ज्योतिष

शास्‍त्रों में कहा गया है कि शत्रुओं और नकारात्मक शक्तियों का नाश भैरवाष्टमी के दिन व्रत और पूजा-अर्चना करने से होता है। मान्यताओं के अनुसार,सभी तरह के पाप इस दिन भैरव बाबा की विशेष पूजा अर्चना करने से धूल जाते हैं। श्री कालभैरव जी के दर्शन और पूजा इस तिथि पर करने से शुभ फल मिलता है।

जब मंगलवार को अमावस्या हो तब खगर्ता संगम पर देवता पूजित हैं..उस दिन यहाँ दर्शन और पूजा-स्नान से वाराणसी,प्रयाग, गयाजी और करुक्षेत्र में एवं पुष्कर में स्नान-पूजन का जो पुण्य मिलता हैं उससे भी अधिक पुण्य फल यहाँ पूजन और दर्शन से प्राप्त होगा..

अगर आपके काम में बार-बार कोई बाधाएं आ जाती है तो अनार की लकड़ी को प्रयोग करें। महीने में एक बार राहु के स्वाति नक्षत्र में अनार की लकड़ी तोड़कर घर लाएं।

चाहे आपको ज्योतिष का ज्ञान हो या न हो, अपने भाग्य की स्थिति का ज्ञान तो हर व्यक्ति को होता है। अब यदि दुर्भाग्य पीछा न छोड़ रहा हो तो क्या ऐसा करें कि दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाए।

जब पूर्णत: अंधेरा छाये तो इसका तात्पर्य है कि चंद्रमा ने सूर्य को पूर्ण रूप से ढ़क लिया है इस अवस्था को पूर्ण सूर्यग्रहण कहा जायेगा।

पद्म पुराण में श्री भीष्म पंचक व्रत की महिमा का वर्णन इस प्रकार से है। भीष्म पंचक व्रत में चार द्वार वाला एक मंडप बनाया जाता है। मंडप को गाय के गोबर से लीप कर मध्य में एक वेदी का निर्माण किया जाता है।

देवउठनी एकादशी का दिन भी विशेष रूप से विवाह के लिये मंगलकारी है। इस दिन चतुर्मास के बाद भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं इसलिये यह तिथि अबूझ मुहूर्त मानी जाती है।

छठ पर्व पर पहला अर्घ्य डूबते सूर्य को दिया जाता है। इस समय जल में दूध डालकर सूर्य की अंतिम किरण को अर्घ्य दिया जाता है। इससे भगवान शिव और सूर्यनारायण की कृपा से उत्तम संतान का महावरदान मिलता है।

छठ पर्व और सूर्य देव की पूजा का उल्लेख भारत के दोनों महाकाव्यों महाभारत और रामायण में है।