ज्योतिष

वैदिक ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य, रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है तबसे नौतपा प्रारंभ होता है। नौतपा के इन नौ दिन तक सूर्य से तीव्र ऊर्जा निकलती है, जिससे गर्मी का प्रकोप बढ़ता है। इस बार 24 मई की रात्रि 2 बजकर 32 मिनट पर सूर्य जो है वह रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश कर रहा है। नौतपा की शुरुआत भले ही 24 मई 2020 की रात से हो जाएगी, लेकिन सूर्य की तपन का प्रभाव 25 मई 2020 से माना जाएगा।

राहु के फैलाये हुए जाल से भारत बाहर निकलेगा। राहु मायाजाल है, प्रभावी गृह(छाया) है और अब तक अपने स्व नक्षत्र आर्द्रा में था तो उसकी यह ताकत बढ़ी हुई थी। पण्डित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया की विगत 22 अप्रैल 2020 की सुबह 8 बज कर 51 मिनट पर स्पष्ट राहु आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा में आ गए थे, इसी क्रम में कल, 20 मई 2020 की दोपहर बाद 3 बजकर 25 मिनट पर मध्यम राहु भी आर्द्रा अक्षत्र को छोड़ कर मृगशिरा नक्षत्र में आ गए हैं। कोरोना पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

पंडित दयानन्द शास्त्री जी ने बताया कि वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति एक अच्छा जीवन जीता है तो उसको जीवन में तीन बार शनि की दशा से गुजरना पड़ता है। पहली बार शनि व्यक्ति के साथ खेलता है, दूसरी बार उसकी जिन्दगी में भूचाल लाता है, और तीसरी बार उसके सारे धन-दौलत को नष्ट कर देता है। यही कारण है कि लोग शनि को शांत रखने का प्रयास करते रहते हैं।

ज्येष्ठ मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को 'अपरा एकादशी' कहा जाता है। इसका व्रत रखने से जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है। इस बार यह एकादशी आज 18 मई 2020 को मनाई जा रही है। पुराणों के अनुसार माना जाता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से कई पापों का नाश होता है। इसका व्रत सुहागिनों के लिए सौभाग्य लेकर आता है। 

शनिवार का दिन शनि देव के नाम है। साथ ही आज ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष की उदया तिथि नवमी भी है। आज सुबह 10 बजकर 23 मिनट तक ही नवमी तिथि रहेगी। उसके बाद दशमी तिथि लग जायेगी।

वैशाख महीने की पूर्णिमा को बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार बुद्ध पूर्णिमा हर साल अप्रैल या मई महीने में आती है। इस बार बुद्ध पूर्णिमा आज यानि  7 मई को है। हिन्‍दू धर्म में बुद्ध पूर्णिमा का विशेष महत्‍व है।

नरसिंह जयंती, भगवान नरसिंह जी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, भगवान नरसिंह जी का अवतरण वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन हुआ था।

11 मई, 2020 को शनिदेव अपनी मार्गी चाल को छोड़ कर वक्री होने जा रहे हैं। 142 दिनों तक यानि 29 सितंबर तक वे इसी अवस्था में रहेंगे तत्पश्चात वे फिर से मार्गी हो जाएंगे।

सनातन धर्म की परंपरा के मुताबिक, पूर्वजों को मोक्ष दिलाने के लिए प्रसिद्ध मोक्षस्थली गया में इन दिनों पिंडदान के बाद सुफल देने वाले गयापाल पंडा ही पिंडदान कर यहां की पुरानी परंपरा निभा रहे हैं।