33 साल बाद थम गया मारुति सुजुकी की Gypsy का सफर, जानें क्यों थी सेना की पहली पसंद

मारुति सुजुकी ने भारत में जिप्सी के प्रोडक्शन को बंद कर दिया है। मारुति जिप्सी की लॉन्चिंग भारत में 1985 में हुई थी और अब करीब 33 सालों के प्रोडक्शन के बाद कंपनी ने आखिरकार इस ऑफ रोड कार को बनाना बंद कर दिया है।

Avatar Written by: March 7, 2019 11:03 am

नई दिल्ली। मारुति सुजुकी ने भारत में जिप्सी के प्रोडक्शन को बंद कर दिया है। मारुति जिप्सी की लॉन्चिंग भारत में 1985 में हुई थी और अब करीब 33 सालों के प्रोडक्शन के बाद कंपनी ने आखिरकार इस ऑफ रोड कार को बनाना बंद कर दिया है। Gypsy भारत में मारुति सुजुकी की सबसे पुरानी कारों में से एक है।

Gypsy, Maruti 800 और Omni van के बाद कंपनी की ओर से भारत में बिकने वाली तीसरी कार थी। अब कंपनी ने अपने डीलर्स को एक आधिकारिक स्टेटमेंट जारी कर जानकारी दी है कि Gypsy के सारे वेरिएंट्स के प्रोडक्शन को बंद कर दिया गया है। साथ ही कंपनी ने डीलर्स से ये भी कहा है कि इस SUV के लिए बुकिंग लेना बंद कर दें।

Maruti Gypsy को कंपनी के लाइनअप से हटाने की वजह आने वाले नियम हैं। इस साल अप्रैल और अक्टूबर के महीने में कुछ नए सुरक्षा संबंधित नियम आने जा रहे हैं। मारुति सुजुकी ने अपनी इस 80 के दशकों वाली एसयूवी में बहुत ही कम बदलाव किए थे। इस SUV का डिजाइन और ओवरऑल स्ट्रक्चर पिछले 33 सालों से एक जैसा ही बना हुआ है। ऐसे में नए सुरक्षा संबंधित नियमों के हिसाब से कंपनी को फिर से इस कार को डिजाइन करने की जरूरत पड़ेगी।Maruti Gypsyसाथ ही प्रोडक्शन की दर भी काफी घट गई थी। ऐसे में कंपनी द्वारा इस कार में इन्वेस्टमेंट किया जाना महंगा साबित हो सकता था। ऐसे में कंपनी ने अपनी इस SUV को पूरी तरह से बंद करने का निर्णय कर लिया। ये SUV सेना को भी काफी पसंद रही है। सेना की ओर से इस कार के लिए आखिरी ऑर्डर 2015 में किया गया था।
Maruti Gypsy

Maruti Gypsy की लॉन्चिंग सिंगल पेट्रोल इंजन ऑप्शन में की गई थी। इसे 1.0-लीटर फोर-सिलिंडर इंजन के साथ उतारा गया था। इस इंजन के साथ फोर-स्पीड ट्रांसमिशन का ऑप्शन दिया गया था। हालांकि बाद में इसे अपग्रेड कर बड़ा 1.3-लीटर इंजन उतारा गया था। इसके साथ 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स दिया गया था।

मारुति जिप्सी क्यों थी सेना की पहली पसंदMaruti Gypsy

आप जानकर हैरान हो जाएंगे कि कंपनी ने 31 हजार से ज्यादा मारुति जिप्सी सेना को दी है। भारतीय सेना ने जिप्सी सॉफ्ट टॉप वर्जन को सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया है, जिसका वजन मात्र 985 किलोग्राम है। इसके हार्ड टॉप वर्जन का वजन 1020 किलोग्राम है। जिप्सी का कम वजन इसे अग्रेसिव और मुश्किल रास्तों पर चलने के लिए आसान बनाता है।Maruti Gypsy

हल्की होने की वजह से जिप्सी को कम पावर वाले हेलिकॉप्टर या एयरक्राफ्ट की मदद से आसानी से ऊंचाई वाली जगहों पर पहुंचाया जा सकता है। कम वजन की वजह से दूसरी भारी एसयूवी की तुलना में जिप्सी के लिए बर्फीले और कीचड़ वाले रास्तों पर चलाना आसान होता है।Maruti Gypsy

कम वजन के बावजूद जिप्सी में 500 किलोग्राम तक का भार ढोने की क्षमता होती है। सेना को दूरदराज के इलाकों में आमतौर पर रोजाना हथियार और राशन लेकर आना-जाना होता है। जिप्सी की अपने वजन के आधे के बराबर भार ढो लेने की इस क्षमता की वजह से भी यह भारतीय सेना की पसंद बनती है।Maruti Gypsy

जिप्सी में 16-वॉल्व MPFI G13BB पेट्रोल इंजन है, जो 80 Bhp का पावर और 103 Nm टॉर्क जनरेट करता है। चूंकि सेना काफी कम टेंपरेचर में भी काम करती है, इसलिए डीजल की तुलना में पेट्रोल इंजन ज्यादा बेहतर होता है।