नरेंद्र मोदी सरकार 2.0: कोरोना काल में दुनिया का सरताज बना भारत…

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोनावायरस के कहर से त्राहिमाम कर रही है वहीं नरेंद्र मोदी सरकार की सफल नीतियों और इस दिशा में किए गए पूर्वनियोजित प्रयासों का नतीजा है कि देशभर में इसका कहर वैसा नहीं बरपा है जैसा पूरी दुनिया भारत के बारे में अनुमान लगा रही थी।

Written by: May 22, 2020 5:08 pm

जहां एक तरफ पूरी दुनिया कोरोनावायरस के कहर से त्राहिमाम कर रही है वहीं नरेंद्र मोदी सरकार की सफल नीतियों और इस दिशा में किए गए पूर्वनियोजित प्रयासों का नतीजा है कि देशभर में इसका कहर वैसा नहीं बरपा है जैसा पूरी दुनिया भारत के बारे में अनुमान लगा रही थी। दुनिया के सबसे अच्छे स्वास्थ्य सेवा से युक्त देशों ने जहां कोरोना के कहर के आगे घुटने टेक दिए वहीं भारत में इसका असर उतना देखने को नहीं मिल रहा है। हालांकि भारत में भी हाल के दिनों में इसके प्रसार में तेजी आई है लेकिन तबतक सरकार इसके बेहतर समाधान की दिशा में सारे कदम उठा चुकी है। चीन से चलकर इस वायरस ने पूरी दुनिया में कोहराम मचाना शुरू किया तो उससे पहले ही नरेंद्र मोदी सरकार की तरफ से इसको लेकर कई एहतियाती कदम उठा लिए गए थे। जिसकी तारीफ आज भी पूरी दुनिया कर रही है।

जनवरी के पहले हफ्ते से ही देश के हर हवाई अड्डे पर विदेश से भारत आनेवाले लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग शुरू कर दी गई थी इसके साथ ही लोगों को एहतियातन विदेश यात्रा से आने के बाद होम क्वारंटीन किया जाने लगा था। आज उशी का नतीजा है कि यह वायरस भारत में अभी भी कम्यूनिटी स्प्रेड की हालत में नहीं पहुंच पाया है।

विदेशों में फंसे भारतीयों को सबसे पहले मोदी सरकार ने किया सुरक्षित

इस सब के बीच जब पूरी दुनिया में कोरोना कोहराम मचा रहा था मोदी सरकार की अपने देश की जनता के प्रति प्यार ही था कि एयर इंडिया के कर्मचारी लगातार विदेशों में फंसे भारतीयों को वापस लाने के काम में लगे हुए थे। लॉकडाउन में इस काम को थोड़े समय के लिए रोका गया लेकिन पुनः इस काम को फिर से जारी कर दिया गया है। एक फरवरी को चीन के वुहान शहर से 324 छात्रों को वापस भारत लाने से शुरू हुआ ये मिशन अब भी जारी है। विदेश में फंसे हज़ारों भारतीयों को अभी तक वापस भारत लाया जा चुका है।

Israel thanks Air India

इनमें से ज़्यादातर भारतीय चीन, इटली और ईरान में फंसे हुए थे। इसके साथ ही श्रीलंका, इजरायल सहित कई और देशों के नागरिकों को भी अलग-अलग जगहों से निकालकर एयर इंडिया के कर्मचारियों ने उनके देश तक सुरक्षित पहुंचाया। जिसके कारण भारत के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करने से इन देशों के लोग नहीं थक रहे।

दुनिया के कई शक्तिशाली देश भी मान रहे हैं पीएम मोदी का लोहा

Israel thanks Air India

भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण का पहला मामला 30 जनवरी को सामने आया था। इसके बाद 29 मार्च को एक हजार का आंकड़ा हुआ। 13 अप्रैल को कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या देश में दस हजार पहुंच गई। छह मई को यह आंकड़ा 50 हजार हो गया और यह एक लाख का आंकड़ा पहुंचने में दो हफ्ते का वक्त लगा और 18 मई को एक लाख हो गया। भारत भले ही एक लाख कोरोना केस वाला दुनिया का 11वां देश बन गया हो, लेकिन यहां तक पहुंचने में भारत में दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में अधिक समय लगा है। यही नहीं, स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक पूरी दुनिया में कोरोना से तीन लाख 20 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जो प्रति एक लाख जनसंख्या में औसतन 4.1 बैठता है। वहीं भारत में प्रति एक लाख जनसंख्या पर मौत का आंकड़ा 0.2 लोगों का है। कुल संक्रमित व्यक्तियों में भी मौत का प्रतिशत भारत में 3.1 फीसदी है, जबकि दुनिया में यह औसत दोगुने से भी ज्यादा 6.8 फीसदी है।

india Corona case

मोदी सरकार के सतत प्रयास और कोरोना की संक्रमित की जल्द पहचान एवं बेहतर इलाज की बदौलत भारत इसे 0.2 तक सीमित रखने में सफल रहा। बात सिर्फ प्रति एक लाख जनसंख्या पर हुई मौतों का ही नहीं है। इलाज के बाद भारत में अस्पताल से इलाज के बाद स्वस्थ्य होकर बाहर आने वालों मरीजों की संख्या 93 फीसदी है। केवल सात फीसदी मरीजों की मौत हुई है। जबकि पूरी दुनिया में औसतन 85 फीसदी मरीज ही स्वस्थ्य होकर अस्पताल से बाहर आ रहे हैं। कुल केस में भी भारत में स्वस्थ्य होने वाले मरीजों की संख्या 38.73 पहुंच गई है।

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सबसे बड़ी बात यह है कि टेस्टिंग के अनुपात में पोजेटिव मरीजों की संख्या भारत में दुनिया के दूसरे देशों से काफी कम है। भारत में औसतन 25 टेस्ट करने पर एक कोरोना पोजेटिव मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक हिन्दुस्तान में संक्रमितों संख्या 100 से 1 लाख तक पहुंचने में 64 दिन का वक्त लगा। जो अन्य देशों से काफी बेहतर है। अमेरिका और स्पेन को यह आंकड़ा छूने में भारत की तुलना में तकरीबन आधा वक्त लगा था।

इस संकट की घड़ी में 120 से ज्यादा देशों को दवाईयां भेज मदद कर चुका है भारत

भारत ने पिछले दो माह के दौरान करीब 120 देशों को पैरासिटामोल और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा का निर्यात किया है। कोविड-19 महामारी की वजह से दुनियाभर में इन दवाओं की मांग काफी बढ़ गई है। भारत ने इन दवाओं के निर्यात पर इस उद्देश्य से अंकुश लगाया था ताकि सिर्फ अमीर और ताकतवर देशों को ही नहीं, बल्कि अल्प विकसित देशों को भी ये दवाएं उपलब्ध हो सकें।

पिछले दो माह के दौरान भारत करीब 120 से ज्यादा देशों की इन दवाओं की जरूरतों को पूरा कर चुका है। 40 से ज्यादा देशों को ये दवाएं अनुदान या मुफ्त में दी गईं हैं। इतना सबकुछ करने से पहले भारत ने यह सुनिश्चित किया कि अपनी जरूरतों को पहले पूरा किया जाए। उसके बाद दुनिया के देशों के तीन-चार अरब लोगों की मदद की जाए।

कोरोना काल में WHO में बढ़ा भारत का कद

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन विश्व स्वास्थ्य संगठन के 34 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव बोर्ड के चेयरमैन का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने जापान के डॉ. हिरोकी नकतानी की जगह ली है। गौरतलब है कि मौजूदा वक्त में विश्व स्वास्थ्य संगठन में भारत को महत्वपूर्ण पद मिलना कई मायनों में बेहतर है। कोरोना काल में भारत ने न सिर्फ अपने देश में काफी हद तक कोरोना को रोकने का प्रयास किया है बल्कि पूरे विश्व को मदद भी की है।

19 मई को 194 देशों की विश्व स्वास्थ्य सभा द्वारा भारत को कार्यकारी बोर्ड में नियुक्त करने के प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए। डब्ल्यूएचओ के दक्षिण-पूर्व एशिया समूह ने पिछले साल सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि भारत को तीन साल के कार्यकाल के लिए कार्यकारी बोर्ड के लिए चुना जाएगा।