पीएम मोदी द्वारा NCP की तारीफ और नौसिखिए आदित्य ठाकरे की वजह से महाराष्ट्र में सरकार गठन में हो रही देरी!

महाराष्ट्र में सियासी घमासान जारी है। इन सब के बीच शिवसेना के साथ गठबंधन करके सत्ता पर काबिज होने को लेकर एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से पत्ते नहीं खोले जा रहे हैं। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में चुनाव नतीजों के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है।

Written by: November 20, 2019 1:34 pm

महाराष्ट्र में सियासी घमासान जारी है। इन सब के बीच शिवसेना के साथ गठबंधन करके सत्ता पर काबिज होने को लेकर एनसीपी और कांग्रेस की तरफ से पत्ते नहीं खोले जा रहे हैं। राष्ट्रपति शासन लगने के बाद से राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। राज्य में चुनाव नतीजों के बाद से ही राजनीतिक अस्थिरता का दौर जारी है। इस बीच शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस गठबंधन करके सरकार बनाने की कोशिश तो की जा रही है लेकिन लगातार जारी बैठकों के बाद भी शरद पवार गठबंधन को लेकर अपने पत्ते नहीं खोल रहे हैं।

Congress Shivsena NCP

वहीं महाराष्ट्र कांग्रेस के कार्यकर्ता लगातार इस गठबंधन का विरोध कर रहे हैं। जबकि कांग्रेस के चुने हुए विधायक इस बात को लेकर राजी हैं कि शिवसेना का समर्थन करके महाराष्ट्र में सरकार का गठन किया जाए। इन सबके बीच शिवसेना के विधायक ही कई बार बागी तेवर अपना चुके हैं और उन्होंने पार्टी हाईकमान पर यह कहकर दबाव बनाना शुरू कर दिया है कि जिस हिंदूत्व की बात करके वह जनता का वोट हासिल कर पाए हैं उसे ताक पर रखकर अगर सरकार का गठन इन दोनों पार्टियों के साथ मिलकर कर लिया गया तो वह जनता के बीच जाकर किस तरह से यह बता पाएंगे कि जिनके खिलाफ उन्होंने चुनाव लड़ा है उनके साथ आखिर विचारधारा के स्तर पर अलगाव होने के बाद भी क्यों उनका समर्थन लिया गया।

shivsena NCP

शिवसेना के विधायकों ने इस बात को लेकर भी आपत्ति जताई है कि एक पद जिससे सिर्फ ठाकरे परिवार को फायदा होगा, उसके लिए क्यों पूरी पार्टी को ऐसे रखा जा रहा है। मीडिया में इससे पहले रिपोर्ट आई थी कि इसी वजह से शिवसेना विधायकों के बीच गाली-गलौच और हाथापाई की नौबत तक आ गई थी। इतना ही नहीं मीडिया में आई खबरों की मानें तो एनसीपी चीफ शरद पवार से उद्धव ठाकरे की मुलाकात को लेकर भी शिवसेना विधायक खुश नहीं हैं। एक विधायक ने उद्धव को यहां तक चेतावनी दी कि पवार कभी भी उन्हें सत्ता पर नियंत्रण नहीं करने देंगे। विधायकों ने कथित तौर पर ठाकरे से यह भी पूछा था कि मतदाताओं को वे कैसे बताएंगे कि क्यों उन्होंने उन्हीं पार्टियों का दामन थाम लिया जिनके खिलाफ वह चुनाव लड़े थे।

वहीं महाराष्ट्र में सरकार गठन के लिए न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चल रही बातचीत में सबसे बड़ी बाधा शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे का अपने बेटे को मुख्यमंत्री बनाने की मांग पर अड़े रहना बताया जा रहा है। मीडिया में आई खबरों की मानें तो एनसीपी के एक नेता ने बताया कि उद्धव ठाकरे अपने बेटे आदित्य ठाकरे को सीएम बनाने की बात कह रहे हैं। इससे एनसीपी के कई नेता असहज महसूस कर रहे हैं जो आदित्य जैसे नौसिखिए के साथ काम नहीं करना चाहते हैं। हालांकि, कांग्रेस व एनसीपी के नेता उद्धव ठाकरे के साथ काम करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही इस बात का भी जिक्र किया गया कि एनसीपी मुख्यमंत्री पद के लिए बारी-बारी से रोटेशन की बात कर रही है। वह चाहती है कि रोटेशन के तहत उसकी पार्टी का भी मुख्यमंत्री बने।

uddhav and aditya thackrey

मतलब साफ है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन में देरी कांग्रेस की वजह से नहीं बल्कि एनसीपी प्रमुख की वजह से हो रही है जो कि कांग्रेस की तुलना में शिवसेना को लेकर ज्यादा सशंकित हैं। इसी के साथ एनसीपी प्रमुख शरद पवार के उस बयान पर भी गौर करने की जरूरत है जब उन्होंने दिल्ली में सोनिया गांधी से मिलने के बाद मीडिया के सामने आकर कहा था कि राज्य में सरकार गठन को लेकर उनका विचार विमर्श नहीं हुआ। इसके साथ ही एनसीपी नेता शिवसेना की कार्यशैली व पार्टी की विचारधारा के विरोधाभासों को लेकर भी चिंतित हैं।

uddhav thackeray and Sharad Pawar

ऐसे में भले ही महाराष्ट्र में सरकार के गठन को लेकर शिवसेना ताल ठोंक रही हो लेकिन इस बात को संजय राउत के उस बयान से समझने की जरूरत है जब उन्होंने मीडिया के सामने आकर कहा था कि ‘शरद पवार के बयानों को समझना कोई आसान काम नहीं है।’

sharad pawar and sanjay raut

इन सब के बीच एक पेंच इस गठबंधन को लेकर और फंसता नजर आ रहा है जिसको लेकर शिवसेना की हालत ‘बिन पानी के मीन’ वाली हो गई है। आपको याद होगा कि राज्यसभा को संबोधित करते हुए शीतकालीन सत्र के पहले दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एनसीपी और उनके पार्टी प्रमुख शरद पवार की जमकर तारीफ की जिसको लेकर शिवसेना के अंदर संशय की स्थिति पैदा हो गई। शिवसेना अभी पीएम मोदी के इस संबोधन की ठीक से समीक्षा भी नहीं कर पाई थी कि अचानक पीएम नरेंद्र मोदी के साथ शरद पवार की आज होनेवाली मुलाकात ने उनके अंदर एक किस्म की ऊहापोह की स्थिति फिर से शुरू हो गई।

ऐसे में साफ हो गया है कि कांग्रेस को भले इस गठबंधन से बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं हो लेकिन सरकार गठन से पहले शिवसेना के साथ समझौता शरद पवार ठोंक-बजाकर करना चाहते हैं। ताकि सरकार के गठन के बाद एनसीपी को किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़े। इसके साथ ही शरद पवार की यह भी कोशिश है कि पार्टी को नौसिखिए मुख्यमंत्री का बोझ लेकर गठबंधन का हिस्सा नहीं बनना पड़े। यह सबकुछ शिवसेना के लिए पचाना आसान नहीं लग रहा है शायद यही वजह है कि महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर रास्ता साफ होता नहीं दिख रहा।