जैश-ए-मोहम्मद सरगना का दक्षिणी कश्मीर में पर्सनल इंट्रेस्ट, PAK से दूर होने के बावजूद बनाया ‘अड्डा’

दक्षिणी कश्मीर का पुलवामा जिला, वहीं जिला जहां सबसे बड़ा फिदायीन हमला हमारे जवानों पर हुआ है। वो जिला चावल और केसर की खेती के लिए पूरी दुनिया में फेमस है। यहां दूध का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन पिछले 3 सालों में ये इलाका आतंकवादियों के ‘उत्पादन’ में भी काफी तेजी से आगे बढ़ा है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद ने सबसे अधिक पैठ बनाई है।

Avatar Written by: February 16, 2019 4:24 pm

नई दिल्ली। दक्षिणी कश्मीर का पुलवामा जिला, वहीं जिला जहां सबसे बड़ा फिदायीन हमला हमारे जवानों पर हुआ है। वो जिला चावल और केसर की खेती के लिए पूरी दुनिया में फेमस है। यहां दूध का उत्पादन भी बड़े पैमाने पर होता है, लेकिन पिछले 3 सालों में ये इलाका आतंकवादियों के ‘उत्पादन’ में भी काफी तेजी से आगे बढ़ा है, जिसमें जैश-ए-मोहम्मद ने सबसे अधिक पैठ बनाई है।

बता दें कि इसी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने पुलवामा में जवानों के काफिले पर हुए आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी ली है। कश्मीर घाटी में आतंकवाद के पोस्टर बॉय बन चुके हिज्बुल कमांडर बुरहान वानी को सुरक्षाबलों ने 8 जुलाई 2016 को मार गिराया था। पुलवामा के त्राल इलाके में जन्मा बुरहान 15 साल में ही आतंकवादी बन गया था और 22 साल की उम्र में वह एनकाउंटर में मारा गया।

बुरहान के एनकाउंटर से पहले जैश संगठन घाटी में समाप्त होने की कगार पर पहुंच गया था, लेकिन पिछले लगभग ढाई सालों में आतंकी संगठन जैश फिर से घाटी में ‘जिंदा’ हो गया। जैश-ए-मोहम्मद का मकसद कश्मीर में सैकड़ों बुरहान वानी तैयार करना है।

हथियारों की पहुंच में जैश-ए-मोहम्मद आगे

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, जैश-ए-मोहम्मद पहले लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के अंडर में काम करता था, लेकिन इस साल सुरक्षाबलों पर हुए लगभग सभी हमलों में जैश की भागीदारी रही है। पुलवामा जिला पाकिस्तान की सीमा से दूर है, इसलिए पाकिस्तान से आए आतंकवादियों का यहां पहुंचना बहुत चुनौतीपूर्ण काम है। जैश ने लोकल लड़कों की भर्ती शुरू की। जैश के पास हथियारों की पहुंच भी लश्कर और हिज्बुल से अधिक और आसानी से हो जाती है। बाकी दोनों संगठनों के सदस्य सुरक्षाबलों से हथियार छीनकर काम करते हैं।

JeM chief Masood Azhar

मसूद अजहर का ‘पर्सनल इंट्रेस्ट’

पाकिस्तान में बैठे आतंकवादी मसूद अजहर को 1994 में दक्षिणी कश्मीर के अनंतनाग से ही अरेस्ट किया गया था। हालांकि 1999 में प्लेन हाइजैक के बाद सरकार ने यात्रियों के बदले उसे छोड़ दिया था। इसके बाद ही जैश-ए-मोहम्मद का जन्म हुआ। मसूद का एक भतीजा उस्मान हैदर पिछले ही साल सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में ढेर हुआ है। उस एनकाउंटर में मेड इन अमेरिका कार्बाइन जब्त की गई थी।

बड़े हमलों के लिए ‘काम’ पर लगे एक्सपर्ट्स

एजेंसियों का मानना है कि जैश-ए-मोहम्मद ने बड़े हमलों के लिए एक्सपर्ट्स को काम पर लगा दिया है। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर हुए हमले की पूरी योजना एक पाकिस्तानी नागरिक कामरान ने बनाई थी, जो जैश-ए-मोहम्मद का सदस्य है। कामरान दक्षिण कश्मीर के पुलवामा, अवंतिपोरा और त्राल इलाके में सक्रिय है, ऐसे में उसकी तलाश भी की जा रही है।

एक साल पहले ही जैश में शामिल हुआ था हमलावर

आतंकी संगठन जैश ने घाटी में कश्मीरी लड़कों की भर्ती का अभियान जोर-शोर से शुरू कर दिया था, जो सुरक्षा एजेंसियों के रेडार से बच निकले थे। आदिल अहमद डार भी उनमें से एक था, जिसने पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले पर आत्मघाती हमले को अंजाम दिया। हमले को अंजाम देने वाला 21 साल का आदिल अहमद डार पुलवामा के ही काकपुरा के गुंडीबाग का रहने वाला था। पिछले साल ही वह घर से गायब हो गया था और फिर वापस नहीं लौटा।

परिजनों के अनुसार आदिल 2015 में हाफिज हो गया था। उसे पूरी कुरान याद थी और धर्म की ओर उसका झुकाव बढ़ने लगा था। हालांकि, राशिद का कहना है कि 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद पत्थरबाजी के दौरान उसके पैर में पेलेट गन की गोली लग गई थी। शायद उसके बाद ही वह आतंक की राह पर चल निकला था।

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