धारा 370 हटने से बौखलाए पाकिस्तान को होनेवाला है बड़ा नुकसान!

पाकिस्तान से भारत का आयात इस वर्ष मार्च में घट कर 28.4 करोड़ डालर के बराबर रहा जबकि मार्च 2018 में यह आंकड़ा 3.5 करोड़ डालर था।

Written by गंगेश ठाकुर August 8, 2019 3:48 pm

भारत ने जम्मू-कश्मीर में धारा 370 और 35A को खत्म कर दिया। इसके साथ ही लद्दाख को स्वतंत्र रूप से एक केंद्र शाषित प्रदेश का दर्जा दे दिया गया तो वहीं जम्मू-कश्मीर को एक अलग केंद्र शाषित प्रदेश बना दिया गया जिसके पास अपनी विधानसभा होगी। इसके साथ ही यहां अब राज्यपाल की जगह उपराज्यपाल होंगे। जबकि लद्दाख पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन होगा। यहां केंद्र सरकार का हस्तक्षेप होगा। जम्मू-कश्मीर की पुलिस अब उप राज्यपाल के अंदर आएगी। हालांकि संसद में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने इस बात का भी वादा किया कि हालात सामान्य होते ही जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दे दिया जाएगा। इस सब के बीच गृहमंत्री अमित शाह ने इस बात से भी संसद को अवगत कराया कि किस तरह धारा 370 की वजह से जम्मू-कश्मीर राज्य का विकास रूक गया था। ऐसे में उसे विकास की पटरी पर लाने के लिए इन धाराओं का हटना जरूरी था।

अब जानते हैं क्या है धारा 370 और क्यों यह जम्मू-कश्मीर के विकास के मार्ग में था बाधक

धारा 370 के प्रावधानों की माने तो संसद को जम्मू-कश्मीर के बारे में रक्षा, विदेश मामले और संचार के विषय में कानून बनाने का अधिकार था लेकिन किसी अन्य विषय से सम्बन्धित कानून को लागू करवाने के लिए केन्द्र को राज्य सरकार का अनुमोदन चाहिए था। इसे आप इस तरह समझ सकते हैं:

इसी विशेष दर्जे के कारण जम्मू-कश्मीर राज्य पर संविधान की धारा 356 लागू नहीं होती थी।
इस कारण राष्ट्रपति के पास राज्य के संविधान को बर्खास्‍त करने का अधिकार नहीं था।
जम्मू-कश्मीर के नागरिकों के पास दोहरी नागरिकता (भारत और कश्मीर) होती थी।
भारत की संसद जम्मू-कश्मीर के सम्बन्ध में अत्यन्त सीमित क्षेत्र में कानून बना सकती थी।
जम्मू-कश्मीर का राष्ट्रध्वज अलग था। वहां के नागरिकों द्वारा भारत के राष्ट्रीय ध्वज का सम्मान करना अनिवार्य नहीं था।
इसके तहत भारतीय नागरिक को विशेष अधिकार प्राप्त राज्यों के अलावा भारत में कहीं भी भूमि खरीदने का अधिकार था। यानी भारत के दूसरे राज्यों के लोग जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते थे।

jammu kashmir
भारतीय संविधान की धारा 360 जिसके अन्तर्गत देश में वित्तीय आपातकाल लगाने का प्रावधान है, वह भी जम्मू-कश्मीर पर लागू नहीं होती थी।
जम्मू-कश्मीर की विधानसभा का कार्यकाल 6 वर्षों का होता था जबकि भारत के अन्य राज्यों की विधानसभाओं का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है।
भारत के उच्चतम न्यायालय के आदेश जम्मू-कश्मीर के अन्दर मान्य नहीं होते थे।
जम्मू-कश्मीर की कोई महिला अगर भारत के किसी अन्य राज्य के व्यक्ति से विवाह कर ले तो उस महिला की नागरिकता समाप्त हो जाती थी। इसके विपरीत अगर वह पकिस्तान के किसी व्यक्ति से विवाह कर ले तो उसे भी जम्मू-कश्मीर की नागरिकता मिल जाती थी।
धारा 370 की वजह से कश्मीर में आरटीआई और सीएजी (CAG) जैसे कानून लागू नहीं होते थे।
कश्मीर में महिलाओं पर शरियत कानून लागू था।
कश्मीर में पंचायत को अधिकार प्राप्त नहीं थे।
धारा 370 की वजह से ही कश्मीर में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी भारतीय नागरिकता मिल जाती थी।

इस धारा 370 की समाप्ति को लेकर संसद में विधेयक पेश करने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को मिला विशेष राज्य का दर्जा भी खत्म हो गया। साथ ही संसद ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल भी पारित कर दिया। इसी पर बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने साफ तौर पर कह दिया कि जम्मू-कश्मीर कहने से उनका मतलब केवल भारत के हिस्से वाला कश्मीर नहीं है बल्कि उसके अंदर पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) और अक्साई चीन भी है। ऐसे में अमित शाह ने संसद में कहा कि वह इनदोनों को भी भारत में मिलाने के लिए अपनी जान तक दे सकते हैं। अमित शाह की इसी बात को पाकिस्तानी नेताओं ने अपने दिल पर ले लिया। पाकिस्तान की बौखलाहट साफ दिखने लगी। आनन-फानन में पाकिस्तान में इस बात को लेकर संसद का संयुक्त सत्र बुला लिया गया। वहीं पाकिस्तानी खबरिया चैनलों पर बैठकर वहां के नेता और आतंकी समर्थक भारत में लाखों की संख्या में आतंकवादी भेजने की पैरवी भी करते नजर आने लगे। मतलब साफ है कि पाकिस्तान की यह बौखलाहट इस कदर बढ़ गई कि वह खुद ही मानने लगा कि वह भारत की सीमा में अपनी तरफ से आतंकियों की खेप भेजता है और साथ ही वह अपने आतंकियों के जरिए भारत की सीमा में आतंक को फैलाने और उन्हें समर्थन देने का काम करता है। दरअसल, पाकिस्तान ने यह कभी सोचा भी नहीं होगा कि कश्मीर को लेकर भारत इतना कठोर फैसला कर सकता है। पाकिस्तान की नींद इसलिए भी उड़ी हुई है कि भारत कहीं अब सीधे पाक अधिकृत कश्मीर (पीओके ) को लेकर कोई कदम न उठा ले। भारत ने यह तो स्पष्ट कर ही दिया है कि कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और पाक अधिकृत कश्मीर भी इससे अलग नहीं है।

Amit Shah

पाकिस्तान यह बिल्कुल नहीं चाहता कि घाटी में शांति का माहौल बने। अगर कश्मीर घाटी के नौजवान पढ़-लिखकर रोजगार में लगने लगेंगे तो आतंकी संगठन पत्थरबाजों और आतंकियों की भर्ती कैसे करेंगे, पाकिस्तान की फिक्र यह है। पाकिस्तान समझ चुका है कि कश्मीर को लेकर भारत की नीति अब साफ है और बड़े फैसले लेने में वह बिल्कुल नहीं हिचकेगा। वहीं भारत ने संयुक्त राष्ट्र और सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्य देशों सहित ज्यादातर देशों को इस बारे में सूचित कर दिया है और साफ बता दिया है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 खत्म करना भारत का अंदरूनी मामला है। ऐसे में पाकिस्तान की विश्व मंच पर जाने की धमकी भी फुस्स होती नजर आ रही है।

जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटा तो पाकिस्तान को क्यों लगी मिर्ची…

Pakistan

भारत सरकार द्वारा कश्मीर का विशेष दर्जा (अनुच्छेद 370) खत्म किए जाने पर पाकिस्तानी सेना बौखलाहट में दिखी। पाक आर्मी चीफ जनरल कमर बाजवा ने कहा है कि वे कश्मीरियों व उनके संघर्ष को सपोर्ट करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। उन्होंने भारत सरकार द्वारा अनुच्छेद 370 को हटाने के फैसले को मानने से इनकार कर दिया। जनरल बाजवा पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर रावलपिंडी में सेना के प्रमुख कमांडरों के साथ एक बैठक की। इस मीटिंग में कश्मीर के हालात को लेकर चर्चा हुई। जिसके बाद उन्होंने जम्मू-कश्मीर को लेकर अपना स्टैंड क्लीयर किया। पाक आर्मी के प्रवक्ता अशिफ गफूर ने ट्वीट कर कहा कि उनकी सेना अपनी सरकार के पक्ष को पूरी तरह से समर्थन करती है जिसमें भारत सरकार द्वारा कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने को स्वीकार नहीं किया गया। उन्होंने लिखा कि उन्हें कभी नहीं लगा कि कश्मीर से दशकों पुराना कानून 370 या 35ए हटाया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सेना कश्मीरियों के संघर्ष में उनके साथ पूरी तरह से खड़ी है। उनको समर्थन देने के लिए पाकिस्तानी सेना किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार है।

क्यों खीझकर इमरान खान ने कहा, हिंदुस्तान पर हमला कर दें क्या?

Imran Khan meets NSC

कश्मीर से धारा 370 हटाने के मोदी सरकार के फैसले के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान अपने देश में बुरी तरह घिर गए। जम्मू-कश्मीर पर भारतीय नेतृत्व के फैसले पर आगे की रणनीति तय करने के लिए पाकिस्तान की संसद में मंगलवार को संयुक्त सत्र बुलाया गया था। संसद में जब प्रधानमंत्री इमरान खान कश्मीर मुद्दे पर उठे सवालों का जवाब दे रहे थे तो उनके हाव-भाव में झल्लाहट साफ नजर आई। संसद में विपक्ष के नेता शाहबाज शरीफ के सवालों का जवाब देते हुए इमरान ने अपना आपा खो दिया। उन्होंने विपक्ष से सलाह मांगते हुए कहा कि आप ही बताएं कि कश्मीर में भारतीय कार्रवाई के जवाब में उनकी सरकार को क्या कदम उठाने चाहिए। इमरान ने कहा, आखिर मैंने कौन सा कदम नहीं उठाया है, हमारा विदेश मंत्रालय तमाम देशों के राजदूतों के साथ बैठक कर रहा है। मैं दूसरे देशों के साथ भी संपर्क कर रहा हूं। अंतरराष्ट्रीय मंच से भी मदद मांग रहे हैं। शरीफ बताएं कि अब मुझे और क्या करना चाहिए? इमरान ने आगे कहा, हम संयुक्त राष्ट्र में सालों से गुहार लगा रहे हैं, हमने इस्लामिक सहयोग संगठन से भी कल बात की। कौन सी चीज है जो मैंने नहीं की, जो विपक्ष हमें ललकार रहा है। हम क्या हिंदुस्तान पर हमला कर दें?

इमरान ने संसद में खड़े होकर भारत को दी गीदड़भभकी

युद्ध की चेतावनी देते हुए इमरान ने आगे कहा, अगर पारंपरिक युद्ध होता है तो दो नतीजे हो सकते हैं। युद्ध हमारे खिलाफ जा सकता है या हमारे हक में हो सकता है। अगर युद्ध हमारे खिलाफ जाता है तो एक रास्ता होगा कि हम हाथ खड़े कर हार मान लें और दूसरा रास्ता होगा- टीपू सुल्तान की तरह खून के आखिरी कतरे तक मुकाबला करें। अगर हम आखिरी कतरे तक लड़ते हैं तो फिर इस जंग को कोई नहीं जीत पाएगा। सब हार जाएंगे। उसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा। मैं परमाणु युद्ध की धमकी नहीं दे रहा हूं। मैं सामान्य समझ की अपील कर रहा हूं। अच्छे की उम्मीद करिए लेकिन सबसे खराब परिस्थिति के लिए भी तैयार रहिए।

आगे इस मुद्दे पर संसद में बोलते हुए इमरान के चेहरे पर डर साफ झलक रहा था। इमराने ने आगे कहा कि भारत अब कश्मीरी लोगों पर और जुल्म ढाएगा। वे अपने सैन्य बल की ताकत से कश्मीरियों के प्रतिरोध का दमन करने की कोशिश करेंगे। मुझे डर है कि वे कश्मीर में स्थानीय आबादी का नामोनिशान मिटा देना चाहते हैं। ऐसी स्थिति में पुलवामा जैसे हमले फिर से हो सकते हैं। उसके बाद वे हमें दोषी ठहराने की कोशिश करेंगे। वे हम पर फिर से हमला करेंगे और हम भी जवाब देंगे।

पाकिस्तान ने इसके बाद हवाई कॉरिडोर किया बंद

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अनुच्छेद 370 को समाप्त करने से तिलमिलाए पाकिस्तान ने अपने हवाई मार्गों में बदलाव किए हैं। इसमें लाहौर क्षेत्र के हवाई मार्ग भी शामिल हैं। बौखलाए पाकिस्तान ने भारत के विमानों का रास्ता भी रोक दिया है। पाकिस्तान ने गुरुवार रात को अपने एयर स्पेस के एक कॉरिडोर को बंद कर दिया, जिससे विदेशी उड़ानों को अब 12 मिनट का ज्यादा समय लगेगा। इसके अलावा पाक ने पाकिस्तान में उड़ानों की न्यूनतम ऊंचाई भी बढ़ा दी है। पाकिस्तान सिविल एविएशन अथॉरिटी ने बुधवार को अपने सभी एयरलाइन्स के लिए हवाई मार्गों में परिवर्तन किया है। इसमें लाहौर इलाके के एयरलाइन्स को विशेष रूप शुमार किया गया है। पाकिस्तान में उड़ानों की ऊंचाई की न्यूनतम सीमा भी बढ़ा दी गई है। लाहौर क्षेत्र में विदेशी विमानों को 46 हजार फीट की ऊंचाई से नीचे उड़ान भरने की इजाजत नहीं दी गई है। इसके अलावा पाकिस्तान ने अफगानिस्तान की फ्लाइट्स को भी पीसीसीए से वैकल्पिक मार्ग लेने का निर्देश दिया है।

भारत के साथ राजनयिक संबंध घटाने और कारोबारी रिश्ते खत्म करने का पाकिस्तान ने लिया निर्णय

पाकिस्तान ने बुधवार को भारत के साथ राजनयिक संबंधों को कम करने और कारोबारी रिश्ते खत्म करने की घोषणा कर दी। पाकिस्तान ने बुधवार को भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार खत्म करने का फैसला लिया। पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति की बैठक में यह फैसला लिया। पाक सरकार ने यह भी निर्णय लिया कि भारतीय उच्चायुक्त अजय बिसारिया को वापस भेजा जाएगा। इमरान सरकार ने कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद यह कदम उठाया। बैठक के बाद पाकिस्तान सरकार ने बयान जारी किया। इसमें कहा गया- भारत का हालिया कदम कश्मीर में हिंसा और उपद्रव को बढ़ाएगा। यह कदम दो सामरिक रूप से सक्षम देशों के बीच अस्थिरता का कारण बनेगा। कश्मीर में भारत सरकार ने बड़ी तादाद में सेना को नियुक्त किया है और इसका इस्तेमाल वहां की निहत्थी जनता के खिलाफ किया जाएगा, जो कि आग में घी का काम करेगा।

Pakistan PM Imran Khan

इस बैठक में 5 अहम फैसले लिए गए…
1- राजनयिक संबंधों को कम करना।
2- द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध खत्म करना।
3- द्विपक्षीय व्यवस्थाओं की समीक्षा करना।
4- कश्मीर पर फैसले का मामला संयुक्त राष्ट्र ले जाना।
5- 14 अगस्त का दिन कश्मीरियों के साथ मजबूती के साथ खड़े रहने के तौर पर याद किया जाएगा। 15 अगस्त को काला दिवस मनाया जाएगा।

भारत और पाकिस्तान के बीच किस-किस चीज का होता है आयात-निर्यात

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भारत पाकिस्तान को जो निर्यात करता है, उसमें 37% हिस्सेदारी रासायनिक उत्पादों और 33% हिस्सेदारी टेक्सटाइल आइटम्स की है। भारत पाकिस्तान को सबसे ज्यादा कॉटन और ऑर्गेनिक केमिकल एक्सपोर्ट करता है। वहीं, भारत पाकिस्तान से सबसे ज्यादा 49% खनिज उत्पाद और 27% फल आयात करता है। आयात में मिनरल ऑयल की हिस्सेदारी 27% और फलों की हिस्सेदारी 21% है।

17 साल पहले भी भारत ने पाकिस्तान के उच्चायुक्त को किया था निष्कासित

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मई 2002 में भारत ने नई दिल्ली स्थित पाकिस्तान के तत्कालीन उच्चायुक्त अशरफ जहांगीर काजी को निष्कासित किया था। भारत ने यह कदम कश्मीर में एक आतंकी हमले में 35 लोगों की मौत होने के बाद उठाया था। उस वक्त जहांगीर काजी आतंकियों का समर्थन कर रहे थे। इससे पहले दिसंबर 2001 में संसद पर पाकिस्तानी आतंकियों के हमले के बाद भारत ने दिल्ली में पाकिस्तान के मिशन में तैनात स्टाफ में 50% की कटौती करा दी थी। वहीं, अपने उच्चायुक्त को पाकिस्तान से बुला लिया था। दिल्ली में पदस्थ पाकिस्तान के मिशन प्रमुख से बात करने से इनकार कर दिया था। इससे पहले 1965 और 1971 की जंग के वक्त भारत-पाकिस्तान के बीच राजनयिक संबंध खत्म हो गए थे।

इस कदम से जानें भारत या पाकिस्तान किसको होगा नुकसान…

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पाकिस्तान के इस निर्णय को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा है उसकी वित्तीय स्थिति पहले से ही खराब है। वहां की जनता देश में बढ़ती महंगाई से पहले से ही परेशान है। ऐसे में भारत की तरफ से भेजी जाने वाली वस्तुओं पर रोक लगाने से पाकिस्तान में खाने के लाले पड़ जाएंगे। भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार संबंधों को निलंबित करने के पाकिस्तान के निर्णय से ज्यादा नुकसान उसी को होगा। इसकी मुख्य वजह यह है कि पाकिस्तान अपने पड़ोसी भारत से कई आवश्यक वस्तुओं का आयात करता है। इस साल फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले के बाद व्यापार संबंधों में तनाव के चलते भारत से पाकिस्तान को होने वाले निर्यात में पहले ही कमी आयी है। भारत इस मामले में उस पर पहले से ही बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है जबकि पाकिस्तान की भारत पर निर्भरता अपेक्षाकृत अधिक है। वहीं बौखलाए पाकिस्तान ने भारत और पाक के बीच चलनेवाली समझौता एक्सप्रेस को भी रोक दिया है। साथ ही पाकिस्तान में भारतीय फिल्मों के प्रदर्शन पर भी रोक लगा दिया गया है। ऐसे में ये सारे नुकसान पाकिस्तान को ही उठाने पड़ेंगे।

पाकिस्तान से भारत का आयात इस वर्ष मार्च में घटकर 28.4 करोड़ डॉलर के बराबर रहा जबकि मार्च 2018 में यह आंकड़ा 3.5 करोड़ डॉलर था। इस दौरान भारत का इस पड़ोसी देश को निर्यात भी सालाना आधार पर 32 प्रतिशत घटकर 17.13 करोड़ रहा, लेकिन वित्त वर्ष 2018-19 में भारत का पाकिस्तान को निर्यात कुल मिलाकर 7.4 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 2 अरब डॉलर रहा।

वहीं पाकिस्तान अभी एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) की ग्रे लिस्ट में हैं और उससे बाहर आने के लिए झटपटा रहा है। इसलिए वह कुछ ऐसा काम नहीं करेगा जिससे इंटरनेशनल फोरम में उसकी पहले से ही खराब इमेज और खराब हो। ऐसे में पाकिस्तान भारत को केवल सैन्य कार्रवाई की धमकी दे सकता है। ऐसा करने में वह बिल्कुल सक्षम नजर नहीं आ रहा है। इस सब के बीच पाकिस्तान के लिए मुसीबत यह भी है कि अमेरिका ने जहां पाकिस्तान को इग्नोर किया। वहीं इस्लामिक देशों के संगठन ने हालात पर चिंता जताने के अलावा इसमें आगे कुछ भी कहने-करने से इनकार कर दिया। पाकिस्तान को सबसे अधिक उम्मीद इन्हीं देशों से थी। संयुक्त अरब अमीरात पहले ही भारत का समर्थन कर चुका है। 5 अगस्त को फैसला होने के बाद भारत ने तुरंत यूरोपीय देशों से संपर्क साध लिया था। वहीं पाकिस्तान का सबसे निकटतम पड़ोसी चीन भी भारत के साथ अपने व्यापारिक रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाना चाहता है। ऐसे में वह पाकिस्तान का अभी तक इस मामले में समर्थन करने के लिए सामने नहीं आया। ये बात पाकिस्तान के संसद की फिज़ा में भी संयुक्त संसद सत्र के दिन गूंजा था।

पाकिस्तान में इसे बहुत बड़ी हार मानी जा रही है और मीडिया ने तो इसे 1971 के शर्मनाक हार तक से तुलना कर दिया। पाकिस्तान में इसे बड़ी कूटनीतिक हार मानी जा रही है। पाकिस्तानी मीडिया जहां महज 2 हफ्ते पहले इमरान खान के अमेरिका दौरे का गुणगान कर रही थी और उसे इमरान का मास्टर स्ट्रोक बता रहा था, वहीं अब इसे बड़ी हार बता रहा है। इमरान खान की पूरे देश में फजीहत हो रही है और अब तक जो उन्हें मजबूत नेता मान रहे थे वे भी उन्हें अब तक का सबसे कमजोर नेता मानने लगे हैं। इन आलोचनाओं के बीच इमरान खान की सरकार बौखलाहट में भारत से कूटनीतिक संबंध तोड़ने की बात से लेकर युद्ध तक की धमकी दे रही है।