जानें और समझें नए व्यापार को शुरू करने का पर्व ‘लाभ पंचमी’ क्यों हैं ?

हमारे देश भारत में गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां पर दिवाली का पर्व 5 दिनों का नहीं बल्कि कार्तिक शुक्ल पंचमी तक चलता है। यहां पर धनतेरस से दिवाली की शुरूआत होता है और लाभ पंचमी के दिन दिवाली का पर्व समाप्त होता है।

Written by: October 31, 2019 10:47 am

हमारे देश भारत में गुजरात एक ऐसा राज्य है जहां पर दिवाली का पर्व 5 दिनों का नहीं बल्कि कार्तिक शुक्ल पंचमी तक चलता है। यहां पर धनतेरस से दिवाली की शुरूआत होता है और लाभ पंचमी के दिन दिवाली का पर्व समाप्त होता है। गुजरात में लाभ पंचमी का अपना ही एक अलग महत्व है। इस पंचमी को गुजराती लोग बड़े धूमधाम से मनाते हैं।

diwali puja

इस वर्ष 27 अक्टूबर 2019 को पूरे भारतवर्ष में दिवाली का पर्व मनाया जाचूका  है। वहीं गुजरात राज्य ऐसा है जहां पर कार्तिक शुक्ल पंचमी यानि लाभ पंचमी का पर्व इस बार (शुक्रवार) 1 नवंबर 2019 को धूमधाम के साथ मनाया जाएगा। यह त्योहार पूरे गुजरात में बेहद धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह दिन व्यापारियों और व्यवसायियों के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस पचंमी को लाभ पंचमी, सौभाग्य पंचमी, ज्ञान पंचमी और लाखेनी पंचमी के तौर पर मनाया जाता है। इस त्योहार पर भगवान गणेश के पूजन से विघ्नों का नाश होता है और शिव-पार्वती के पूजन से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की भी पूजा की जाती है।

यह रहेगा लाभ पंचमी शुभ मुहूर्त

लाभ पचंमी शुभ मुहुर्त 1 नवंबर 2019

पूजा मुहूर्त 06:33 से 10:14 बजे तक

पंचमी तिथि प्रारंभ 01:01 बजे से (1 नवंबर 2019)

पंचमी तिथि समाप्त 00:15 बजे तक (2 नवंबर 2019)

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लाभ पंचमी को सौभाग्य (लाभ) पंचम भी कहते है, जो मुख्यतः गुजरात में मनाई जाती है। ये दीवाली त्यौहार का आखिरी दिन होता है, जो पंचमी के दिन मनाते है। सौभाग्य का मतलब होता है अच्छा भाग्य और लाभ का मतलब अच्छा फायदा। इसलिए इस दिन को भाग्य और अच्छा लाभ का दिन माना जाता है। गुजरात में लाभ पंचमी के दिन दिवाली उत्सव का समापन होता है, और इस दिन को अत्यधिक शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि लाभ पंचमी के दिन पूजा करने से जीवन, व्यवसाय और परिवार में लाभ, अच्छा भाग्य, उन्नति आती है। गुजरात में सभी व्यवसायी दिवाली के बाद त्यौहार मनाकर इसी दिन वापस अपने काम को शुरू करते है। लाभ पंचमी गुजरात न्यू इयर के हिसाब से पहला कामकाजी दिन होता है।

इस वर्ष 1 नवम्बर 2019 को यह पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।

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गुजरात के लोग अत्यधिक धन और समृद्धि के लिए पूर्ण उत्साह के साथ देवी लक्ष्मी और भगवान गणेशजी की पूजा और प्रार्थना करते हैं। लाभ पंचमी की पूर्व संध्या पर, लोग अपने व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और दुकानों को खोलते हैं। गुजरात के क्षेत्रों में, इसे आधिकारिक तौर पर गुजराती नव वर्ष का पहला दिन माना जाता है।

हिंदू ग्रंथों के अनुसार, लाभ को परिभाषित किया गया हैः

“लाभस्तेषां जयस्तेषां कुतस्तेषां पराजयः

यशेम इंदेवरा श्याम हुरुदयम थौ जनार्दन”।।

लाभ पंचमी के अनुष्ठान क्या हैं?

लाभ पंचमी के दिन, लोग शारदा पूजा भी करते हैं यदि वे दीवाली के समय इसे भूल गये थे।व्यापारिक समुदाय से जुड़े सभी लोग, इस विशेष दिन अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों और दुकानों को खोलते हैं और नए बही-खातों की पूजा करते हैं।व्यवसायिक लोग इस दिन देवी लक्ष्मी और भगवान गणेशजी से प्रार्थनाऐं और पूजा करते हैं ताकि वे आने वाले वर्ष के लिए सफलता का आशीर्वाद पा सकें।

रिश्तेदार और मित्र एक दूसरे के साथ ‘मीठे रिश्तों’ के प्रतीक के रूप में मिठाई और उपहार के साथ शुभकामनाऐं देते हैं।कुछ विशिष्ट संस्कृतियों में, लोग अपने ज्ञान और बुद्धिमता को बढ़ाने के लिए अपनी किताबों की पूजा करते हैं।लोगों को इस शुभ दिन पर जरूरतमंद और गरीब लोगों को पैसे, कपड़े, भोजन और अन्य आवश्यक चीजें दान करनी चाहिए।

लाभ पंचमी के दिन किसी नए व्यवसाय के काम को शुरू करना बहुत शुभ मानते है। गुजरात में इस त्यौहार का बहुत महत्व है, वहां इसको बड़ी धूमधाम से मनाते है। इस दिन से वहां व्यवसायी लोग नया बहीखाता शुरू करते है, वहां इसे खातु कहते है। इसमें सबसे पहले कुमकुम से बायीं तरफ शुभ और दाहिने तरफ लाभ लिखते है। इसके बीच में साथिया बनाते है। इस दिन हिन्दू लक्ष्मी की पूजा करते है। जैन समुदाय ज्ञानवर्धक पुस्तक की पूजा करते है, साथ ही और अधिक बुद्धि ज्ञान के लिए प्राथना करते है।

इस तरह मनाएं लाभ पंचमी का पर्व 

दिवाली के दिन जो लोग शारदा पूजन नहीं कर पाते है, वे अपनी दुकाने, व्यवसायी संस्थान खोलकर पूजन करते है।

इस दिन लोग लक्ष्मी एवं गणेश पूजन करके भी सुख समृधि, ऐश्वर्य की प्राथना करते है।

लाभ पंचमी के दिन रिश्तेदार, मित्रगण एक दुसरे के घर जाते है, और मिठाई, उपहार का आदान-प्रदान करते है। कहते है ऐसा करने से रिश्तों में और मिठास आती है।

भारत के कुछ क्षेत्र में लाभ पंचमी के दिन लोग विद्या की पूजा करते है, और बुद्धि, ज्ञान के लिए प्राथना करते है।

लाभ पंचमी के दिन लोग कपड़े, मिठाई, पैसे और अन्य जरुरी समान को जरुरी लोगों में बांटते है।

लाभ पंचमी के दिन लोग एक दुसरे को आने वाले समय में अच्छे लाभ के लिए बधाई देते है। वैसे बड़े – बड़े शास्त्रों और साधू लोगों के अनुसार मानव जीवन को प्राप्त करना ही सबसे बड़ा लाभ है, इस बात को याद रखते हुए मनुष्य को सांसारिक बातों के पीछे न भागते हुए, आत्मिक बातों की ओर ध्यान लगाना चाहिए और सच्चे पिता परमेश्वर और उनके प्रेम की खोज में लगे रहना चाहिए।

भारत के अन्य हिस्सों में दिवाली का त्यौहार भाई दूज के साथ ख़त्म हो जाता है। मध्य भारत, उत्तर भारत में ये पांच दिनों का त्यौहार होता है, जहाँ धनतेरस, नरक चौदस, दीपावली, अन्नकूट, भाई दूज का त्यौहार मनाते है। गुजरात में ये त्यौहार धनतेरस से शुरू होकर लाभ पंचमी में समाप्त होता है। दिवाली के बाद दुसरे दिन गुजरात में लोग पिकनिक में चले जाते है, वहां फॅमिली पिकनिक होती है, जो एक दिन की या 2-3 दिन की होती है। लाभ पंचमी के दिन ये सब लौटकर अपने कामकाज में जुट जाते है, और नए तरीके से काम शुरुवात करते है।

जानिए लाभ पंचमी का महत्व

लाभ पंचमी के दिन किसी भी नए व्यापार या नए उद्यम की शुरूआत की जा सकती है। गुजरात में इस पंचमी को बहुत ही खास तरह से मनाए जाने का प्रचलन है। इस दिन व्यापारी वर्ग के लोग नए बहीखाता की शुरूआत करते हैं, जिसे खातु कहते हैं। इस दिन बहीखाते का पूजन किया जाता है इसके लिए सबसे पहले कुमकुम से बायीं तरफ शुभ और दाहिनी ओर लाभ लिखते हैं और बीच में स्वास्तिक बनाते हैं। इस दिन धन की देवी लक्ष्मी की पूजा का प्रावधान है। वहीं जैन धर्म के लोग इस दिन ज्ञानवर्धक पुस्तक की पूजा करते हैं और इसे ज्ञान पंचमी कहते हैं। सुख-समृद्धि औऱ मंगलकामना के लिए सौभाग्य पंचमी का व्रत रखा जाता है। लाभ पंचमी के दिन भगवान गणपति की मनमोहक झांकी मंदिरों में सजाई जाती है, जिसे देखने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है। रात को भजन संध्या का आयोजन किया जाता है।

 इस तरह करें लाभ पंचमी का पूजन (जानिए विधि)

सौभाग्य पंचमी के दिन प्रातकाल स्नानादि और दैनिक क्रियाओं से निवृत्त होकर सूर्य को अर्घ्य देना चाहिए। तत्पश्चात् शुभ मुहूर्त में भगवान गणेश और शिव की प्रतिमाओं को स्थापित करना चाहिए। यदि संभव हो सके तो गणपति को सुपारी पर मौली लेपटकर चावल के अष्टदल पर विराजित करना चाहिए। भगवान गणेश का पूजन चंदन, सिंदूर, अक्षत, फूल और दुर्वा से करना चाहिए और भगवान शिव का पूजन भस्म, बिल्वपत्र, धतूरा और सफेद वस्त्र अर्पित कर करना चाहिए। इसके बाद गणेश जी को मोदक और भगवान भोलेनाथ को सफेद दूध की मिठाई से भोग लगाना चाहिए। इसके पश्चात् निम्न मंत्रों से श्री गणेश व शिव का स्मरण व जाप करना चाहिए।

गणेश मंत्र – लम्बोदरं महाकायं गजवक्त्रं चतुर्भुजम्। आवाहयाम्यहं देवं गणेशं सिद्धिदायकम्।।

शिव मंत्र – त्रिनेत्राय नमस्तुभ्यं उमादेहार्धधारिणे। त्रिशूलधारिणे तुभ्यं भूतानां पतये नम:।।

तत्पश्चात् मंत्रोच्चार करने के बाद घर के दरवाजे के दोनों ओर स्वास्तिक का निर्माण करना चाहिए।

ऐसे मनाएं लाभ पंचमी को 

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जो लोग दिवाली के दिन शारदा पूजन नहीं करते हैं वह लाभ पंचमी के दिन दुकानों और संस्थानों में सरस्वती पूजन कर सकते हैं।

इस दिन भगवान गणेश और शिव के अलावा धन की देवी लक्ष्मी का पूजन करने का विधान है क्योंकि इनकी पूजा-अर्चना करने से घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

लाभ पंचमी के दिन गुजरात में लोग अपने परिजनों और रिश्तेदारों के घर मिठाई लेकर जाते हैं ताकि उनके रिश्तों में मिठास बनी रहे।

गुजरात में दिवाली पर्व पर लोग लंबी छुट्टियों पर निकल जाते हैं क्योंकि उत्तर भारत में दिवाली का पर्व 5 दिनों का होता है लेकिन गुजरात में ये त्योहार धनतेरस से शुरू होकर लाभ पंचमी के दिन खत्म होता है।

लाभ पंचमी को गुजरात नववर्ष के हिसाब से पहला कामकाजी दिन माना जाता है।