ज्योतिष

मां भगवती सिद्धीदात्री को हर रोज भगवती का ध्यान करते हुए पीले पुष्प अर्पित करें। मोती चूर के लड्डूओं का भोग लगाएं ओर श्री विग्रह के सामने घी का दीपक जलाएं।

9 दिन की नवरात्रि में इस वर्ष दो सोमवार आ रहे हैं। यह अत्यंत शुभ संयोग है क्योंकि सोमवार को दुर्गा पूजा का हजार, लाख गुना नहीं बल्कि करोड़ गुना फल मिलता है। चूंकि सोमवार का स्वामी चन्द्रमा है।

हिन्दू धर्म में दीपक की बड़ी महत्ता है । अन्धकार को दूर कर प्रकाश लाने वाले दीपक के बारे में नियम ये है कि इसे कभी भी स्वयं से नहीं बुझाना चाहिए। ध्यान रखें, जलते हुए दीपक से कभी अगरबत्ती या धूपबत्ती नहीं जलानी चाहिए।

इस वर्ष, नवरात्रि 29 सितंबर से शुरू हो रही है. यह नौ दिनों का त्योहार है, जो हिंदू धर्म और संस्कृति में बहुत महत्व रखता है. यह सबसे प्राचीन त्योहारों में से एक है क्योंकि यह भगवान राम की जीत का जश्न मनाता है

रात में भगवान के निकट जागरण करें। इसके पश्चात द्वादशी के दिन प्रात:काल होने पर भगवान का पूजन करके ब्राह्मणों को भोजन कराएं।

श्राद्ध में खीर बनाने के पीछे एक वजह ये है कि चावल को धर्म ग्रंथों में हविष्य अन्न कहा गया है यानी देवताओं का अन्न, जिसे अग्नि को अर्पित करने पर देवताओं सहित पितर भी तृप्त होते हैं।

दक्षिण दिशा की ओर मुंह करके प्रार्थना करें, नित्य स्नान के बाद प्रार्थना करें, हे पितृ देवता मुझे क्षमा करें ऐसा करने से आपको बहुत लाभ मिलेगा

सीता ने तीनों गवाहों द्वारा झूठ बोलने पर उनको क्रोधित होकर श्राप दिया की फल्गु नदी जा तू सिर्फ नाम की रहेगी, तुझमें पानी नहीं रहेगा इसलिए फल्गु नदी गया में आज भी सुखी ही रहती है। गाय को कहा तू पूज्य होकर भी लोगों का झूठा खाएगी और केतकी के फूलों को श्राप दिया कि तुझे पूजा में कभी चढ़ाया नही जाएगा।

भारतीय धर्मशास्त्रों के अनुसार जब सूर्य कन्या राशि में आते तब परलोक से पितृ अपने स्वजनों के पास आ जाते हैं। देवतुल्य स्थिति में तीन पीढ़ी के पूर्वज गिने जाते हैं। पिता को वसु के समान, रुद्र दादा के समान और परदादा आदित्य के समान माने गए हैं।