हे महा ज्ञानियों, महामना की स्थापित शिक्षा भूमि बीएचयू में छात्रों के प्रदर्शन को तुम गलत कैसे ठहरा सकते हो….

देश के अति-प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी द्वारा सन् 1916 में की गयी थी।

Avatar Written by: November 20, 2019 7:15 pm

जेएनयू की तरह एक विरोध बीएचयू(वाराणसी) में भी जारी है। यह प्रधानमंत्री मोदी के संसदीय क्षेत्र का विश्वविद्यालय है जिसकी ख्याति देश विदेश में है। देश के अति-प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से काशी हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना महामना पंडित मदन मोहन मालवीयजी द्वारा सन् 1916 में की गयी थी। इस विश्वविद्यालय के बारे में आपको बता दें कि यह एक स्वायत्तशासी उत्कृष्ठ संस्था है जिसके वि़जिटर भारत के महामहिम राष्ट्रपति हैं। यह एशिया का एकमात्र सबसे बड़ा आवासीय विश्वविद्यालय है।

Banaras Hindu University

देश की सबसे पवित्र धार्मिक नगर वाराणसी में पतितपावनी गंगा के पश्चिमी तट पर स्थित यह विश्वविद्यालय भारत की धार्मिक राजधानी प्राच्य विद्या ज्ञान केन्द्र के रूप में प्रसिद्ध है। इस विश्वविद्यालय में सभी प्रकार के स्नातक एवं स्नातकोत्तर स्तर के शैक्षणिक कार्यक्रमों हेतु प्रस्ताव आमंत्रित किया जाता है, जिसमें प्राचीन भारतीय विषयों जैसे वेद, ज्योतिष, धर्मागम, आयुर्वेद इत्यादि से लेकर आधुनिक विषयों जैसे औषधि, शल्य, जैव-प्रौद्योगिकी, बायोइन्फार्मेटिक्स, जैव-चिकित्सा, जैव-रसायन, संगणक विज्ञान एवं अन्य विज्ञान विषयों कृषि, अभियांत्रिकी, प्रबन्धन इत्यादि के विभिन्न विभागों तक सम्मिलित हैं।BHU

इस सब के बीच इसी विश्वविद्यालय परिसर में एक और विभाग स्थित है जिसको छात्र ‘संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय’ के नाम से जानते हैं। तो आइए पहले हम आपको इस विभाग की स्थापना के वर्ष से लेकर उसके उद्देश्य तक के बारे में बताते हैं। बीएचयू की वेबसाइट पर जाकर आप इस विभाग के बारे में जानकारी ले सकते हैं।

BHU

इस विभाग की स्थापना 1918 में की गई। महाविद्यालय का यह संकाय सनातन हिन्दू धर्म और कर्मकाण्ड के साथ-साथ इन सबसे जुड़े साहित्य के निरंतर उन्नयन और संवर्धन पठन-पाठन के लिए जाना जाता है। इस विभाग का पुराना नाम वैदिक महाविद्यालय था, बाद में इसी का नामान्तर प्राच्यविद्या धर्मविज्ञान संकाय हुआ। इसके बाद यह संस्कृतविद्या धर्मविज्ञान संकाय के नाम से सुविख्यात हुआ।

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इस विभाग के लिए नियम महामना मदन मोहन मालवीय जी ने खुद एक शिलालेख पर अंकित करवा दिया था ताकि इससे यहां प्रवेश करने वाला हर इंसान परिचित हो। वर्तमान में इस संकाय में कुल आठ विभाग हैं। जिसमें वेद विभाग, व्याकरण विभाग, साहित्य विभाग, ज्योतिष विभाग, वैदिक दर्शन विभाग, जैन बौद्ध दर्शन विभाग, धर्मशास्त्र मीमांसा विभाग एवं धर्मागम विभाग है। इन विभागों में लगभग 23 विषयों का शिक्षण होता है।

BHU

अब आपको बताते हैं इस विभाग में किस बात को लेकर छात्र विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। हुआ ये है कि SVDV की स्थापना प्राचीन भारतीय शास्त्रों, संस्कृत भाषा और साहित्य के अध्ययन को संरक्षित करने और बढ़ावा देने के लिए की गई, इस संकाय का प्रमुख उद्देश्य समाज में धर्म, अध्यात्म, ज्योतिष और तंत्र के बारे में व्याप्त भ्रान्तियों को दूर करना और विशेष रूप से समाज और राष्ट्र के उत्थान के लिए नैतिकता और धर्म के सर्वोपरि मूल्यों को बहाल करना है। यहां परंपरागत तरीकों के साथ-साथ मौखिक-सह-लिखित परंपरा को ध्यान में रखते हुए शास्त्रीय ग्रंथों की ‘स्ट्रिक्टली’पढ़ाई होती है।

Sanskrit-BHU

लेकिन इस संस्थान में इस संकाय में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध वहां के छात्र कर रहे हैं। इसका मुख्य कारण यह है कि इस संकाय में किसी अन्य धर्म के लोगों के प्रवेश को निषेध माना गया है।

हालांकि लोग छात्रों के इस विरोध को संस्कृत भाषा के साथ जोड़कर देख रहे हैं जबकि आपको यह समझना होगा कि बीएचयू में संस्कृत भाषा का अलग विभाग है जहां किसी को भी प्रवेश की अनुमति है। चुंकि यह विभाग पुर्णतः सनातन धर्म की व्यवस्थाओं को समझने जानने और पठन पाठन का केंद्र है। ऐसे में इस विभाग को इस तरह की पाबंदी के साथ रखा गया है।

BHU svdv Protest

यहां छात्रों के द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन में भी यही संस्कार देखने को मिल रहे हैं जब विरोध कर रहे छात्र सभी नैतिक मूल्यों को समाहित किए हुए वैदिक परंपरागत रीति रिवाजों का पालन करते हुए विरोध कर रहे हैं। छात्र यहां कभी बुद्धि-शुद्धि यज्ञ कर रहे हैं तो कभी रुद्राभिषेक तो कभी प्रदर्शन के तौर पर हनुमान चालीसा का पाठ साथ हीं कभी-कभी वह वीसी के विरोध में नारेबाजी भी कर रहे हैं।

BHU svdv Protest

अब हम आपको बताते हैं कि इस संकाय में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर इतना विरोध क्यों हो रहा है। क्योंकि बीएचयू की स्थापना के समय जो उद्देश्य निर्धारित किए गए थे उसमें लिखा गया था कि वैदिक विद्यालय (जो वर्तमान में संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय) है जहां वेद, वेदांग, स्मृति, इतिहास तथा पुराणों की शिक्षा दी जाएगी। ज्योतिष विभाग में एक ज्योतिष संबंधित तथा अंतरिक्ष विद्या संबंधित वेधशाला भी निर्मित की जाएगी। इस वैदिक कॉलेज का कार्य उन हिंदुओं के अधिकार में होगा जो श्रुति, स्मृति तथा पुराणों द्वारा प्रतिपादित सनातन धर्म के सिद्धांतों को मानने वाले होंगे।

bhu student protest

इस विश्वविद्यालय में वर्णाश्रम धर्म के नियमानुसार ही प्रवेश होगा। इस विद्यालय (संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय) के अतिरिक्त अन्य सभी विद्यालयों में सब धर्मावलंबियों तथा सब जातियों का प्रवेश हो सकेगा तथा संस्कृत भाषा के अन्य शाखाओं की शिक्षा जाति और सम्प्रदाय का भेदभाव किए बिना सबको दी जाएगी। ऐसे में अब आपको स्पष्ट हो गया होगा कि डॉ फिरोज खान की नियुक्ति को लेकर इतना विरोध क्यों किया जा रहा है। विरोध कर रहे छात्र स्पष्ट रूप से कह रहे हैं कि उन्हें डॉ फिरोज खान की नियुक्ति से कोई आपत्ति नहीं है वह नियुक्ति अगर संस्कृत विभाग में होती तो इतना विरोध ही नहीं होता लेकिन बीएचयू की स्थापना के समय से ही जहां एक विशेष विभाग को विशेष व्यवस्था के तहत रखा गया है उसको भंग करने की यह एक कोशिश है। जिसका वह विरोध कर रहे हैं।

banaras hindu university

हालांकि इस पूरे मामले को मीडिया के कई धड़े लोगों के सामने इस तरह से प्रस्तुत कर रहे हैं मानो छात्र संस्कृत विभाग में डॉ फिरोज खान की नियुक्ति का विरोध कर रहे हैं जबकि सच इसके ठीक उलट है। यह बीएचयू प्रशासन का एक अदूरदर्शी कदम है जिसे नियमों का हवाला देकर सही ठहराया जा रहा है। जो आने वाले समय में हिन्दू धर्म और सनातन संस्कृति की रक्षार्थ देश में एकमात्र बचे संकाय को भी समाप्त करने के लिए काफी होगा।