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ऋग्वेद में मनुष्य और देवों की प्रीति अनूठी है। वैदिक अभिजन सभी अवसरों पर देवों का स्मरण करते हैं। वे दुखी होते हैं तो देवों की स्तुतियां करते हैं और जब सुखी होते हैं तब भी लेकिन आनंद और उत्सव के समय वे देवों को ज्यादा याद करते हैं।

ऋग्वेद अतिप्राचीन असाधारण काव्य रचना है। इसके भीतर ऋग्वेद से भी पूर्व के वैदिक समाज के विवरण हैं। ऋग्वेद की भाषा व्यवस्थित है। इस स्तर की भाषा के विकास के लिए हजार दो हजार वर्ष का समय पर्याप्त नहीं है।

पाकिस्तान से भारत का आयात इस वर्ष मार्च में घट कर 28.4 करोड़ डालर के बराबर रहा जबकि मार्च 2018 में यह आंकड़ा 3.5 करोड़ डालर था।

ऋग्वेद के रचनाकाल के पहले भी एक संस्कृति थी, सभ्यता थी और दर्शन भी था। ऋग्वेद में उपलब्ध संस्कृति व सभ्यता के तत्व पूर्व वैदिक काल का विस्तार हैं।

श्मीर मध्यस्थता के बहाने ट्रंप ने अफगानिस्तान से अमेरिकी फौजों की वापसी के लिए मजबूत करार के संकेत दिए हैं। पिछले 2 दशक से अमेरिका पाक प्रायोजित आतंकियों की शरणस्थली बने अफगानिस्तान से आतंकी समूहों को खत्म करने की कोशिश कर रहा है।

2014 से लेकर असहिष्णुता (intolerance),  मॉब लिंचिंग, हेट क्राइम जैसे शब्दों पर इस तरह सार्वजनिक बहस क्यों हो रही है। क्यों इस पूरे कालखंड में इन शब्दों में ‘जय श्रीराम’ का तड़का लगाकर परोसने की कोशिश की जा रही है।

सोनभद्र नरसंहार में मारे गए दस लोगों के परिवार के सदस्यों से मिलने की जिद पर अड़ीं कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा एक बार फिर चुनार गेस्ट हाउस के बाहर धरना पर बैठ गईं।

जिस आबादी को लगभग डेढ़ लाख साल लगे 100 करोड़ पहुंचने में उसे हमने मात्र 214 सालों में ही 800 करोड़ के आसपास पहुंचा दिया है और अगर हम इसी गति से बढ़ते रहे तो 2050 में 1000 करोड़ के पार होंगे

ऋग्वेद की इस अनुभूति का विस्तार अथर्ववेद में भूमि सूक्त है। यहां पृथ्वी हमारी माता है हम सब इसके पुत्र हैं - पुत्रो अहम् पृथित्याः। ऋग्वेद की इसी प्रेरणा से गंगा यमुना आदि नदियां माता हैं।