ज्योतिष

शास्त्रानुसार कुज या मंगल दोष दाम्पत्य जीवन के लिए विशेष रुप से अनिष्टकारी माना गया है। अगर कन्या की जन्म-कुण्डली में मंगल ग्रह लग्न, चन्द्र अथवा शुक्र से 1, 2, 12, 4, 7 आठवें भाव में विराजमान हो, तो वर की आयु को खतरा होता है।

विवाह संस्कार भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण संस्कार है। यह मनुष्य को परमात्मा का एक वरदान है। कहते हैं, जोड़ियां परमात्मा द्वारा पहले से ही तय होती हैं। पूर्व जन्म में किए गए पाप एवं पुण्य कर्मों के अनुसार ही जीवन साथी मिलता है और उन्हीं के अनुरूप वैवाहिक जीवन दुखमय या सुखमय होता है।

अंतिम रूप से विवाह का बिल्कुल न होना या विवाह का देर से होना इस पर निर्भर है कि उपरोक्त ग्रहों के बलाबल कैसे हैं। यदि सप्तमेश नीचस्तंगत, शत्रु गृही या शत्रु ग्रहों से दृष्ट हो तो ऐसे में विवाह तो होगा लेकिन विवाह की परिस्थितियां कठिनाई वाली होती हैं। सप्तमेश या सप्तम भाव स्थित ग्रह यदि पीड़ित हो विवाह में विलंब होना स्वाभाविक है। किंतु ये नहीं कहा जा सकता कि विवाह होगा ही नहीं।

पीड़ित व्यक्ति को लाल रंग का बैल दान करना चाहिए। लाल रंग का वस्त्र, सोना, तांबा, मसूर दाल, बताशा, मीठी रोटी का दान देना चाहिए। मंगल से सम्बन्धित रत्न दान देने से भी पीड़ित मंगल के दुष्प्रभाव में कमी आती है।

दान- चन्द्रमा के नीच अथवा मंद होने पर शंख का दान करना उत्तम होता है। इसके अलावा सफेद वस्त्र, चांदी, चावल, भात एवं दूध का दान भी पीड़ित चन्द्रमा वाले व्यक्ति के लिए लाभदायक होता है। जल दान अर्थात प्यासे व्यक्ति को पानी पिलाना से भी चन्द्रमा की विपरीत दशा में सुधार होता है।

बसंत पंचमी का दिन ज्ञान की देवी मां सरस्वती को समर्पित है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा का विधान है। सरस्वती मां को ज्ञान, कला और संगीत की देवी कहा जाता है।

दान के विषय में शास्त्र कहता है कि दान का फल उत्तम तभी होता है जब यह शुभ समय में सुपात्र को दिया जाए। सूर्य से सम्बन्धित वस्तुओं का दान रविवार के दिन दोपहर में ४० से ५० वर्ष के व्यक्ति को देना चाहिए

वसंत को ऋतुओं यानी मौसमों का राजा कहा जाता है। इसे प्यार का मौसम भी कहते हैं, क्योंकि धरती इस मौसम में खूबसूरत फूलों का श्रंगार करती है। इस दिन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई उत्सव मनाने का भी रिवाज है। वसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा की जाती है और बच्चों की पढ़ाई का आरंभ भी किया जाता है।

सर्दी के महीनों के अंत होने के साथ ही और बसंत और फसल की शुरूआत होने के रूप में बसंत पचंमी का त्योहार मनाया जाता है। इस साल बसंत पचंमी का त्योहार 10 फरवरी को मनाया जाएगा।