जानें क्या होता है राजयोग, जानिए आपकी जन्म कुंडली के अनुसार कौन सा योग होगा ज्यादा प्रभावी

लेकिन हर एक राजयोग एक जैसा फल नहीं देता। जरूरी नहीं राजयोग बना है तो उसके कारण बहुत अच्छी सफलता मिलेगी। हो सकता है राजयोग कमजोर या सामान्य स्थिति में हो तब ऐसे राजयोग के प्रभाव से सामान्य अच्छा जीवन बीतेगा बहुत बढ़िया स्थिति नहीं होगी।

Written by पंडित दयानन्द शास्त्री June 25, 2019 2:40 pm

जन्म कुंडली के जब भी केंद्र और त्रिकोण के स्वामी सम्बन्ध बनाते है तब वह राजयोग होता है राजयोग का मतलब होता है, धन, ऐश्वर्य, सुख-सुविधाओं के अच्छे साधन और कार्यक्षेत्र की अच्छी स्थिति मतलब एक राजा की तरह ऐशो आराम का जीवन।

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लेकिन हर एक राजयोग एक जैसा फल नहीं देता। जरूरी नहीं राजयोग बना है तो उसके कारण बहुत अच्छी सफलता मिलेगी। हो सकता है राजयोग कमजोर या सामान्य स्थिति में हो तब ऐसे राजयोग के प्रभाव से सामान्य अच्छा जीवन बीतेगा बहुत बढ़िया स्थिति नहीं होगी लेकिन बहुत बढ़िया स्थिति भी जातक की हर तरह से होती है वह भी राजयोग के प्रभाव से होती या ग्रहों की स्थिति कुंडली में सही जगह पर सही स्थिति में होना अच्छा राजयोग देती है।।

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अब बात करते है कुंडली में केंद्र त्रिकोण के सम्बन्ध से बनने वाले राज्योगों में कौन और कैसे कितना प्रभावी राजयोग होता है?

जब केवल एक #केंद्र और एक #त्रिकोण का स्वामी आपस में सम्बन्ध बनाए तब यह सामान्य सा राजयोग होगा( जैसे:- दशवे भाव और पाचवे भाव के स्वामी का आपस में युति/दृष्टि/राशि परिवर्तन सम्बन्ध हो तब यह सामान्य स्तर का राजयोग है जो सामान्य अच्छे स्तर के फल देगा। #दूसरी स्थिति में अब यदि दो केंद्र के स्वामी और एक त्रिकोण का स्वामी आपस में सम्बन्ध बनाए तो यह सामान्य से ज्यादा उच्च स्तर का राजयोग होगा जिसके फल बहुत बढ़िया होंगे(जैसे:- दशवे भाव(केंद्र), सातवे भाव(केंद्र)और नवे भाव(त्रिकोण) के स्वामियों का आपस में सम्बन्ध, क्योंकि यहाँ दो केंद्र के स्वामी साथ आ गए और एक त्रिकोण का स्वामी साथ है जिससे राजयोग का स्तर उच्च हो गया जिसके फल बहुत शानदार होंगे अब ऐसे ही दो त्रिकोण के स्वामी और एक केंद्र का स्वामी साथ हो तब भी यही दमदार स्थिति राजयोग की होगी जैसे 5वे, 9वे और 10वे भाव या किसी भी अन्य केंद्र 1, 4, 7 भाव का स्वामी 5वे+9वे भाव के स्वामी के साथ सम्बन्ध बनाये हो तब यह भी उच्च स्तर का शक्तिशाली राजयोग होगा जो बहुत अच्छा फल जातक को देगा।

urya ke Saath Teen Grahon ki Yuti ke Parinaam or Fal

हालांकि, इन राजयोग में किस भाव का स्वामी है इसका अलग-अलग प्रभाव होगा जैसे चोथे भाव का 5वे+9वे भाव के स्वामियों के साथ होना अलग तरह का राजयोग देगा और चोथे भाव की जगह दसवे भाव का स्वामी 5+9वे भाव के साथ हो तो इसका प्रभाव ज्यादा अच्छा राजयोग देगा। इसके आलावा दोनों ही त्रिकोण के स्वामी और कम से कम दो केंद्र के स्वामी या तीन केंद्र के स्वामी दो त्रिकोण के स्वामियों के साथ सम्बन्ध बनाते हो तब बहुत उच्च स्तर का शक्तिशाली राजयोग होगा जो बहुत कामयाबी, उन्नति आदि राजयोग संबंधी शुभ फल देगा।कहने का मतलब है जितने ज्यादा से ज्यादा केंद्र और त्रिकोण के स्वामी एक साथ इकठ्ठे होकर आपस में सम्बन्ध बनाएंगे उतना ही शक्तिशाली उच्च स्तरीय राजयोग भोगने को मिलेंगे और केवल एक केंद्र और एक त्रिकोण के स्वामियों के बीच सम्बन्ध हो तब यह बहुत सामान्य सा राजयोग होगा इसके आलावा केवल एक केंद्र का स्वामी और एक त्रिकोण का स्वामी ही सम्बन्ध बनाता हो लेकिन यह सम्बन्ध हर एक केंद्र और हर एक त्रिकोण के स्वामी के बीच हो तब कुंडली हर तरह से राजयोग कारक होगी और शुभ फल देगी #जैसे:- सप्तम भाव और नवम भाव के स्वामी का सम्बन्ध बनता हो, पंचम और दशम भाव के स्वामी का सम्बन्ध बनता हो या लग्न के स्वामी का सम्बन्ध 5वे या 9वे के स्वामी से होता हो, चोथे भाव के स्वामी का संबंध 5वे भाव के स्वामी से बनता हो तो इस तरह से हर एक केंद्र और हर एक त्रिकोण का स्वामी सम्बन्ध बनाया होगा जो कि राजयोग के लिए शुभ फल कारक है।

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जैसे:- कन्या लग्न की कुंडली हो उसमे लग्न(केंद्र-त्रिकोण) और दशम(केंद्र) का स्वामी बुध पंचम भाव(त्रिकोण) के स्वामी शनि से सम्बन्ध बनाया हो तो 5और 10भाव के बीच सम्बन्ध हो गया आगे सातवे भाव(केंद्र) और चौथे भाव (केंद्र)का स्वामी गुरु या तो शनि से सम्बन्ध बनाये या नवे भाव के स्वामी शुक्र से सम्बन्ध बनाया हो क्योंकि गुरु यहाँ 4 और 7दो केन्द्रों का स्वामी है और शनि और शुक्र त्रिकोण 5वें भाव और 9वें भाव के स्वामी है तब कुंडली में हर एक केंद्र और त्रिकोण का स्वामी राजयोग बनाया होगा जो कि पूरी कुंडली राजयोग कारक होकर बलवान हो जायेगी। इस तरह से कुंडली में ग्रह राजयोग बनाते है और जिन जातकों की कुंडली में जिस तरह के स्तर का राजयोग बन होता है उसी स्तर के राजयोग कारक फल जातक को मिलते है, ऐसे जातक अपने राजयोग के स्तर के अनुसार सुख-सुविधाओं के साधन, सफलता, धन, तरक्की आदि को पाते है।