भारत में नागों की पूजा करने का एक वैज्ञानिक कारण भी है, खेतों में फसलों को नुकसान पहुॅचानें वाले चूहे आदि जीवों का सर्प नष्‍ट कर देता है, जिससे किसानों की फसल सुरक्षित रहती है।

राहु के प्रभाव से उत्‍पन्‍न होने वाले दुर्योगों को ही नाग दोष कहा जाता है। जब कुंडली में राहु और केतु पहले घर में, चन्द्रमा के साथ या शुक्र के साथ विराजमान हों तो ऐसी स्थिति में नाग दोष बनता है।

सनातन हिन्दू धर्म में ज्योतिष को वेदों का छठा अंग माना गया है और किसी व्यक्ति की जन्म-कुण्डली देखकर आसानी से इस बात का पता लगाया जा सकता है कि वह व्याक्ति पितृ दोष से पीडित है या नहीं

प्रिय पाठकों/मित्रों,इस वर्ष नाग पंचमी पर्व 5 अगस्त 2019 (सोमवार) को, परंपरागत तरीके से पूरे उत्तर भारत में मनाया जाएगा। इस दिन विक्रम सम्वत 2076 के श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि, हस्त नक्षत्र ओर चंद्रमा कन्या राशि का रहेगा ।

लेकिन अगर राहु की युति वाले ग्रह से सम्बन्धित रिश्ते की और अगर तुम पूरी तरह समर्पित रहो, तो यही रिश्ते तुम्हारे लिये छाते का कार्य करते हैं, जिस तरह छाता हर बारिश और कडकती धूप से बचा लेता है, वैसे ही ये रिश्ते जातक को हर मुसीबत से बचा जाते हैं |

पश्चिम रेलवे की अहमदाबाद-दिल्ली लाइन पर मेहसाणा और आबूरोड स्टेशन के बीच सिद्धपुर रेलवे स्टेशन पड़ता है। यह मेहसाणा से लगभग 21 मील और आबूरोड से लगभग 19  मील की दूरी पर स्थित है। स्टेशन से लगभग एक मील की दूरी पर सरस्वती नदी के तट पर सिद्धपुर नगर है।

लेकिन हर एक राजयोग एक जैसा फल नहीं देता। जरूरी नहीं राजयोग बना है तो उसके कारण बहुत अच्छी सफलता मिलेगी। हो सकता है राजयोग कमजोर या सामान्य स्थिति में हो तब ऐसे राजयोग के प्रभाव से सामान्य अच्छा जीवन बीतेगा बहुत बढ़िया स्थिति नहीं होगी।

धन संबंधी परेशानियां दूर करने के लिए सप्ताह के हर गुरुवार को यह तांत्रिक उपाय करें। उपाय के अनुसार हर गुरुवार को आप पीले वस्त्र पहनें। खाने में पीले रंग की मिठाई खाएं। इसके साथ ही पीले रंग की वस्तु का दान करें। पीले रंग की वस्तु जैसे पीले रंग का कपड़ा, पीला फल आम, हल्दी आदि। इस उपाय से भी धन की कमी दूर होती है।

ज्योतिषाचार्य पण्डित दयानन्द शास्त्री जी बताते हैं कि यह ग्रहण उत्तराषाढ़ा नक्षत्र एवं धनु, मकर राशि पर अंतरीन नक्षत्र राशि वाले को ग्रहण दर्शन नहीं करना चाहिए।इन राशि वालों को ग्रहण को देखना नहीं चाहिए होगा।।

शनि जयंती को आक के पौधे पर 7 लोहे की कीलें चढ़ाएं। काले घोड़े की नाल या नाव की कील से बनी लोहे की अंगूठी मध्यमा उंगली में शनि जयंती को सूर्यस्त के समय पहनें।