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नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमला बोलनेवाली कांग्रेस की समझ पर भी अब देश की जनता...

अस्तित्व पूर्ण है। इसका प्रकट भाग पूर्ण है और अप्रकट भी। प्रकृति इसकी पूर्ण अभिव्यक्ति है। इसलिए पूर्णता का आस्वाद...

प्रकृति सुसंगत व्यवस्था है। यह अपनी अव्यवस्था को भी अल्पकाल में पुनर्व्यवस्थित करती है। प्रकृति की गति की एक लय...

अस्तित्व रहस्यपूर्ण है। सृष्टि का उद्भव हजारों साल से विश्व जिज्ञासा है। भारतीय इतिहास के वैदिक काल में भी सृष्टि...

निद्रा रहस्यपूर्ण है। निद्रा और जागरण के संसार भी भिन्न है। हम जागते हुए इसी दुनिया में होते हैं, इसी...

होली आई। गई। होली प्रकृति का सौन्दर्य है। साधारण नहीं। अति साधारण। तब प्रकृति अपनी पूरी आभा से खिलती है।...

प्राण विश्वधारक दिव्यता हैं। प्राण का घनत्व ही जीवन का गाढ़ापन है। यह प्राण ही शरीर के सभी अंगों में...

प्राण नहीं तो जीवन नहीं। संसार प्राणमय है। वैदिक साहित्य में प्राण की प्राणवान स्तुतियां हैं। प्रश्नोपनिषद् (2.5) में कहते...

संसार कर्म क्षेत्र है। कर्म की प्रेरणा का केन्द्र इच्छा है। कर्मफल प्राप्ति की इच्छा कर्म कराती है। इच्छाएं अनंत...