महिलाओं को सजग और सशक्त बनाने की मुहिम

हमारी संस्कृति में बेटियों को लक्ष्मी माना गया है क्योंकि बेटी सौभाग्य और समृद्धि लाती हैं। उन्होंने कहा था कि हमारे बीच में कई ऐसी बेटियां होंगी जो अपनी मेहनत और लगन से, परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रौशन कर रही होंगी।

Written by: October 9, 2019 7:24 pm

रावण दहन के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर महिलाओं को लेकर सरकार की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संबोधन में देश की महिलाओं की गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तिकरण पर जोर दिया। नवरात्र की भावना के अनुसार महिलाओं को समाज में मजबूत स्थान देने की वकालत करते हुए प्रधानमंत्री ने सभी से अपील की। उन्होंने दीवाली और लक्ष्मी पूजा का हवाला देते हुए कहा कि इस पावन पर्व में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है और हमारे समाज में तो साक्षात लक्ष्मी उपस्थित हैं।

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उन्होंने देशवासियों से ये अपील की कि दीवाली के अवसर पर उऩ बेटियों को सम्मानित करना चाहिए जो अपने कार्यों से दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही हैं या बन सकती हैं। इसके पहले रेडियो पर मन की बात कार्यक्रम में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दीपावली में सौभाग्य और समृद्धि के रूप में लक्ष्मी का घर-घर में आगमन होता है।

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हमारी संस्कृति में बेटियों को लक्ष्मी माना गया है क्योंकि बेटी सौभाग्य और समृद्धि लाती हैं। उन्होंने कहा था कि हमारे बीच में कई ऐसी बेटियां होंगी जो अपनी मेहनत और लगन से, परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रौशन कर रही होंगी। उनको सामने लाने की जरूरत पर प्रधानमंत्री ने बल दिया था। एकतरफ प्रधानमंत्री बेटियों के महत्वपूर्ण काम को रेखांकित करने पर बल दे रहे हैं तो दूसरी तरफ महिला और बाल विकास मंत्रालय महिलाओं को हर तरह से सजग और सशक्त करने में लगा है।

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अपनी दूसरी पारी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला और बाल विकास मंत्रालय का जिम्मा युवा मंत्री स्मृति ईरानी को सौंपा था। देश की महिलाओं को सशक्त करने के प्रधानमंत्री के सपने को पूरा करने के लिए ये मंत्रालय जुट गया। स्मृति ईरानी की अगुवाई में महिला और बाल विकास मंत्रालय ने खामोशी के साथ महिलाओं की बेहतरी के लिए काम करना शुरू कर दिया। मंत्रालय का जिम्मा संभालने के 100 दिनों के अंदर स्मृति ईरानी ने सबसे पहले हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए काम करना शुरू किया।

महिलाओं के अंदर भरोसा जगाने के लिए कई तरह के कदम उठाए गए। स्मृति ईरानी ने कई राज्यों का दौरा किया और वहां के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक कर महिलाओं से संबंधित कार्यक्रमों में प्राथमिकता के आधार पर गति प्रदान करवाई। स्मृति ईरानी के प्रयासों का नतीजा था कि चार महीने में पूरे देश में 85 नए वन स्टॉप सेंटर खुले। चार महीने में 85 वन स्टॉप सेंटर यानि हर महीने करीब 21 सेंटर का खुलना अपने आप में बड़ी बात है।

नरेंद्र मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में करीब पौने पांच सौ वन स्टॉप सेंटर्स खुले थे जिसका औसत करीब दस सेंटर प्रतिमाह आता है। महिलाओं के लिए इन सेटर्स की बहुत अहमियत है। इन सेंटर्स में हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद की जाती है और उनको इससे उबरने में सहयोग भी दिया जाता है। स्मृति ईरानी की अगुवाई में इन सेंटर्स पर जो स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीज्योर को भी सरल बनाया गया और व्यावहारिक अड़चनों को दूर किया गया।

 

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इसके अलावा स्मृति ईरानी ने इन सेंटर्स में सखी डैशबोर्ड के नाम से एक आईटी प्लैटफॉर्म की शुरुआत भी करवाई जिसमें वूमन हेल्पलाइन और महिला पुलिस वॉलेंटियर जैसी पहल शामिल है। इन दोनों पहल के बाद महिलाओं को इन सेंटर्स पर सहजता के साथ सहूलियतें मिलनी शुरू हो गई हैं।

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महिला और बाल विकास के क्षेत्र में मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में काफी संजीदगी के काम हो रहा है। बच्चों को यौन हिंसा के शिकार से बचाने और यौन आक्रमण को कम करने के लिए पॉक्सो कानून को काफी सख्त किया गया है। आजादी के 70 साल बाद भी हमारे देश में महिलाओं के लिए बहुत काम करना शेष है, लेकिन जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपेक्षाओं को लेकर महिला और बाल विकास मंत्रालय संजीदगी से काम कर रहा है उससे एक उम्मीद ये जगी है कि देश की बेटियों के खिलाफ हो रहे जुर्म में कमी आएगी। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ की सफलता के बाद अब बेटियों को सशक्त करने की इस मुहिम को सक्रियता से चलाए रखने की जरूरत है।