हृदय नारायण दीक्षित

ऋग्वेद में अग्नि और आकाश के भी आत्मीय सम्बंध हैं। मनुष्य और अग्नि के मध्य भी आत्मीयता है। मनुष्य और पक्षियों के मध्य भी रागात्मक सम्बंध हैं।

जीवन दिक्काल में है। कभी-कभी काल का अतिक्रमण भी करता है जीवन, इसलिए जीवन की कालगणना सतही है। कालगणित के पैमाने पर कोई 100 वर्ष जीता है तो कोई 25 या 30 बरस। कीट पतंगे कम समय का जीवन पाते हैं। सर्प आदि की उम्र बहुत ज्यादा होती है। ऋग्वेद के पूर्वजों ने 100 शरद् जीवन की स्तुतियां की थी- जीवेम शरदं शतं। अनुवाद में गड़बड़ हुई। 100 शरद का अर्थ 100 वर्ष हो गया। शरद् में गहन आनंदबोध है।

ऋग्वेद के अनुसार ‘हम सब मृत्युबंधु हैं। क्षरणशील हैं। निस्संदेह व्यक्त हैं, व्यक्ति हैं लेकिन एक दिन मृत्यु अवश्यम्भावी है। ऋग्वेद (10.13.1) व यजुर्वेद (11.5) में एक साथ आए एक मंत्र में हम सब अमृतपुत्र हैं।

स्वयं को अस्तित्व में समर्पित करना गुरूता है। यहां सब ‘एक’ है। सब अद्वैत है। यही परम है। यही ओंकार है। समस्या यही है कि इसे कहें कैसे?

ऋग्वेद विश्व मानवता का प्रथम शब्द साक्ष्य है। यह दुनिया का सबसे प्राचीन काव्य संकलन है। अंतर्राष्ट्रीय संस्था यूनेस्को ने भी ऋग्वेद को प्राचीनतम अंतर्राष्ट्रीय धरोहर बताया है। ऋग्वेद के रचनाकाल में ‘लिपि’ नहीं थी। ऋषियों ने अपनी मनतरंग में गीत गाए। भारतीय परंपरा इन गीतों को मंत्र कहती है और गीतकार कवियों को ऋषि।

आयुर्वेद आयु का वेद है। प्राचीन चिकित्सा विज्ञान का उद्देश्य कारोबार या व्यापार नहीं था। मनुष्य को रोगरहित दीर्घजीवी बनाना ही आयुर्विज्ञान का लक्ष्य था। वैद्य समाजसेवी थे।

सत्याग्रह सत्य का आग्रह है। भारत में सत्य के तमाम पहलुओं पर विचार की प्राचीन परम्परा है। वैदिक दर्शन के अनुसार काल से अप्रभावित सत्ता सत्य है। इसके लिए सुंदर शब्द प्रयोग हुआ है त्रिकाल अबाधित। सत्य पर भूत, भविष्य और वर्तमान का प्रभाव नहीं पड़ता। यह परिभाषा दर्शन की है और श्रेय है। दैनिक जीवन में हम सबका सत्य प्रत्यक्ष सत्य है। प्रत्यक्ष का सामान्य अर्थ आंख के सामने होता है। इस शब्द में अक्ष का अर्थ आंख है। साक्षात्कार का अर्थ भी लगभग ऐसा ही है। इसमें आंख के सामने उपस्थित आकार की महत्ता है।

इसके लिए सुंदर शब्द प्रयोग हुआ है- त्रिकाल अबाधित। सत्य पर भूत भविष्य और वर्तमान का प्रभाव नहीं पड़ता। यह परिभाषा दर्शन की है और श्रेय है।

सभी प्राणी बोलते है। अनेक पक्षी साथ-साथ बोलें तो कलरव। बोली अच्छी लगे तो कहते हैं कि पक्षी गीत गा रहे हैं। कोयल को बहुधा गायक कहा जाता है। सही बात कोयल ही जानती होगी कि वह गा रही है या किसी परिस्थितिवश बड़बड़ा रही है। कौवे खूब बोलते हैं। हम उनके प्रवचन को ‘‘कांव कांव’’ कहते हैं। मेढक भी बोलते हैं।

भारत पाक के मध्य युद्ध की स्थिति है। पाकिस्तान की तरफ से मुसलसल युद्ध है। आमने सामने के युद्धों में वह हारता रहा है। भारतीय सेना ने उसे हर दफा पीटा है। पाकिस्तानी फौज व खुफिया एजेंसी आई0एस0आई0के संयोजन में यहां आतंकवादी भेजे जाते हैं। पाकिस्तान आतंकवादी ट्रेनिंग की खुली यूनिवर्सिटी है।