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ऋग्वेद में दर्शन के बीज हैं। वे पौध बनने को आकुल व्याकुल हैं। अदिति और पुरूष जेसे प्रतीकों में वेदांत दर्शन का जन्म दिखाई पड़ता है। मन सम्बंधी प्रश्नों में परवर्ती योग दर्शन के सूत्र हैं। सांख्य वैशेषिक दर्शन व मीमांसा के भी सूत्र ऋग्वेद में हैं।

जिसके कंकाल आजतक घाटी में मिल रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस पूरी तबाही का कारण मानसून का जल्दी आ जाना और ग्लेशियरों का पिघलना बताया था।

अमेरिका और ईरान के बीच बवाल बढ़ता ही जा रहा है। दुनिया के इस सबसे शक्तिशाली मुल्क अमेरिका ने ईरान के खिलाफ भविष्य का 'ब्रह्मास्त्र' चलाया है। अपने अत्‍याधुनिक ड्रोन को मार गिराए जाने से बौखलाए राष्‍ट्रपति डॉनल्‍ड ट्रंप ने मिसाइल हमले के आदेश पर यू-टर्न के बाद ईरान पर 'साइबर स्‍ट्राइक' किया है।

23 जून 1980 को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के छोटे बेटे संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत हुई थी। संजय गांधी को इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर देखा जाता था। वह तेज तर्रार शैली और दृढ़ निश्चयी सोच और सादगी की वजह से वो देश की युवा पसंद थे। इस वजह से इंदिरा गांधी के अलावा बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ताओं को भी झटका लगा।

अग्नि ऋग्वेद के प्रतिष्ठित देवता हैं। ऋग्वेद के मंत्रोदय के पहले से ही भारत के लोग अग्नि उपयोग व तत्वदर्शन से सुपरिचित थे। वैदिक ऋषियों ने अग्नि की सर्वव्यापकता और सर्वसमुपस्थिति का साक्षात्कार किया था।

मुजफ्फरपुर में दिमागी बुखार (Acute Encephalitis Syndrome) से हाहाकार मचा है, चीत्कार और हद्रय विदारक तस्वीरों ने देश को हिलाकर रख दिया है फिर भी प्रशासन क्यों है इतना लाचार.....?

देश में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने को लेकर लंबे समय से बहस होती आ रही है। जिसे लेकर पीएम मोदी खुद भी काफी सीरियस हैं। पीएम मोदी ने सभी राजनीतिक दलों की इस पर आम राय बनाने के लिए मीटिंग भी की। बता दें कि इस मामले पर चुनाव आयोग, नीति आयोग, विधि आयोग और संविधान समीक्षा आयोग बातचीत कर चुके हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने एक बार सबको खासकर अपनी ही पार्टी के लोगों को चौंका दिया है, जिसका कारण है लोकसभा स्पीकर का पद। दरअसल मोदी सरकार 2.0 में लोकसभा का स्पीकर ओम बिड़ला को बनाया गया है, जो राजस्थान के कोटा से बीजेपी सांसद हैं। चूंकि ओम बिड़ला का नाम इससे पहले राष्ट्रीय राजनीति में कभी नहीं सुना गया।

कारीगरों व श्रमिकों के सामजिक सम्मान व यश प्रतिष्ठा के मंत्र सूक्त बड़े प्यारे हैं। आधुनिक काल में सामाजिक न्याय की चर्चा होती है। संप्रति शिक्षित विद्वानों का आदर प्रथम है लेकिन वैदिक समाज के कारीगर ऋषियों से भी ज्यादा सम्मानित है।