कोरोना से जारी है दुनिया भर में संग्राम, फिर भी भारत के लोग स्थिति से निपटने को लेकर आशावान!

कोरोनावायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया त्राहिमाम कर रही है। भारत भी इससे लड़ रहा है। देश में 1 लाख के करीब-करीब संक्रमित लोगों का आंकड़ा पहुंच गया है।

Written by: May 18, 2020 3:04 pm

कोरोनावायरस के प्रकोप से पूरी दुनिया त्राहिमाम कर रही है। भारत भी इससे लड़ रहा है। देश में 1 लाख के करीब-करीब संक्रमित लोगों का आंकड़ा पहुंच गया है। अमेरिका जैसे सामर्थ्यवान देश को भी इस देश ने घूटने टेकने पर मजबूर कर दिया है। लेकिन भारत के लोग इस आपात स्थिति से निपटने को लेकर की जा रही कोशिशों की वजह से आशावान नजर आ रहे हैं। दुनिया में सबसे ज्यादा आशावादी भारतीय हैं। यहां उपभोक्ता आय और बचत में गिरावट के बावजूद आर्थिक सुधार को लेकर आशावान हैं। वहीं भारत के लोग कोविड-19 के बाद सामान्य जीवन को लेकर भी आशावान नजर आ रहे हैं।

Vande bharat Mission corona

भारत में सरकार के कामकाज और कोरोना से निपटने के तरीके को लेकर भारतीयों के मन में एक आशा की किरण जगी है। देश की बड़ी आबादी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में इसके निपटारे के लिए उठाए गए कदमों से खुश है। भारत की बड़ी जनसंख्या का भरोसा प्रधानमंत्री मोदी को लेकर कायम है उनका सोचना है कि किसी भा आपात स्थिति से देश को बाहर निकलने के लिए पीएम मोदी का कुशल नेतृत्व काफी है।

Narendra Modi

कोरोनावायरस महामारी से देशवासियों के बीच नौकरी खोने का डर और आय को लेकर चिंता बनी हुई है, मगर साथ ही लोग कई पहलुओं पर सकारात्मकता दिखाते हुए उम्मीद भी लगाए हुए हैं। भारत में जब 25 मार्च 2020 को राष्ट्रव्यापी बंद लागू किया गया तो हर किसी को अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों का अंदाजा था। लोगों को यह अनुमान था कि इस इससे काफी परिवारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ जाएगी। तब से भारतीयों में न केवल अपने स्वास्थ्य, बल्कि अपनी आर्थिक सुरक्षा को भी डर बना हुआ है। मगर फिर भी लोगों में एक आशा जरूर बनी हुई है कि यह संकट की घड़ी बीत जाएगी और लोग फिर से बेहतर भविष्य की उम्मीद भी कर रहे हैं।

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कई सर्वे की रिपोर्ट की मानें तो अखिल भारतीय स्तर पर प्रत्येक तीन भारतीयों में से दो का मानना है कि वे अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रख रहे हैं। लिंग, आयु, शिक्षा और आय समूहों जैसे विभिन्न वर्गों में स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती हुई चिंता दिखाई दे रही है। ऐसे भारतीय जो 60 वर्ष से अधिक उम्र के हैं, उनमें से आधे से भी कम ऐसे हैं, जो अपने स्वास्थ्य का अधिक ध्यान रख रहे हैं। देशभर में चार में से एक पूरी तरह से बेरोजगार हो गए हैं। इनमें से कुछ लोगों ने अपनी नौकरी खो दी तो कुछ के आय के साधन खत्म हो गए हैं। दस में से एक बिना किसी वेतन के छुट्टी पर हैं। वास्तव में इस समय एक तिहाई से अधिक भारतीयों के पास कोई काम, नौकरी या आय का साधन नहीं है। लगभग छह प्रतिशत लोग वेतन कटौती के साथ घर से काम कर रहे हैं, जबकि दस में से एक बिना किसी वेतन कटौती के घर से काम कर रहे हैं।

अब कुछ रिपोर्ट पर नजर डालते हैं जो हाल ही में जारी की गई है….

93% मानते हैं एक साल में जीवन पहले जैसा हो जाएगा

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रोजमर्रा के जीवन को लेकर भी देश में लोग ज्यादा आशावादी हैं। मैकेंजी के सर्वे में सिर्फ 7% लोगों ने कहा कि रूटीन सामान्य होने में एक साल से अधिक वक्त लगेगा। 93% का मानना है कि एक साल के अंदर रूटीन पहले जैसा हो जाएगा। इन 93% में से 8% लोगों का मानना है कि एक महीने में ही रूटीन पहले जैसा हो जाएगा। 35% का मानना था कि दिनचर्या चार से छह महीने में पटरी पर आ जाएगी।

भारत में लोग ज्यादा खर्च करने की तैयारी कर रहे

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वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में लोग खर्च बढ़ाने की प्लानिंग कर रहे हैं। इसी तरह का ट्रेंड चीन, इंडोनेशिया और नाइजीरिया में भी देखा गया है। जबकि अमेरिका, रूस, जर्मनी जैसे कई देशों में लोग खर्च कम करने की प्लानिंग कर रहे हैं। केपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट के सर्वे में 57% भारतीयों ने कहा कि वे इस साल कार खरीदने पर विचार कर रहे हैं।

48% भारतीयों को भरोसा, महामारी जल्द खत्म होगी

लंदन-स्थित ग्लोबल मार्केट रिसर्च और डेटा कंपनी यूगोव के सर्वे में कोविड जल्द खत्म होने को लेकर भी भारतीय लोग काफी आशावान दिखे। भारत में करीब 48% लोगों ने कहा कि जुलाई के अंत तक महामारी खत्म हो जाएगी। जबकि बाकी दुनिया में 40% को महामारी जल्द खत्म होने की आशा है। अधिकांश लोगों ने माना कि इस संकट में कुछ न कुछ अच्छा भी हुआ है।

कोविड-19 बाद सामान्य जीवन को लेकर 66 प्रतिशत लोग आशावान

देश में ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित और विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक, आय व आयु वर्ग के 48 से 66 प्रतिशत लोगों ने उम्मीद जताई है कि कोविड-19 का प्रकोप खत्म हो जाने के बाद जीवन सामान्य ढर्रे या ट्रैक पर लौट आएगा। सर्वेक्षण के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले 48.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ‘बहुत आशान्वित’ हैं कि जब खतरनाक वायरस चला जाएगा तो उनके स्वयं के साथ-साथ उनके परिवार के सदस्यों का जीवन भी सामान्य ट्रैक पर वापस आ जाएगा। वहीं 38 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर ‘कुछ आशान्वित हैं’ और 7.1 प्रतिशत ने कहा कि वे ‘बहुत आशान्वित नहीं हैं’।

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हालांकि इस तरह की सोच रखने वाले लोगों की संख्या अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बढ़ी हुई देखी गई, जहां 56.5 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ‘बहुत आशान्वित’ हैं, 25.1 प्रतिशत ‘कुछ आशान्वित’ हैं और 7.4 प्रतिशत ‘बहुत आशान्वित’ नहीं हैं।

Corona delhi

वहीं इस मुद्दे पर शहरी क्षेत्रों के लोग काफी आशावादी नजर आए। यहां 58.6 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे ‘बहुत आशान्वित’ हैं कि उनका जीवन प्रकोप के बाद वापस पटरी पर आ जाएगा, जबकि 25.9 प्रतिशत ने कहा कि वे ‘कुछ आशान्वित’ हैं और केवल 2.4 प्रतिशत ने कहा कि उन्हें अभी इसकी कोई खास उम्मीद नहीं है। वहीं अगर लिंग के आधार पर देखा जाए तो 58.6 प्रतिशत पुरुष और 55.2 प्रतिशत महिलाएं महामारी के बाद सामान्य जीवन के पटरी पर लौटने को लेकर आशावादी नजर आए।