अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत की कूटनीतिक जीत, मोदी-ट्रंप की ताली से पाकिस्तान में खलबली

जी-7 सम्मेलन में मोदी और ट्रंप की गर्मजोशी से मुलाकात से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। उसके पास बिलबिलाने और दुनिया के सामने अपना रोना रोने के अलावा कोई रास्ता नहीं बच गया है।

Written by: August 29, 2019 8:57 pm

जी-7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात पहले से सुर्खियों में था। और जब दोनों नेता ग्लोबल मीडिया से मुखातिब हुए तो मानो सवालों की झड़ी लग गई। इसकी पृष्ठभूमि पहले से ही तैयार हो चुकी थी क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति एक नहीं कई बार कश्मीर पर मध्यस्तथा की पेशकश कर चुके थे। साथ ही जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 के खत्म होने पर विदेशी मीडिया भी सवाल पूछने के लिए काफी बेताब था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर पर दो टूक जवाब दिया, कहा भारत और पाकिस्तान के सभी मसले द्विपक्षीय है और किसी भी तीसरे देश को इन मामलों में दखल देने का हक नहीं है। विश्व के सबसे शक्तिशाली नेता डोनाल्ड ट्रंप के सामने पीएम मोदी की यह बेबाकी भारत की कूटनीतिक जीत के तौर पर देखा जा रहा है। साथ ही यह भारत के वैश्विक पटल पर उभरते प्रभाव को दर्शाता है।

इससे ज्यादा रोचक बात हुई – मोदी और ट्रंप की ताली और ठहाके। ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में कहा, “पीएम मोदी बहुत अच्छी अंग्रेजी बोलते हैं लेकिन अभी बोल नहीं रहे”। इस पर मोदी ने ट्रंप का हाथ अपनी ओर खींचा, हाथ मिलाया और जोर की थपकी लगाई। एक औपचारिक बैठक में इस तरह के व्यवहार से दोनों नेताओं की दोस्ती और गर्मजोशी का अंदाजा पता लगता है। कुटनीतिक जानकारों की मानें तो मोदी और ट्रंप का यह निजी समीकरण ना केवल भारत के ओहदा को ऊंचा करता है बल्कि मोदी के दबदबे को भी दिखाता है। यह दर्शाता है कि कितनी सरलता से मोदी ने इस जटिल समस्या पर भारत का रुख साफ किया और ट्रंप को मजबूर किया कि वो इस रुख का समर्थन करें।

राष्ट्रपति ट्रंप भी कश्मीर पर अमरीकी मध्यस्तथा के ऑफर को वापस लेने को मजबूर हो गये। ट्रंप के सामने जितनी सफाई से मोदी ने किसी भी तीसरे देश की दखलअंदाजी पर लगाम लगाई, अमेरिकी राष्ट्रपति भी अपने शब्द खाने को मजबूर हो गये। उन्होंने माना कि भारत और पाकिस्तान के बीच तमाम मुद्दे द्विपक्षीय है और इसका समाधान दोनों देश मिल कर सकते हैं। उन्होंने मीडिया को बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें आश्वासन दिलाया है कि धारा 370 खत्म होने के बाद इस क्षेत्र में सब कुछ नियंत्रण में है और चिंता की कोई विषय नहीं है।

आपको बता दें कि महज कुछ दिनों पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक नहीं दो बार मध्यस्तथा करने का ऑफर दिया था। पाकिस्तान प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के बाद ट्रंप ने यह पेशकश की थी। कुछ समय बाद यह कह दिया कि प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इसकी अपील की थी। इसपर जमकर बवाल मचा और भारत के विदेश मंत्री ने ट्रंप के इस झूठ का पुरजोर विरोध किया।

अनुच्छेद 370 को खत्म करना भारत का अंदरुनी मामला है और चूंकि इससे पाकिस्तान के भौगोलिक नक्शे पर कोई बदलाव नहीं होता तो इसपर किसी भी देश की आपत्ति भारत को गवारा नहीं हो सकता। तमाम देश भी भारत के इस तर्क से सहमत हैं लेकिन इसके बाद इस इलाके में जो तनाव पैदा हुआ है, उसे लेकर अमेरिका ने दोनों देशों से शांति बनाए रखने की अपील की।

मोदी और ट्रंप की इस गर्मजोशी से मुलाकात से पाकिस्तान में खलबली मच गई है। उसके पास बिलबिलाने और दुनिया के सामने अपना रोना रोने के अलावा कोई रास्ता नहीं बच गया है। इस मुलाकात से इमरान खान इतने परेशान हुए कि उन्होंने एक प्रेस वार्ता की और परमाणु युद्ध की धमकी दे डाली। लेकिन जानकारों का मानना है कि यह पाकिस्तान की गीदड़भवकी से ज्यादा कुछ नहीं। सब तरफ से हारने के बाद अब वो विश्व का ध्यान बंटाना चाहता है कि जब दो न्यूक्लिर देश टकरायेंगे, तो विश्व भी अछूता नहीं रहेगा।

बात करें अमेरिका और पाकिस्तान के समीकरण की, तो जानकारों का कहना है कि ट्रंप ने इमरान खान से मुलाकात अमेरिकी स्वार्थ को साधने के लिए की थी। अफगानिस्तान से सैनिक वापसी के लिए ट्रंप को इमरान की जरुरत है। लेकिन जब उन्हें प्रतीत हुआ है कि पाकिस्तान की भूमिका नाकाफी होगी, तो उसे नजरअंदाज करने में समय नहीं लगा रहा। ऐसे में पाकिस्तान खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है लेकिन उसके पास और कोई उपाय है भी नहीं। अमेरिका के खिलाफ मोर्चा खोलने के लिए ना उसके पास इतनी ताकत ना कूवत। बहरहाल, वो अपनी करतूतों से बाज़ नहीं आएगा और आगे भी विश्व की दूसरी ताकतों के सामने गिड़गिड़ाता रहेगा और भारत के खिलाफ समर्थन जुटाने की गुहार लगाता रहेगा।