योकिं यदि कोई व्यक्ति घर पर शिवलिंग स्थापित कर उसकी विधि विधान से पूजा नहीं करता तो यह महादेव शिव का अपमान माना जाता है, इस प्रकार वह व्यक्ति किसी अनर्थ को आमंत्रित करता है।

भूल से भी न चढ़ाएं केतकी का फूल —

पुराणों में केतकी के फूल को शिव पर न चढ़ाने के पीछे एक कथा छिपी है इस कथा के अनुसार जब एक बार ब्रह्मा जी और विष्णु जी माया से प्रभावित होकर अपने आपको एक -दूसरे से सर्वश्रेष्ठ बताने लगे तब महादेव उनके सामने एक तेज प्रकाश के साथ ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए। ज्योतिर्लिंग के रूप में भगवान शिव ने ब्रह्मा और विष्णु से कहा की आप दोनों में जो भी मेरे इस रूप के छोर को पहले पा जाएगा वह सर्वशक्तिमान होगा। भगवान विष्णु शिव के ज्योतिर्लिंग के ऊपरी छोर की ओर गए तथा ब्रह्मा जी नीचे के छोर की ओर गए। काफी दूर चलते चलते भी जब दोनों थक गए तो भगवान विष्णु ने शिव के सामने अपनी पराजय स्वीकार ली है परन्तु ब्रह्मा जी ने अपने पराजय को छुपाने के लिए एक योजना बनाई। उन्होंने केतकी के पुष्पों को साक्षी बनाकर शिव से कहा की उन्होंने शिव का अंतिम छोर पा लिया है। ब्रह्मा जी के इस झूठ के कारण शिव ने क्रोध में आकर उनके एक सर को काट दिया तथा केतकी के पुष्प पर भी पूजा अर्चना में प्रतिबंध लगा दिया।

तुलसी अर्पित करने पर हैं प्रतिबंध–

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शिव पुराण की एक कथा के अनुसार जालंधर नामक एक दैत्य को यह वरदान था की उसे युद्ध में तब तक कोई नहीं हरा सकता जब तक उसकी पत्नी वृंदा पतिव्रता रहेगी, उस दैत्य के अत्याचारों से इस सृष्टि को मुक्ति दिलाने के लिए भगवान विष्णु ने वृंदा का पतिव्रता होने का संकल्प भंग किया व महादेव ने जलंधर का वध। इसके बाद वृंदा तुलसी में परिवर्तित हो चुकी थी व उसने अपने पत्तियों का महादेव की पूजा में प्रयोग होने पर प्रतिबंध लगा दिया। यही कारण की है कि शिवलिंग की पूजा पर कभी तुलसी के पत्तियों का प्रयोग नहीं किया जाता।

हल्दी पर रोक –हल्दी का प्रयोग स्त्रियां अपनी सुंदरता निखारने के लिए करती है व शिवलिंग महादेव शिव का प्रतीक है अत: हल्दी का प्रयोग शिवलिंग की पूजा करते समय नहीं करनी चाहिए।

कुमकुम का उपयोग –हिन्दू मान्यताओं के अनुसार कुमकुम का प्रयोग एक हिन्दू महिला अपने पति के लम्बी आयु के लिए करती है, जबकि भगवान शिव विध्वंसक की भूमिका निभाते है अत: संहारकर्ता शिव की पूजा में कभी भी कुमकुम का प्रयोग नहीं करना चाहिए।

शिवलिंग का स्थान बदलते समय 

शिवलिंग  का स्थान बदलते समय उसके चरणों को सपर्श करें तथा एक बर्तन में गंगाजल का पानी भरकर उसमे शिवलिंग को रखे और यदि शिवलिंग पत्थर का बना हुआ हो तो उसका गंगाजल से अभिषेक करें।

ध्यान रखें,शिवलिंग पर कभी पैकेट का दूध ना चढ़ाएं–

शिवलिंग  की पूजा करते समय हमेशा ध्यान रहे की उन पर पासच्युराईज्ड दूध ना चढ़ाएं, शिव को चढऩे वाला दूध ठंडा और सादा होना चाहिए।

जानिए शिवलिंग किस धातु का हो —

शिवलिंग को पूजा घर में स्थापित करने से पूर्व यह ध्यान रखे की शिवलिंग  में धातु का बना एक नाग लिपटा हुआ हो। शिवलिंग  सोने, चांदी या ताम्बे से निर्मित होना चाहिए।

कैसा हो शिवलिंग का आकार — घर में जो शिवलिंग हो उसका आकार छोटा होना चाहिए | यह अंगूठे से बड़ा नही हो | यदि आप पारद शिवलिंग रखते है तो यह सबसे अच्छा है | बड़ा शिवलिंग सिर्फ मंदिरों में फलदायी है |

एक ही शिवलिंग –घर के मंदिर में एक से ज्यादा शिवलिंग नही रखे |

शिवजी को अप्रिय चीजे ना चढ़ाये — भगवान शिव को कभी केतकी के पुष्प , तुलसी , सिंदूर और हल्दी ना चढ़ाये |

शिवलिंग को रखे शुद्ध जल में — एक पात्र में शुद्ध जल भरे और फिर शिवलिंग को उसमे रखे | पात्र का जल कभी सूखने ना दे |

अभिषेक — हर दिन सुबह नहा कर शिवलिंग का दूध और जल से अभिषेक करे | और शिव जी की आरती गाये | शिव मंत्रो से भोलेनाथ को रिझाये |

पात्र करे रोज साफ — जिस पात्र में शिवलिंग को आपने रख रखा है , उसे रोज मिट्टी से मांझे और फिर शुद्ध जल से धोये | पात्र का पानी आप अशोक के पेड़ की जड़ में डाल दे |

शिवलिंग की जलधारी दिशा — यह विशेष ध्यान रखे की शिवलिंग की जलधारी की दिशा हमेशा उत्तर की तरफ होनी चाहिए |

धातु का शिवलिंग –

यदि शिवलिंग धातु का है तो ध्यान रखे उसी धातु का नाग भी शिवलिंग पर लिपटा हुआ होना चाहिए |

शिवलिंग के पास मूर्ति या फोटो  –घर के मंदिर में शिवलिंग को अकेले ना रखे | उनके पास माँ पार्वती की फोटो या मूर्ति स्थापित करे | श्री गणेश भी करीब रखे तो बहुत शुभ फलदायी होगा |

शिवलिंग को रखे जलधारा के नीचे — यदि आपने शिवलिंग को घर पर रखा है तो ध्यान रहे की शिवलिंग पर सदैव जलधारा बरकरार रहे अन्यथा वह नकरात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।

कौन सी मूर्ति हो शिवलिंग के समीप —

शिवलिंग  के समीप सदैव गोरी व गणेश की मूर्ति होनी चाहिए. शिवलिंग कभी भी अकेले नहीं होना चाहिए ।

जानिए क्यों हैं निषेध शिवलिंग को घर पर रखना???

दरअसल भगवान शिव की उपासना का प्रतीक ‘शिवलिंग’ अपार ऊर्जा का प्रतीक है. इसलिए इसका शीतल रहना सकारात्मक ऊर्जा के लिए परमावश्यक है. मंदिर में स्थापित शिवलिंग पर लगातार या तो आने वाले भक्तगण जल चढातें रहतें हैं या फिर शिवलिंग के ऊपर एक जल से भरा कलश लटकाकर शिवलिंग पर निरंतर जल चढ़ाया जाता है. शिवलिंग से लगातार ऊर्जा निकलती रहती है, जो आसपास का वातावरण सकारात्मक और शुभ रखती है. लेकिन इस अपार ऊर्जा को मंदिर में तो पर्याप्त स्थान और पर्याप्त जल मिलता रहता है, लेकिन घर में स्थापित शिवलिंग पर निरंतर जलाभिषेक करना संभव नहीं हो पाता और ना ही शिवलिंग की पूजा-अर्चना से सम्बंधित अन्य नियमों का यथोचित पालन करना आसान होता है।

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परेशानियों का कारण बन सकती हैं शिवलिंग से निकलने वाली ऊर्जा —

घर पर स्थापित शिवलिंग से इतनी ज्यादा ऊर्जा उत्सर्जित होती है कि ये घर में कई परेशानियों का सबब बन सकती है, जिससे सिरदर्द, मानसिक तनाव, शारीरिक व्याधियां और क्रोध आदि मुश्किलें आ सकती हैं। ये अति ऊर्जा खासतौर से घर की महिलाओं को नुक़सान पहुंचाती है, जिससे उनमें तनाव , अनेक तरह के स्त्री रोग उत्पन्न हो सकते हैं और घर में वाद विवाद की स्थितियां खड़ी हो सकती हैं. ऊर्जा अपनेआप में एक ज्वाला की भांति होती है, जिसकी अति किसी भी अन्य चीज की अति की ही तरह नुकसानदेह होती है।

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शिवलिंग को कभी न रखें बंद कमरे या अंधेरे स्थान में-

शिवलिंग को कभी भी अंधेरे स्थान या बंद कमरे में नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से शिवलिंग नकारात्मक ऊर्जा उत्सर्जित करने लगता है, जिसके परिणाम भयावह हो सकते हैं। इन्हीं सब बातों के कारण, ऊर्जा के साक्षात स्वरुप शिवलिंग को घर में नहीं रखना चाहिए। शिवलिंग को पर्याप्त स्थान और निरंतर जलाभिषेक की जरुरत होती है, जो केवल मंदिर में ही संभव है। इसके साथ ही मंदिर आने वाले हर भक्त को भी शिवलिंग से ऊर्जा मिलती है। ऐसे में ऊर्जा के इस स्रोत्र का मंदिर में होना ही सबसे अच्छा है।

शिव पूजा में रखें इन बातों का विशेष ध्यान–(शिवलिंग की स्थापना के नियम)-

– शिवलिंग की पूजा शिव पूजा में सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है।

– शिवलिंग घर में अलग और मंदिर में अलग तरीके से स्थापित होता है।

– शिवलिंग की वेदी का मुख उत्तर दिशा की तरफ ही होना चाहिए।

– घर में स्थापित शिवलिंग बहुत ज्यादा बड़ा नहीं होना चाहिए।

– घर में स्थापित शिवलिंग अधिक से अधिक 6 इंच का होना चाहिए।

– मंदिर में कितना भी बड़ा शिवलिंग स्थापित कर सकते हैं।

– विशेष मनोकामनाओं के लिए पार्थिव शिवलिंग स्थापित कर पूजन किया जाता है।