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पाश्चत्य जगत की भोगवादी चमक-धमक को छोड़कर स्वामी विवेकानंद का शिष्यत्व ग्रहण करने को आतुर आयरिश युवती मार्गरेट भारत की ही हो गयी I वेदांत को सीखा,अपनाया और जीया भी I जिन तेजस्वी गुरु स्वामी विवेकानंद के आकर्षक व्यक्तित्व और सदाचार से प्रभावित होकर मातृभूमि छोड़ी थी।

विगत कुछ दिनों से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर आम चर्चा है उस पर एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में देश के पूर्व मुख्यन्यायधीश जो की समाज के दलित वर्ग से आते हैं उनके द्वारा कार्यक्रम में सामाजिक न्याय के विषय को उठाना।

हमारी संस्कृति में बेटियों को लक्ष्मी माना गया है क्योंकि बेटी सौभाग्य और समृद्धि लाती हैं। उन्होंने कहा था कि हमारे बीच में कई ऐसी बेटियां होंगी जो अपनी मेहनत और लगन से, परिवार के साथ-साथ समाज और देश का नाम रौशन कर रही होंगी।

सविता सूर्य ही हैं। सूर्य किरणें स्वर्णिम होती है। सविता देव का मण्डल 1 सूक्त 35 में स्वर्ण जोड़कर सुंदर मानवीकरण हुआ है। कहते हैं, “सविता देव ‘हिरण्याक्ष’ स्वर्ण आखों - दृष्टि वाले हैं।

श्राद्ध सामान्य अंधविश्वासी कर्मकाण्ड नहीं है। हमारे पूर्वजों ने ही ऐसे सुंदर कर्मकाण्ड को बड़े जतन के साथ गढ़ा है। इस कर्मकाण्ड में स्वयं के भीतर पूर्वजों के प्रवाह का पुनर्सृजन संभव है।

ऋग्वेद के अधिकांश देवता प्रकृति की शक्ति हैं। सूर्य, पृथ्वी, जल, वायु, मरूत, नदी आदि देव प्रकृति में प्रत्यक्ष हैं। लेकिन इन्द्र प्रकृति की प्रत्यक्ष शक्ति नहीं हैं। ऋग्वेद में सभी देवों की तुलना में इन्द्र की सबसे ज्यादा स्तुतियां हैं।

एक देश, एक टैक्स... एक देश, एक चुनाव.....इसी तर्ज पर ‘एक देश, एक भाषा’ का नारा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिया।

पूर्वज अनुभूति में पृथ्वी सजीव है। यह निर्जीव नहीं है। लाखों जीवों की धारक है। इसी में उगना उदय और अस्त होना प्रत्येक प्राणी की नियति है। यह जननी है। पृथ्वी को माता कहने वाले यह ऋषि अंधविश्वासी नहीं हैं।

7 सितंबर को मोदी सरकार-2 के सौ दिन पूरे हो रहे हैं, इस मौके पर जानना जरूरी है कि आखिर मोदी सरकार के लगातार दूसरे कार्यकाल में ये 100 दिन कैसे रहे। बता दें कि शुरुआती इन सौ दिनों में मोदी सरकार जम्मू-कश्मीर से धारा 370 का हटाना और कई महत्वपूर्ण बिलों को पास करवा चुकी है।